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Hati Community : अनुसूचित जनजातीय दर्जे के लिए हाटी समुदाय को करना होगा इन्तजार, HC ने लगाई अंतरिम रोक

Hati Community ST Status : उच्च न्यायालय ने पाया कि ट्रांसगिरि क्षेत्र में रहने वाला हाटी समुदाय निर्धारित शैक्षणिक और आर्थिक प्रावधानों को पूरा नहीं कर पाया है।

हाइलाइट्स :

  • 18 मार्च तक होगी अब मामले की सुनवाई।

  • सरकार की अधिसूचना पर उच्च न्यायालय ने लगाई रोक।

  • 1967 से हाटी समुदाय के लोग कर रहे संघर्ष।

हिमाचल प्रदेश। हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजातीय का दर्जा देने का मामला एक बार फिर से लटक गया है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने सरकार की अधिसूचना के लागू होने पर 18 मार्च तक के लिए रोक लगा दी है। एससी समुदाय की तरफ से हाटी को जनजातीय दर्जा देने को लेकर उच्च न्यायालय में अपील की गई, जिस पर गुरुवार को न्यायालय ने अंतरिम आदेश जारी किए। हालांकि केंद्र सरकार से कानून बनने के बाद हिमाचल सरकार ने भी इसको हरी झंडी दिखा दी थी, क्योंकि मामला न्यायालय के विचाराधीन था। ऐसे में अब हाटी समुदाय के लोगों को प्रमाणपत्र लेने के लिए न्यायालय के निर्णय का इंतजार करना पड़ेगा।

इस मामले में याचिकाकर्ताओ के अधिवक्ता रजनीश ने बताया कि, हाटी समुदाय को जनजातीय दर्जा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए गए संविधान संशोधन और प्रदेश सरकार की ओर से की गई अधिसूचना पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। उन्होंने बताया कि, जनजातीय दर्जा देने के लिए स्थानीय समुदाय मानदंड को आधार बनाया गया है। इसके तहत इलाके की आर्थिक पिछड़ेपन और साक्षरता को कसौटी पर रखा जाता है। लेकिन हाटी समुदाय इन मानदंडों को पूरा करने में असफल रहा।

उच्च न्यायालय ने पाया कि ट्रांसगिरि क्षेत्र में रहने वाला हाटी समुदाय निर्धारित शैक्षणिक और आर्थिक प्रावधानों को पूरा नहीं कर पाया है। इस इलाके में एक गांव एशिया का सबसे अमीर माना जाता है। इसके साथ इस इलाके में 80 फीसदी साक्षरता दर है। उन्होंने कहा कि मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी, तब तक हाटी को जनजातीय दर्जा मिलने पर रोक रहेगी।

खास बात यह है कि 1 जनवरी को राज्य सरकार ने हाटी समुदाय को जनजातीय दर्जा देने की केंद्र की अधिसूचना पर मोहर लगाई। गौरतलब है कि एक जनवरी को अधिसूचना जारी होने के बाद क्षेत्र के कुछ लोगों ने अनुसूचित जनजाति के प्रमाण पत्र भी बनवा लिए थे। कई लोगों को उनके जाति प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए थे, लेकिन अब उच्च न्यायालय ने मामले में स्टे लगा दिया है। लिहाजा अब यह प्रमाण पत्र मान्य नहीं होंगे।

ट्रांसगिरी क्षेत्र में हाटी समुदाय के लोग 1967 से उत्तराखंड के जौनसार बाबर को जनजाति दर्जा मिलने के बाद से संघर्षरत थे। लगातार कई वर्षों तक संघर्ष के बाद केंद्रीय कैबिनेट ने हाटी समुदाय की मांग को 14 सितंबर 2022 को अपनी मंजूरी दी थी। उसके बाद केंद्र सरकार ने 16 दिसंबर 2022 को इस बिल को लोकसभा से पारित करवाया। उसके बाद यह बिल राज्यसभा से भी पारित हो गया।

राज्यसभा से पारित होने के बाद सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इसे राष्ट्रपति के लिए भेजा गया था। नौ दिनों में ही राष्ट्रपति ने विधेयक पर लगाई मुहर लगा दी थी। हाटी समुदाय में करीब दो लाख लोग चार विधानसभा क्षेत्र शिलाई, रेणुका जी, पच्छाद तथा पांवटा साहिब में रहते हैं। जिला सिरमौर की कुल 269 पंचायतों में से ट्रांसगिरी में 154 पंचायतें आती हैं। इन 154 पंचायतों की 14 जातियों तथा उप जातियों को एसटी संशोधित विधेयक में शामिल किया गया।

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