कुतुब मीनार का इतिहास है सदियों पुराना, जानिए इससे जुड़े विवादों के बारे में

नई दिल्ली में स्थित कुतुब मीनार को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। कुछ दिनों पहले कुतुब मीनार परिसर में खुदाई किए जाने की खबरें आईं थीं।
कुतुब मीनार का इतिहास है सदियों पुराना, जानिए इससे जुड़े विवादों के बारे में
जानिए कुतुब मीनार से जुड़े विवादों के बारे मेंSyed Dabeer Hussain - RE

राज एक्सप्रेस। पिछले कुछ समय में देश की पुरानी इमारतों और एतिहासिक महत्वों वाली जगहों को लेकर बहस छिड़ी हुई है। जिनमें से कुछ विवाद अदालतों तक भी पहुंचे हैं, जिसमें ज्ञानवापी मस्जिद का मुद्दा प्रमुख है।

इस बीच अब नई दिल्ली में स्थित कुतुब मीनार को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। कुछ दिनों पहले कुतुब मीनार परिसर में खुदाई किए जाने की खबरें आईं थीं। इसके बाद कुछ संगठनों ने इसका नाम बदलकर विष्णु स्तंभ कर कुतुब मीनार परिसर में पूजा का अधिकार दिए जाने की मांग भी की।

इस मामले में एक और मोड़ तब आया जब एक व्यक्ति ने कुतुब मीनार के स्वामित्व की मांग करते हुए और राजधानी के साकेत कोर्ट में आवेदन भी दे दिया है।

कुतुब मीनार से जुड़ा विवाद क्या है?

ASI के पूर्व रीजनल डायरेक्टर धर्मवीर शर्मा ने दावा किया है कि कुतुब मीनार को 5वीं शताब्दी में राजा विक्रमादित्य ने बनवाया था, जिसके बाद से यह विवाद सुर्खियों में आया। उनके अनुसार यह एक सन टॉवर है जिसमें 25 इंच का झुकाव है। जिसका निर्माण सूर्य के बारे में जानने के लिए किया गया था।

विश्व हिंदू परिषद का भी मानना है कि कुतुब मीनार को हिन्दू शासक के समय में विष्णु भगवान के मंदिर पर बनवाया गया था और यह मंदिर पर बना एक विष्णु स्तंभ था।

जबकि यूनाइटेड हिंदू फ्रंट का कहना है कि कुतुब मीनार स्थित मस्जिद का निर्माण कई मंदिरों को तोड़कर हुआ था। इसलिए यहां फिर से मूर्तियों की स्थापना की जाए और पूजा करने दी जाए।

इसी साल अप्रैल में कुतुब कॉम्प्लेक्स से गणेश जी की मूर्तियों को हटाने के लिए कहा गया था लेकिन दिल्ली की एक कोर्ट ने आदेश दिया कि मामले की सुनवाई तक ऐसा नहीं किया जाएगा।

कुतुब मीनार का इतिहास :

इतिहासकारों के मुताबिक कुतुब मीनार का निर्माण सन 1193 में कुतुबुद्दीन ऐबक ने शुरू करवाया था, लेकिन उसकी मृत्यु के बाद इस काम को इल्तुतमिश ने पूरा करवाया।

जबकि भूकंप और बिजली गिरने के कारण क्षतिग्रस्त होने के बाद इसकी मरम्मत का कार्य फिरोज शाह तुगलक और सिकंदर लोदी ने करवाया था। इसके साथ ही जब 1803 में एक भूकंप के कारण फिर से इसे नुकसान पहुंचा तो सन 1814 में इसकी मरम्मत मेजर रॉबर्ट स्मिथ ने करवाई थी।

इन विवादों और ऐतिहासिक तथ्यों से इतर मामला न्यायालय में है, और फैसले के बाद ही इस बारे में कोई पुख्ता राय कायम की जा सकेगी।

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