बढ़ते जघन्य अपराध के बीच महिला सुरक्षा पर MHA सख्त- जारी की नई एडवाइजरी

महिलाओं के खिलाफ बढ़ते जघन्य अपराध पर संज्ञान लेते हुए MHA ने राज्य-केंद्रशासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी कर महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों के संबंध में पुलिस की अनिवार्य कार्रवाई के बारे में बताया।
बढ़ते जघन्य अपराध  के बीच महिला सुरक्षा पर MHA सख्त- जारी की नई एडवाइजरी
बढ़ते जघन्य अपराध के बीच महिला सुरक्षा पर MHA सख्त- जारी की नई एडवाइजरीSyed Dabeer Hussain - RE

दिल्‍ली, भारत। देश में कोरोना महामारी के काल में लगातार महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ते ही जा रहे हैैं और इन घटनाओं के बारे में सुनकर ऐसा लगता है, जैसे अपराधियों में कानून का जरा भी डर नहीं है। इसी बीच रेप के बढ़ते मामलों पर एक्‍शन लेते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने दो-पन्नों की नई एडवाइजरी जारी की है।

MHA की एडवाइजरी में महिला सुरक्षा के सख्त निर्देश :

शनिवार को जारी हुई गृह मंत्रालय की इस नई एडवाइजरी में महिला सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश एवं मंत्रालय ने महिला अपराध के मामलों में लापरवाही न बरतने का दिशा-निर्देश दिया है। MHA की एडवाइजरी के मुताबिक, अब महिला अपराध पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य होगा। महिला के खिलाफ अपराध यदि थाने के अधिकार क्षेत्र के बाहर हुआ है तो उस स्थिति में जीरो एफआइआर दर्ज की जाए।

लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई :

मंत्रालय ने आईपीसी और सीआरपीसी के प्रावधान गिनाते हुए कहा कि, राज्‍य/केंद्रशासित प्रदेश इनका पालन सुनिश्चित करें। गृह मंत्रालय की ओर से साफ कहा गया है कि, एडवाइजरी में जारी बातों पर लापरवाही बरतने वाले व महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में जरा भी चूक होने पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

MHA की एडवाइजरी के जरूरी दिशा-निर्देश :

  • संज्ञेय अपराध की स्थिति में एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। कानून में 'जीरो एफआईआर' का भी प्रावधान है (अगर अपराध थाने की सीमा से बाहर हुआ है)।

  • IPC की धारा 166 A(c) के तहत, एफआईआर दर्ज न करने पर अधिकारी को सजा का प्रावधान है।

  • सीआरपीसी की धारा 173 में बलात्‍कार से जुड़े मामलों की जांच दो महीनों में करने का प्रावधान है। MHA ने इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल बनाया है जहां से मामलों की मॉनिटरिंग हो सकती है। सीआरपीसी के सेक्‍शन 164-A के अनुसार, बलात्‍कार/यौन शोषण की मामले की सूचना मिलने पर 24 घंटे के भीतर पीड़‍िता की सहमति से एक रजिस्‍टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर मेडिकल जांच करेगा।

  • इंडियन एविडेंस ऐक्‍ट की धारा 32(1) के अनुसार, मृत व्‍यक्ति का बयान जांच में अहम तथ्‍य होगा।

  • फोरेंसिंक साइंस सर्विसिज डायरेक्‍टोरेट ने यौन शोषण के मामलों में फोरेंसिंक सबूत इकट्ठा करने, स्‍टोर करने की गाइडलाइंस बनाई हैं, उनका पालन हो। अगर पुलिस इन प्रावधानों का पालन नहीं करती तो न्‍याय नहीं हो पाएगा।

  • अगर लापरवाही सामने आती है तो ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्‍त से सख्‍त कार्रवाई होनी चाहिए।

  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश सभी संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में जरूरी दिशानिर्देश जारी कर सकते हैं ताकि इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो सके।

MHA की नई एडवाइजरी का मकसद क्‍या :

बता दें, पिछले कुछ दिनों में खासतौर से उत्‍तर प्रदेश के हाथरस कांड में 19 साल की दलित लड़की के साथ हुए कथित गैंगरेप और हत्या के मामले में पुलिस की लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे थे और ये मामला राष्ट्रीय स्तर पर काफी सुर्खियों में छाया रहा, इसी के चलते केंद्र और राज्य सरकार पर आरोप लग रहे थे कि वे महिला सुरक्षा और महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों के मामलों में न्याय दिलाने को लेकर गंभीर नहीं हैं। इसी के मद्देनजर इसका संज्ञान लेते हुए आज 10 अक्‍टूबर को केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की।

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