इंदिरा गांधी कैसे बनी थीं देश की पहली महिला प्रधानमंत्री
इंदिरा गांधी कैसे बनी थीं देश की पहली महिला प्रधानमंत्रीSyed Dabeer Hussain - RE

जानिए ‘गूंगी गुड़िया’ कही जाने वाली इंदिरा गांधी कैसे बनी थीं देश की पहली महिला प्रधानमंत्री

लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद प्रधानमंत्री पद के कई दावेदार सामने आए, जिनमें से प्रमुख दावेदार थे इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई, गुलजारी लाल नंदा और उस समय के कांग्रेस अध्यक्ष कामराज।

राज एक्सप्रेस। देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आज के ही दिन पहली बार देश की प्रधानमंत्री बनी थीं। तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद 19 जनवरी 1966 को इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री का पद संभाला था। इंदिरा गांधी को आज एक सख्त फैसले लेने वाली प्रधानमंत्री के तौर पर याद किया जाता है। उन्हें ‘आयरन लेडी’ और ‘दुर्गा’ जैसी उपाधियों से भी नवाज़ा गया है। हालांकि यह भी सच है कि किसी समय इंदिरा गांधी की पहचान एक ‘गूंगी गुड़िया’ के तौर पर होती थी। समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया ने इंदिरा को संसद में कई बार "गूंगी गुड़िया" कहा। तो चलिए जानते हैं कि आखिर ‘गूंगी गुड़िया’ कही जाने वाली इंदिरा गांधी कैसे देश की प्रधानमंत्री बनीं?

नेहरु की उत्तराधिकारी :

देश की आजादी के बाद जवाहरलाल नेहरु देश के प्रधानमंत्री बने, लेकिन साल 1964 में नेहरु के निधन के बाद उनके उत्तराधिकारी को लेकर बहस शुरू हो गई। उस समय मोरारजी देसाई को प्रमुख दावेदार माना जा रहा था, लेकिन कांग्रेस में अंदरूनी कलह के चलते सहमति नहीं बन पा रही थी। ऐसे में अंत में लालबहादुर शास्त्री के नाम पर सहमति बनी।

कई दावेदार :

जनवरी 1966 में ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री का अचानक निधन हो गया और देश में एक बार फिर से अगले प्रधानमंत्री को लेकर बहस शुरू हो गई। उस समय गुलजारी लाल नंदा को कार्यवाहक प्रधानमंत्री बना दिया गया। उस समय प्रधानमंत्री पद के कई दावेदार सामने आए, जिनमें से प्रमुख दावेदार थे इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई, गुलजारी लाल नंदा और उस समय के कांग्रेस अध्यक्ष कामराज। इन सभी ने अपने-अपने करीबियों से समर्थन मांगना शुरू कर दिया था।

इंदिरा गांधी vs मोरारजी देसाई :

कांग्रेस में उस समय सिंडिकेट नेताओं की पार्टी में धाक थी और कामराज उसके प्रमुख थे। हालांकि बाद में कामराज एक मीटिंग में प्रधानमंत्री बनने से इंकार कर दिया, लेकिन सिंडिकेट नेता चाहते थे कि कोई ऐसा प्रधानमंत्री बने जो सभी को साथ लेकर चले। उस समय योग्यता और वरीयता के साथ-साथ मोरारजी देसाई हर मायने में इंदिरा गांधी पर भारी थे, लेकिन उनके साथ समस्या यह थी कि उन्हें जो सही लगता था वो करते थे। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व को लगा कि मोरारजी तो उनकी सुनेंगे ही नहीं।

और इंदिरा गांधी बनीं प्रधानमंत्री :

उस समय इंदिरा गांधी की छवि इतनी मजबूत नहीं थी। ऐसे में सिंडिकेट नेताओं को लगता था कि इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनी तो वह उनकी बात मानेगी। हालांकि मोरारजी देसाई को इसकी भनक लगी तो उन्होंने कांग्रेस संसदीय दल के चुनाव करवा कर नेतृत्वकर्ता चुनने का दबाव डाला। इसके बाद प्रधानमंत्री पद के चुनाव के लिए कांग्रेस में वोटिंग हुई। इस वोटिंग में इंदिरा गांधी को 355 और मोरारजी देसाई को केवल 169 वोट मिले। इस तरह इंदिरा गांधी देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं।

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