कोरोना संकट में ई-लर्निंग तक कितनों की पहुंच?
कोरोना लॉकडाउन के कारण देश में ई-लर्निंग की कवायद शुरू।Chandra Pillai

कोरोना संकट में ई-लर्निंग तक कितनों की पहुंच?

स्कूल में बैन मोबाइल कोरोना से प्रभावित एकेडमिक सेशन के कारण बोर्ड्स में ऑनलाइन स्टडी की कवायद के चलते बच्चों के लिए जरूरी हो गया है। सवाल उठता है जिनके पास पीसी, आधुनिक मोबाइल न हों वे क्या करें?

हाइलाइट्स

  • ऑनलाइन स्टडी कितनी फायदेमंद?

  • CBSE ने सुझाए ऑनलाइन विकल्प

  • अशिक्षित, गरीब वर्ग की अपनी परेशानी

  • बोले मामा शिवराज DigiLep से पढ़ें भांजे-भांजियां

राज एक्सप्रेस। Novel CoViD-19 यानी नोवल कोरोना वायरस डिजीज संक्रमण को रोकने देश-दुनिया में लागू लॉकडाउन का असर स्टूडेंट्स के शैक्षणिक सत्र पर भी हुआ है। ऐन परीक्षाओं के वक्त उपजी इस लाइलाज साबित हो रही समस्या का हल तमाम शैक्षणिक मंडलों ने इन कुछ खास पतों-ठिकानों पर ऑनलाइन स्टडी के रूप में खोजा है। लेकिन इसकी क्या परेशानियां हैं? चलिए डालते हैं कुछ खास बिंदुओं पर नजर-

CBSE का कदम :

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन-CBSE) से जारी सूचना पत्र में अभिभावकों के लिए कुछ सलाह जारी की गई हैं। संकट की इस घड़ी को बोर्ड ने बच्चों, टीचर्स समेत अभिभावकों से स्वर्णिम मौके की तरह लेने को कहा है। बोर्ड का मानना है कि इंटरनेट पर उपलब्ध समाधान के कारण बच्चों का घर भी लर्निंग सेंटर हो सकता है।

बोर्ड का मानना है ई-क्लासेस, प्रोजेक्ट्स, एक्टिविटीज़, फन, गेम्स, वीडियो शूट्स जैसी तमाम गतिविधियों से बच्चों का बौद्धिक विकास बाधित होने से बचाया जा सकता है। आपदा की इस घड़ी में जहां टीचर्स खुद को अपग्रेड कर सकते हैं वहीं अभिभावक ऑनलाइन कंटेंट्स की मदद के जरिए फन एंड लर्न ट्रिक से खुद के साथ बच्चों को नई जानकारियों से अपडेट कर सकते हैं।

ऑनलाइन क्लास शुरू :

CBSE के 4 अप्रैल को प्रिंसिपल्स के नाम जारी सर्कुलर के मुताबिक भारत में लागू 21 दिन के लॉकडाउन के दौरान देश के ज्यादातर सीबीएसई स्कूलों ने ऑनलाइन स्टडी प्रोग्राम शुरू किया है। ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट (HRD) यानी मानव संसाधन विकास मंत्रालय के दीक्षा प्लेटफार्म के माध्यम से सीबीएसई ने अधिकतर विषयों को ई-कंटेंट के जरिये पढ़ाने का बीड़ा उठाया है। इसके अलावा गूगल क्लासरूम, बाईजू (सशुल्क सेवा) जैसे कई प्लेटफॉर्म्स के जरिये भी स्टूडेंट्स को पढ़ाई कराई जा रही है।

ऑनलाइन प्रोसेस :

इस प्रक्रिया में स्टूडेंट्स, टीचर्स, अभिभावक शिक्षा सत्र में आवश्यक प्रोजेक्ट, असाइनमेंट से न केवल रूबरू हो सकेंगे बल्कि अपने कार्य को सबमिट भी कर सकेंगे। कहना गलत नहीं होगा कि घर अब लर्निंग एंड स्किल सेंटर का रूप ले रहे हैं।

“कल्पना कीजिये जब एक उत्कृष्ट अध्यापक डिजिटल क्लास रूम के जरिये हजारों बच्चों को एक साथ सिखा रहा होगा तो बुक्स, कंटेंट, स्कूल और अच्छे टीचर की कमी सदा के लिए खत्म हो जाएगी। आइए लॉकडाउन के असर का लाभ उठाते हुए बच्चों को मुस्कुराने का मौका दें और श्रेष्ठ भारत के सपने को साकार करें।”

अनुराग त्रिपाठी, सचिव, सीबीएसई

HRD के लिंक्स :

इससे पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूजीसी ने भी ऑनलाइन स्टडी के लिए 10 लिंक जारी किए थे। एचआरडी के दावे के मुताबिक इन लिंक्स के जरिये स्टूडेंट्स न केवल घर बैठे पढ़ाई कर सकेंगे बल्कि शैक्षणिक सत्र में होने वाले नुकसान की भरपाई करने में भी ये लिंक्स कारगर साबित होंगे।

सोशल मीडिया का सहारा :

सर्कुलर में कक्षा 1 से 12 तक के स्टूडेंट्स के लिए नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) यानी राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की ओर से सुझाए गए शिक्षण सत्र का पालन करने कहा गया है। परिपत्र में इंटरनेट और सोशल मीडिया (वाट्सएप, फेसबुक, ईमेल आदि) जैसे सार्वजनिक मंचों का सहारा लेने के लिए निर्देशित किया गया है। गलत सूचनाओँ जानकारियों से बचने सरकार ने जो डिजिटल प्लेटफार्म सुझाए हैं उनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं।

दीक्षा : डिजिटल प्लेटफॉर्म दीक्षा को MHRD ने जारी किया है। इसे बृहद रूप से केंद्र शासित प्रदेशों समेत 35 राज्यों ने अपनाया है। यह एक फ्री मोबाइल एप्लिकेशन है। इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है लेकिन यह एंड्राइड फोन पर ही चल सकेगा। साथ ही इसको दीक्षा की वेबसाइट के पते https://diksha.gov.in पर जाकर भी देखा-समझा जा सकता है। प्रदत्त जानकारी के अनुसार इसमें 15 भाषाओं में विवरण उपलब्ध हैं।

क्वेश्चन बैंक : कक्षा दसवीं के स्टूडेंट्स के लिए http://cbseacademic.nic.in/revision10.html पर प्रश्नोत्तरी उपलब्ध है।

ई-पाठशाला : इसमें NCERT ने हजारों वीडियो और ऑडियो क्लिप्स के जरिए विद्यार्थियों की जिज्ञासा का समाधान करने की कोशिश की है। इसे http://epathshala.nic.in or http://epathshala.gov.in पते पर देखा जा सकता है।

स्वयं (SWAYAM) : इस मंच पर कक्षा IX-XII के अलावा उच्च शिक्षा संबंधी सामग्री उपलब्ध है। इसे इस पते https://swayam.gov.in पर देखा जा सकता है।

स्वयं प्रभा (SWAYAM PRABHA) : DTH TV चैनल सर्विस है जो 24 घंटे सप्ताह के सातों दिन सेवा प्रदान करती है। इसको डीडी पर पूरे देश में देखा जा सकता है। इसको फ्री डिश सेट टॉप बॉक्स और एंटीना के जरिए देखा जा सकेगा। स्वयं प्रभा को वेबसाइट https://swayamprabha.gov.in पर भी सर्फ किया जा सकता है।

यूट्यूब : सीनियर और सेकेंडरी स्तर के विषयों के लिए इन पतों पर सामग्री उपलब्ध है। https://www.youtube.com/channel/UC1we0IrHSKyC7f30wE50_hQ/videos

https://www.youtube.com/channel/UCG7qv69PhtZlwDzB2vTWzKQ/videos

CM शिवराज का ट्वीट :

इसी तरह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी लॉकडाउन से प्रभावित स्टूडेंट्स के शैक्षणिक सत्र से निपटने के लिए ऑनलाइन स्टडी को बेहतर विकल्प माना है। प्रदेश के बच्चों को भांजे-भांजी मानने वाले मामा शिवराज ने खुद के ट्विटर अकाउंट से टॉपपैरेंट ऐप डाउनलोड करने की सलाह अभिभावकों को दी है। ट्वीट में बताया गया है कि ऐप को bit.ly/topparent से डाउनलोड किया जा सकता है।

पेरेंट्स की नजर से :

ये तो हुई तमाम एजुकेशनल बोर्ड्स की बात जिसमें उन्होंने अभिभावकों से घर को लर्निंग सेंटर बनाकर लर्न बाय फन मैथड से संकट के दिनों को ज्ञान के सागर में बदलने की अपील की है। लेकिन अभिभावकों की भी अपनी-अपनी समस्याएं हैं। जिनको इस तरह समझा जा सकता है-

साक्षरता अभाव : भारत में अक्षर ज्ञान न रखने वाले कई अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूलों के अलावा ट्यूशन का सहारा लेते हैं ताकि उनके बच्चे निरक्षरता के दंश को न भोगें। ऐसे में लॉकडाउन के कारण घर में रहने की विवशता के कारण भी इस वर्ग के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अब इस वर्ग से जुड़े अभिभावकों और उनके बच्चों की बड़ी परेशानी यह भी है कि वे ऑनलाइन स्टडी का सहारा कैसे लें।

तकनीकी अकुशलता : देखने में आया है कि सभी अभिभावक या फिर स्टूडेंट्स मोबाइल टेक्नीक फ्रैंडली नहीं हैं। तकनीक कौशल के अभाव के चलते इस कैटेगरी के प्रभावितों के लिए भी ऑनलाइन स्टडी किसी टेढ़ी खीर से कम नहीं।

आर्थिक परेशानी : चूंकि कुछ वर्ग ऐसा भी है जो दैनिक मजदूरी के सहारे जीवन-यापन करने के बावजूद बच्चों की पढ़ाई में कोई कसर बाकी नहीं रखना चाहता। लेकिन लॉकडाउन के कारण रोजगार छिनने से कमाई प्रभावित हो गई है। ऐसे में जो रसोई में चूल्हा जलाने के संकट का सामना कर रहे हों उनके लिए मोबाइल रीचार्ज भी एक बड़ी परेशानी हो सकती है।

कोई छूट नहीं : फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रदेश सरकारों या फिर जिओ, बीएसएनएल अथवा अन्य कंपनियों की ओर से शैक्षणिक कल्याण के लिए किसी तरह की मुफ्त योजना की घोषणा न करना भी इस वर्ग से जुड़े अभिभावकों के लिए चिंता का विषय है। क्योंकि ऑनलाइन स्टडी के लिए अव्वल तो मोबाइल और फिर डाटा की जरूरत होती है, जिस बारे में कंपनियों ने किसी तरह की रियायत नहीं प्रदान की है।

अनैतिक शिक्षा की चिंता: लगता तो यही है कि; ऑनलाइन स्टडी की वकालत करने वालों ने उस तथ्य पर गौर नहीं किया कि आखिर क्यों स्टूडेंट्स को स्कूलों में मोबाइल रखना-चलाना मना है। दरअसल इसका जो कारण बताया जाता है उसके मुताबिक नीतिकारों को चिंता सताती है कि शिक्षा-सूचना का अथाह सागर कहे जाने वाली इंटरनेट की दुनिया छद्म और अनैतिक सूचनाओं से भी भरी पड़ी है। जरूरी सूचना ढूंढ़ने पर गैरजरूरी सूचनाओं, पोर्न, दिशा भ्रमित करने वाली जानकारियां सर्च एंजिन में दिखना कोई नई बात नहीं।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि अधिकांश अभिभावकों के मोबाइल फ्रैंडली न होने के कारण स्टूडेंट्स के हाथों में ऑनलाइन स्टडी के नाम पर मोबाइल सौंपना क्या खतरनाक नहीं हो सकता? क्योंकि अधिकांश पेरेंट्स न तो चाइल्ड लॉक फैसिलिटी ऑपरेट करने में पारंगत हैं और न ही उनके पास मोबाइल सेंटर जाकर इस सुविधा को लॉक कराने का विकल्प है, क्योंकि लॉकडाउन जो लागू है।

कहना गलत नहीं होगा स्कूल में प्रतिबंधित मोबाइल अब कोरोना से प्रभावित एकेडमिक सेशन के कारण एजुकेशनल बोर्ड्स की ऑनलाइन स्टडी की कवायद के चलते बच्चों के लिए जरूरी हो गया है। सवाल यह उठता है जिनके पास पीसी, आधुनिक मोबाइल न हों वे अभिभावक क्या करें? क्या कहना है आपका? कृपया अपने विचार हमारे साथ जरूर साझा करें ताकि स्टूडेंट्स के भविष्य साथ ही देश की बेहतरी में आपके कीमती विचार काम आ सकें।

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