श्राद्ध और पितृपक्ष
श्राद्ध और पितृपक्ष|Social Media
भारत

मृत लोगों के श्राद्ध और पितृपक्ष को मनाने का बढ़ता चलन

किसी की मृत्यु हो जाने के बाद उन्हें याद करके जो भी पूजा-पाठ किया जाता है वो, जिस समय में की जाती है उसे पितृपक्ष कहते हैं। यह गणेश पूजन के बाद और दुर्गा पूजा के पहले के 15 दिन होते हैं।

Arvind Tiwari

हाइलाइट्स :

  • श्राद्ध और पितृपक्ष के 15 दिन माने जाते हैं अशुभ

  • पित्र पक्ष में पूर्वजों के आने की मान्यता है

  • कौआ, कुत्ता और गाय खाना खिलाने की है प्रथा

  • पंडितों को किया जाता है आमंत्रित

  • समाज सुधारकों की इस प्रथा को बंद करने पर जागृति

राज एक्सप्रेस। रहली-गणेश उत्सव के बाद नवदुर्गा प्रारंभ होने से पहले बीच वाले समय में पंद्रह दिन के समय को पितृपक्ष के रूप में मनाया जाता है, इसे मान्यताओं के अनुसार, अशुभ समय माना जाता है इस दौरान कोई नया कार्य प्रारंभ नहीं किया जाता, खासतौर पर अचल संपत्ति खरीदने में निषेध बताया जाता है, मान्यता है कि पितृपक्ष में हमारे पूर्वज आते हैं और जिस तिथि में उनका स्वर्गवास हुआ होता है, उस तिथि पर कुछ विधि विधान के अनुसार खाना खिलाया जाता है कौआ, कुत्ता और गाय के साथ पंडितों को भी आमंत्रित किया जाता है।

Raj Express
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