लद्दाख बॉर्डर पर भारतीय सेना की तैयारियां मजबूत, T-90 व T-72 टैंक तैनात
लद्दाख बॉर्डर पर भारतीय सेना की तैयारियां मजबूत, T-90 व T-72 टैंक तैनात|Social Media
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लद्दाख बॉर्डर पर भारतीय सेना की तैयारियां मजबूत, T-90 व T-72 टैंक तैनात

लद्दाख बॉर्डर पर भारतीय सेना ने चूमर और देमचोक में T-90 और T-72 टैंक तैनात किए हैं। चीन की तरफ से सीमा पर दी जा रही चुनौती के लिए भारतीय सेना ने अपनी तैयारियों को और मजबूत कर दिया है।

Priyanka Sahu

Priyanka Sahu

लद्दाख: भारत-चीन दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत होने के बावजूद भी पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव के हालात कम नहीं हो रहे है। अब लद्दाख बॉर्डर पर चीन की तरफ से सीमा पर दी जा रही चुनौती के लिए भारतीय सेना ने अपनी तैयारियों को और मजबूत कर दिया है।

LAC पर भारतीय सेना के T-90 टैंक तैनात :

दरअसल, LAC के नजदीक पूर्वी लद्दाख के चूमर-देमचोक क्षेत्र में भारतीय सेना ने T-90 टैंक और बीएमपी-2 इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स तैनात किए हैं। लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल से सटे चूमर और देमचोक इलाकों में इन टैंकों की तैनाती से चीन की टेंशन बढ़ना तय है। इसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पूर्वी लद्दाख में फॉरवर्ड पोस्ट पर भारतीय सेना के टैंक और बख्तरबंद वाहन खड़े हुए नजर आ रहे हैं।

14 कॉर्प्स के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अरविंद कपूर ने कहा, "फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स भारतीय सेना (Indian Army) का एकमात्र फॉरमेशन है और दुनिया में भी ऐसे मुश्किल इलाकों में यंत्रीकृत बलों को तैनात किया गया है। टैंक, पैदल सेना के लड़ाकू वाहनों और भारी बंदूकों का इस इलाके में रख-रखाव करना एक चुनौती है।"

भारत का चीन को स्पष्ट संदेश :

जानकारी के मुताबिक, भारत द्वारा तैनात किए ये टैंक किसी भी मौसम और वक्त में युद्ध करने की क्षमताओं से लैस हैं और इस टैंक रेजिमेंट की तैनाती के साथ ही भारत ने चीन को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि, युद्ध की स्थिति में वह उसके कब्जे वाले इलाके में घुसने से भी परहेज नहीं करेगी।

बता दें, भारत ने लद्दाख में जिन T-90 टैंकों की तैनाती की हैं, वे मूल रूस से रूस में बने हैं। भारत टैंकों का तीसरा सबसे बड़ा ऑपरेटर हैं, उसके बेड़े में करीब साढ़े 4 हजार टैंक (T-90 और उसके वैरियंट्स, T-72 और अर्जुन) हैं। भारत में इन टैंकों को 'भीष्‍म' नाम दिया है, इनमें 125mm की गन लगी होती है। वहीं, 46 टन वजनी इस टैंक को लद्दाख जैसे इलाके में पहुंचा पाना आसान काम नहीं था, लेकिन भारत ने ये कर दिखाया।

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