भारत ने दक्षिण चीन सागर में तैनात किया युद्धपोत
भारत ने दक्षिण चीन सागर में तैनात किया युद्धपोत|Social Media
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भारत ने दक्षिण चीन सागर में तैनात किया युद्धपोत-चीनी नौसेना में बेचैनी

भारत-चीन में तनावपूर्व की स्थिति के बीच भारत ने दक्षिण चीन सागर में चुपचाप एक युद्धपोत तैनात किया है। युद्धपोत की तत्काल तैनाती से चीनी नौसेना में बेचैनी का माहौल है।

Priyanka Sahu

Priyanka Sahu

दिल्‍ली, भारत। भारत-चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में मई के माह से ही तनावपूर्व की स्थिति कायम है, हालांकि इसी दौरान दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है, लेकिन तनाव चरम पर ही नजर आ रहा हैै। अब हाल ही मेें ये बड़ी खबर सामने आ रही हैै कि, अब भारत ने चीन को घेरने की रणनीति बना ली है, ऐसा इसलिए क्‍योंकि भारत की तरफ से चीन के विरोध को दरकिनार करते हुए चुपचाप दक्षिण चीन सागर में अपना यु्द्धपोत तैनात कर दिया है।

भारतीय नौसेना का बड़ा कदम :

जी हां, लद्दाख के गलवान वैली में चीनी सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प के बाद भारतीय नौसेना ने बड़ा कदम उठाते हुए दक्षिण चीन सागर में युद्धपोत तैनात किया। चीनी इस क्षेत्र में भारतीय नौसेना के जहाजों की उपस्थिति पर आपत्ति जताता रहा है, जहां वह कृत्रिम द्वीपों और सैन्य उपस्थिति के माध्यम से 2009 से अपनी उपस्थिति में काफी विस्तार कर चुका है।

सरकार से जुड़े सूत्रों के हवाले से ये बताया कि, ''गालवान वैली में हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे, जिसके बाद भारत ने दक्षिण चीन सागर में एक युद्धपोत तैनात किया है। इस युद्धपोत को उस इलाके में तैनात किया गया है, जहां पीपल्स लिबरेशन आर्मी की नौसेना ने किसी भी अन्य फोर्स की मौजूदगी पर ऐतराज जताया था। चीनी नेवी का दावा था कि दक्षिणी चीनी सागर का अधिकांश हिस्सा उसके क्षेत्र में आता है।''

चीनी नौसेना में बेचैनी का माहौल :

सूत्रों ने आगे ये भी बताया कि, दक्षिण चीन सागर में भारतीय नौसेना के युद्धपोत की तत्काल तैनाती से चीनी नौसेना में बेचैनी का माहौल है। दक्षिण चीन सागर में भारतीय नौसेना के युद्धपोत की तत्काल तैनाती का चीनी नौसेना और सुरक्षा प्रतिष्ठान पर काफी प्रभाव पड़ा और उन्होंने भारतीय पक्ष के साथ राजनयिक स्तर की वार्ता के दौरान भारतीय युद्धपोत की उपस्थिति के बारे में भारतीय पक्ष से शिकायत की।

भारतीय युद्धपोत लगातार वहां मौजूद अमेरिका के युद्धपोतों से लगातार संपर्क बनाए हुए थे। रूटीन ड्रिल के हिस्से के रूप में, भारतीय युद्धपोत को लगातार अन्य देशों के सैन्य जहाजों की आवाजाही की स्थिति के बारे में अपडेट किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि किसी भी सार्वजनिक चकाचौंध से बचने के लिए पूरे मिशन को बहुत ही गोपनीय तरीके से किया गया।

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