भारत का पहला सूर्य मिशन आदित्य-एल1 इस वर्ष जून-जुलाई में
भारत का पहला सूर्य मिशन आदित्य-एल1 इस वर्ष जून-जुलाई मेंसांकेतिक चित्र

भारत का पहला सूर्य मिशन आदित्य-एल1 इस वर्ष जून-जुलाई में

भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए), बेंगलुरु ने आदित्य-एल1 मिशन के लिए दृश्य रेखा उत्सर्जन कोरोनाग्राफ (वीईएलसी) पेलोड इसरो को सौंप दिया है।

चेन्नई, तमिलनाडु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) जून-जुलाई में अपने पहले सूर्य मिशन की योजना बना रहा है, जो अगस्त में समाप्त होगा। भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए), बेंगलुरु ने आदित्य-एल1 मिशन के लिए दृश्य रेखा उत्सर्जन कोरोनाग्राफ (वीईएलसी) पेलोड इसरो को सौंप दिया है।

बेंगलुरु के समीप होसाकोट स्थित विज्ञान प्रौद्योगिकी में अनुसंधान और शिक्षा केंद्र (क्रेस्ट) परिसर में कल आयोजित एक समारोह में इसे सौंपा गया। वीईएलसी पेलोड को क्रेस्ट परिसर में डिजाइन और तैयार किया गया है।

आईआईए के निदेशक ने यह पेलोड, यू आर राव उपग्रह केंद्र (यूएसआरसी) के निदेशक को इसरो के अध्यक्ष/अंतरिक्ष विभाग के सचिव एस सोमनाथ और आदित्य-एल-1 मिशन की निदेशक सुश्री निगारशाजी, वीईएलसी पेलोड के प्रधान अन्वेषक डॉ. बी राघवेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में सौंपा गया। पेलोड को यूआरएससी में उपग्रह में एकीकृत किया जाएगा।

वीईएलसी एक तंत्र है जो डिस्क से प्रकाश को अलग करने और त्यागने के लिए सौर डिस्क को अदृश्य करता है। आगे की प्रक्रिया में कोरोना से निकली रोशनी को कोरोनाग्राफ द्वारा कैप्चर किया जाता है। वीईएलसी का उद्देश्य डेटा एकत्रित करना है कि किस प्रकार से कोरोना का तापमान लगभग 10 लाख डिग्री तक पहुंच सकता है, जबकि सूर्य की सतह का तापमान 6,000 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा रहता है।

इसरो ने शुक्रवार को कहा कि वीईएलसी का वजन 90 किलोग्राम है और इसका आयाम 1.7 एमएक्स 1.1 एमएक्स 0.7 मीटर है।

अंतरिक्ष यान को सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के पहले लैग्रैन्ज बिंदु, एल1 के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा में रखा जाएगा। एल1 बिंदु के चारों ओर एक उपग्रह द्वारा सूर्य को बिना किसी ग्रहण के लगातार देखा जा सकता है। यह स्थिति लगातार सौर गतिविधियों को देखने का अधिक लाभ प्रदान करती है।

आदित्य-एल1 में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और पार्टिकल डिटेक्टरों का उपयोग करके फोटोस्फीयर, क्रोमोस्फीयर और सूर्य के कोरोना की सबसे बाहरी परतों का निरीक्षण करने के लिए सात पेलोड है। चार पेलोड सूर्य को देखने और शेष तीन पेलोड कणों और क्षेत्रों के इन-सीटू अध्ययन करने के लिए है।

इसरो इस वर्ष जून या जुलाई में आदित्य-एल1 मिशन की शुरुआत करने की योजना बना रहा है। आदित्य-एल1 सूर्य और सोलर कोरोना का निरीक्षण करने वाला पहला भारतीय अंतरिक्ष मिशन है।

इसरो अध्यक्ष एस सोमनाथ ने वीईएलसी पेलोड सौंपे जाने वाले समारोह में कहा कि आदित्य-एल1 मिशन जून या जुलाई तक शुरू किया जाएगा, क्योंकि मिशन के लिए प्रक्षेपण खिड़की अगस्त तक बंद हो जाएगी।

ईएलसी पेलोड को सौंपने के बाद, इसरो अब वीईएलसी का आगे परीक्षण करेगा और आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान के साथ इसको एकीकृत करेगा।

श्री सोमनाथ ने कहा कि पेलोड को बेंगलुरु में यू.आर.राव उपग्रह केंद्र ले जाया जाएगा, जहां इसे आदित्य-एल1 उपग्रह के साथ एकीकृत किया जाएगा, जो बहुत सारे परीक्षणों, मूल्यांकनों से गुजरेगा और अंत में इसे पीएसएलवी का उपयोग करके लॉन्च किया जाएगा।

वीईएलसी पेलोड के प्रधान अन्वेषक राघवेंद्र प्रसाद ने कहा कि पेलोड लगातार कोरोना का निरीक्षण करने में सक्षम होगा और इसके आंकड़ों से सौर खगोल विज्ञान के क्षेत्र में कई समस्याओं का जवाब मिलने की उम्मीद है।

श्री प्रसाद ने कहा, ''अंतरिक्ष में किसी अन्य सौर कोरोनाग्राफ में सौर कोरोना को इतने नजदीक से चित्रित करने की क्षमता नहीं है जितनी वीईएलसी में है। यह सोलर रेडियस के 1.05 गुना तक चित्रित कर सकता है। यह एक ही समय में इमेजिंग, स्पेक्ट्रोस्कोपी और पोलारिमेट्री भी कर सकता है और बहुत उच्च रिजाल्यूशन और एक सेकंड में कई बार अवलोकन कर सकता है।"

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