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'जिस गाँव में किसी व्यक्ति को चमार कहा जाता है वो गाँव आजाद नहीं'
'जिस गाँव में किसी व्यक्ति को चमार कहा जाता है वो गाँव आजाद नहीं'|Syed Dabeer Hussain - RE
भारत

'जिस गाँव में किसी व्यक्ति को चमार कहा जाता है वो गाँव आजाद नहीं'

देश आज प्रथम प्रधानमंत्री का 130वां जन्मदिन मना रहा। 11 बार नॉबल पीस प्राईज़ के लिए नामित हो चुके थे देश के प्रथम प्रधानमंत्री।

रवीना शशि मिंज

राज एक्सप्रेस। आज देश अपने प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का 130वां जन्मदिन मना रहा है। पंडित नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 में हुआ था। नेहरू के जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। चूंकि पंडित नेहरू को बच्चों से बेहद लगाव था और बच्चे भी उन्हें चाचा नेहरू कहकर पुकारते थे इसलिए इस दिन को बाल दिवस का स्वरूप दिया गया।

वैसे तो 1964 से पहले भारत में 20 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता है। 1964 में प्रथम प्रधामंत्री की मौत हुई थी। जिसके बाद 14 नवंबर के दिन देश के प्रति उनके योगदान, उनके सहयोग और बच्चों के प्रति प्रेम को देखकर समर्पित किया गया।

प्रथम प्रधानमंत्री के जन्मदिन के उपलक्ष्य में जानते हैं पंडित नेहरू के जीवन के बारे में और वर्तमान में पंडित नेहरू को किस नज़रिए से देखा जा रहा है।

नौ बार जेल जा चुके हैं नेहरू

स्वतंत्रता संग्राम में पं. नेहरू ने देशवासियों का बराबरी से साथ दिया। स्वतंत्रता अंदोलन के दौरान वे 9 बार जेल जा चुके थे। सबसे कम 12 दिन और सबसे ज्यादा 1,041 दिनों तक जल में सज़ा काट चुके हैं।

नेहरू के लिए आजादी के मायने

पंडित नेहरू कहते थे कि 36 करोड़ की जो आबादी है, जो आखिरी आदमी है, जो आखिरी गाँव है जबतक हर आदमी के जीवन जीने में कोई भी रूकावट है तब तक देश आजाद नहीं है।

पंडित नेहरू जातिवाद के भी सख्त खिलाफ थे। Nehru Myths and Reality (लेखक पीयूष बबेले) नामक एक किताब में जिक्र किया है कि पंडित नेहरू ने लाल किले से भाषण देते हुए कहा था जिस गाँव में किसी व्यक्ति को चमार कहा जाता है वो गाँव आजाद नहीं है।

अनुच्छेद 370 जोड़ने वाले नेहरू नहीं थे

कश्मीर से अभी कुछ महीने पहले ही धारा 370(कश्मीर के नागरिकों को विशेष दर्जा) हटाई गई है। आपने ये गौर किया होगा ही कि जब- जब धारा 370 का मुद्दा उठा है तब- तब पंडित जवाहर लाल नेहरू को इसका जिम्मेवार ठहराया गया है लेकिन हकीकत कुछ और है। संविधान में धारा 370 जोड़ने वाले नेहरू नहीं बल्कि उस समय के तत्कालिक गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल थे।

धारा 370 का पूरा विवरण उनके निजी सचिव और पटेल के पत्रों के संकलन में है। उसके संपादक के अनुसार उस समय कांग्रेस पार्टी कश्मीर को विशेष दर्जा देने के सख्त खिलाफ थी। पंडित नेहरू जब अमेरिका में थे सरदार पटेल ने पार्टी को कश्मीर की स्थिति समझायी और संविधान में धारा 370 को शामिल कराया।

वाट्सअप यूनिवर्सटी में पंडित नेहरू के खिलाफ फैलाई जा रही अफवाहें

भारत में वाट्सअप ऐप होने के इतर एक यूनिवर्सिटी भी है। ऐसी यूनिवर्सिटी जहाँ पं. नेहरू के खिलाफ हर दिन अफवाहें फैलाई जा रही हैं। उनके पिता मोतिलाल नेहरू का नाम मोइनउद्दीन बताया जा रहा है या फिर उनकी बेटी इंदिरा गांधी के पति का नाम फिरोज़ गाँधी नहीं फिरोज़ खान बताकर इस यूनिवर्सिटी में अफवाहें फैला रहे हैं।

यहाँ तो ये भी बताया जा रहा है कि पं. नेहरू की मौत एड्स से हुई है, पर क्या वाकई?

दु:ख की बात तो ये है कि, लोग तथ्यों को जाँचे बिना उनपर विश्वास कर रहे हैं और उन्हें आगे अपने दोस्तों, रिश्तेदारों में फैला रहे हैं।

क्या किया पंडित नेहरू ने देश के लिए

आजकल एक सवाल काफी प्रचलन में है - पंडित नेहरू ने देश के लिए किया क्या? या फिर बिना तथ्यों के जाने सटीकता से कह देते हैं कि पंड़ित नेहरू ने देश के लिए कुछ नहीं किया है। जब आप चीज़ें खंगालेंगे कि उन्होंने किया क्या है तब आप लोगों की यह गलत अवधारणा खत्म हो जाएगी। आधुनिक भारत की नींव रखने वाले प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू ही हैं। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया, भारत हैवी इल्कट्रिकल लिमिटेड (BHEL), आईआईटी खड़गपुर, आईआईएम (अहमदाबाद, कोलकाता), भारत ऐटॉमिक रिसर्च सेंटर, डिफेंस रिसर्च डेवलप्मेंट ऑर्गेनाइजेशन के संस्थापक रह चुके हैं।

जेल में 'द डिस्कवरी ऑफ इंडिया' किताब को दिया आकार

पंडित नेहरू एक अच्छे लेखक भी थे, जिसका उदाहरण उनकी लिखी कई किताबों में मिलता है। 1944 में अहमदनगर की जेल में कारावास के दौरान उन्होंने 'द डिस्कवरी ऑफ इंडिया' नामक किताब लिखी। इसके अलावा 'भारत एक खोज', 'ग्लिम्प्स ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री' और 'टुवर्डस् फ्रीडम' लिखा है। वे 11 बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित हो चुके हैं।

देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा कई मंत्रियों और नेताओं ने प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू को आज श्रृद्धांजलि दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीटर पर देश के प्रथम प्रधानमंत्री को श्रृद्धांजिल दी।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी प्रथम प्रधानमंत्री को श्रृद्धांजलि अर्पित की।

प्रियंका गाँधी वाड्रा ने अपने दादा जी के जिंदगी से जुड़ा एक किस्सा शेयर करते हुए उन्हें याद किया।

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