सी.वी. रमन जयंती
सी.वी. रमन जयंतीSyed Dabeer Hussain - RE

भारत के सबसे प्रभावशाली वैज्ञानिक रहे सी.वी. रमन, उनकी खोज ने दिखाया दुनिया को रास्ता

भारत के महान वैज्ञानिक सी.वी. रमन का नाम दुनिया के सबसे बेहतरीन वैज्ञानिकों में शामिल है। उनके द्वारा की गई खोज आज भी दुनियाभर के काम आती हैं।

राज एक्सप्रेस। जब कभी दुनिया के सबसे बेहतरीन वैज्ञानिकों में बारे में बात की जाती है तो उनमें भारत के महान वैज्ञानिक सी.वी. रमन का नाम अपने आप ही शामिल हो जाता है। वे 20वीं सदी के सबसे सफलतम और प्रभावशाली वैज्ञानिकों में से एक रहे है। उनकी खोज ने ही दुनिया को बताया था कि समुद्र का पानी नीला क्यों होता है? विज्ञान की दिशा में अपने योगदान के लिए सी.वी. रमन को नोबल पुरस्कार से भी नवाजा गया था। आज महान वैज्ञानिक सी.वी. रमन की जन्म जयंती है। इस खास मौके पर चलिए जानते हैं उनके बारे में खास बातें।

हमेशा से रहे थे पढ़ाई में आगे :

सी.वी. रमन का जन्म 7 नवम्बर 1888 को तिरुचिरापल्ली में हुआ था। वे मद्रास के एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे। उनके पिता का नाम चंद्रशेखर रामनाथन अय्यर और मां का नाम पार्वती अम्मल था। सी.वी. रमन बचपन से ही पढ़ाई में अच्छे रहे थे। उन्होंने 10वीं की पढ़ाई के दौरान अपनी कक्षा में टॉप किया था। जिसके बाद साल 1903 में उन्होंने प्रेसिडेंसी कॉलेज, मद्रास में दाखिला लिया। साल 1904 के दौरान रमन को फिजिक्स और इंग्लिश के लिए मेडल से सम्मानित भी किया गया था।

बचपन से ही रही विज्ञान में रूचि :

शुरुआत से ही विज्ञान में रूचि रखने वाले सी.वी. रमन अक्सर खेल-खेल में विज्ञान के प्रयोग करते रहते थे। दरअसल वे जब अपने भाई-बहनों के साथ हॉस्टल से घर की तरफ आते थे तो रास्ते में चीजों के साथ विज्ञान के छोटे-मोटे प्रयोग करने लग जाते थे।

सी.वी. रमन की खोज :

सी.वी. रमन ने मशहूर रमन प्रभाव या रमन इफेक्ट की खोज की थी। उनकी इस खोज के चलते ही यह रहस्य भी दुनिया के सामने आया था कि समुद्र के पानी का रंग नीला क्यों होता है। इसके साथ ही उन्होंने इस बात का भी पता लगाया था कि जब भी कोई रोशनी किसी पारदर्शी माध्यम से गुजरती है तो उसमें कई बदलाव अपने आप आ जाते हैं। इस प्रभाव की खोज 28 फरवरी 1928 को हुई थी। जिसके बाद से हर साल 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्हें अपने योगदान के लिए साल 1930 में फिजिक्स के क्षेत्र में प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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