भारत ने हासिल की हाइपरसोनिक टेक्‍नोलॉजी- दुश्मनों पर भारी पड़ेंगी मिसाइलें
भारत ने हासिल की हाइपरसोनिक टेक्‍नोलॉजी- दुश्मनों पर भारी पड़ेंगी मिसाइलें|Priyanka Sahu -RE
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भारत ने हासिल की हाइपरसोनिक टेक्‍नोलॉजी- दुश्मनों पर भारी पड़ेंगी मिसाइलें

भारत हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाकर खुद की हाइपरसोनिक टेक्‍नोलॉजी विकसित कर दुनिया का चौथा देश बना एवं DRDO ने HSTDV का सफलतापूर्वक परीक्षण कर बड़ी कामयाबी हासिल की।

Priyanka Sahu

Priyanka Sahu

दिल्‍ली, भारत। देश में एक तरफ कोरोना का महासंकट काल मंडरा हुआ है, तो वहीं पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव जैसा महौल बना है और इन सबके बीच भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है।

भारत ने हासिल की हाइपरसोनिक टेक्‍नोलॉजी :

दरअसल, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने आज ओडिशा के बालासोर में स्वदेशी रूप से विकसित स्क्रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम का प्रयोग करते हुए हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल (HSTDV) का सफलतापूर्वक परीक्षण कर बड़ी कामयाबी हासिल की है और अमेरिका, रूस, चीन के बाद खुद की हाइपरसोनिक टेक्‍नोलॉजी विकसित करने वाला दुनिया का चौथा देश भारत बना है।

देश की मिसाइलें दुश्मनों पर भारी :

बताया गया है कि, डीआरडीओ ने इस तकनीक का 11 बजे बालासोर (ओडिशा) स्थित अब्दुल कलाम टेस्टिंग रेंज (व्हीलर द्वीप) से परीक्षण किया। यह स्वदेशी तकनीक ध्वनि की गति से छह गुना चलने वाली मिसाइलों के विकास करने में मदद करेगी और दुश्‍मन देश के एयर डिफेंस सिस्‍टम को इसकी भनक तक नहीं लगेगी। अब हमारी मिसाइलें दुश्मनों पर भारी पड़ेंगी।

देश के लिए तकनीक के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी है। इस टेस्टिंग से और अधिक महत्वपूर्ण टेक्‍नोलॉजी, मैटीरियल्‍स और हाइपरसोनिक वीइकल्‍स के डेवलपमेंट का रास्‍ता खुलेगा। इसने (टेस्‍ट) भारत को उन चुनिंदा देशों के क्‍लब में ला दिया है जो ऐसी टेक्‍नोलॉजी का प्रदर्शन कर चुके हैं।

जी सतीश रेड्डी, DRDO चेयरमैन

रक्षा मंत्री ने DRDO को दी बधाई :

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने परीक्षण के तुरंत बाद DRDO को बधाई दी और स्वदेशी रूप से एक स्क्रैमजेट इंजन बनाने के उनके प्रयासों की प्रशंसा की। इस सफलता के बाद अब अगले चरण की प्रगति शुरू हो गई है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा- आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

इसके अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अगले ट्वीट में लिखा- डीआरडीओ ने आज स्वदेशी रूप से विकसित स्क्रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम का उपयोग कर हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। इस सफलता के साथ, सभी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां अब अगले चरण की प्रगति के लिए स्थापित हो गई हैं।

HSTDV की खासियत :

  • DRDO अगले 5 साल में स्‍क्रैमजेट इंजन के साथ हाइपरसोनिक मिसाइल तैयार कर सकता है।

  • इसकी रफ्तार दो किलोमीटर प्रति सेकेंड से ज्‍यादा होगी और सबसे बड़ी बात यह है कि इससे अंतरिक्ष में सैटलाइट्स भी कम लागत पर लॉन्‍च किए जा सकते हैं।

  • HSTDV के सफल परीक्षण से भारत को अगली जेनरेशन की हाइपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस-II तैयार करने में मदद मिलेगी।

  • फिलहाल उसे DRDO और रूस की एजेंसी मिलकर डेवलप कर रहे हैं।

  • यह स्‍क्रैमजेट एयरक्राफ्ट अपने साथ लॉन्‍ग रेंज और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें ले जा सकता है।

  • आवाज से 6 गुना ज्‍यादा तेज रफ्तार का मतलब ये कि दुनिया के किसी भी कोने में दुश्मन के ठिकाने को घंटे भर के भीतर निशाना बनाया जा सकता है।

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