भारतीय सेना द्वारा आर्मी लॉजिस्टिक कॉन्फ्रेंस का आयोजन, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिया हिस्सा

दिल्ली में आज भारतीय सेना द्वारा आर्मी लॉजिस्टिक कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया है। जिसमें सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने हिस्सा लिया।
आर्मी लॉजिस्टिक कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए राजनाथ सिंह
आर्मी लॉजिस्टिक कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए राजनाथ सिंहSocial Media

दिल्ली, भारत। दिल्ली में आज भारतीय सेना द्वारा आर्मी लॉजिस्टिक कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने हिस्सा लिया। इस दौरान सेना को आधुनिक बनाने से लेकर युद्ध के प्रभाव पर चर्चा की गई। इस दौरान सेना प्रमुख और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपना संबोधन भी दिया।

सेना प्रमुख ने किया संबोधित:

आर्मी लॉजिस्टिक कॉन्फ्रेंस में संबोधित करते हुए सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने कहा कि, "युद्ध केवल सेनाओं के बीच नहीं होते हैं, वे पूरे देश का प्रयास बने रहते हैं। युद्ध राष्ट्रीय लचीलापन का परीक्षण करते हैं और देश के संसाधनों और क्षमताओं को बढ़ाते हैं। रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष इसका एक उपयुक्त उदाहरण है।"

सेना प्रमुख ने कहा कि, "युद्ध में अगर कोई देश पिछड़ता है, तो उसके पीछ रसद आपूर्ति की कमी भी एक बड़ी वजह होती है। सैन्य अभियानों की गति, तीव्रता और पहुंच बनाने के लिए पर्याप्त रसद आपूर्ति बहुत जरूरी है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए रसद आपूर्ति की निगरानी बहुत जरूरी है।"

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया संबोधित:

भारतीय सेना रसद संगोष्ठी में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आर्मी लॉजिस्टिक कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि, "इस पिछले कुछ दशकों में दुनिया इस तरह जुड़ी है जैसा पहले कभी नही था। इसमें भी रसद और आपूर्ति श्रृंखला की बड़ी भूमिका है। हम दुनिया के एक हिस्से में बैठकर दूसरे हिस्से की जानकारी प्राप्त करने के साथ कोई सामान भी मंगवा सकते हैं।"

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि, "किसी देश की अर्थव्यवस्था को और ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक मजबूत, सुरक्षित और त्वरित रसद आपूर्ति प्रणाली एक महत्त्वपूर्ण आवश्यकता होती है। आज हमारा देश दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।"

राजनाथ सिंह ने आर्मी लॉजिस्टिक कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आगे कहा कि, "भारत 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में देश में रसद को एकीकृत करने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने अनेक महत्वपूर्ण नीतियां तैयार की हैं।"

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