अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस
अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवसSyed Dabeer Hussain - RE

महिला हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस आज, जानिए महिला हिंसा से जुड़े हैरान करने वाले आंकड़े

इस दिवस का उद्देश्य ऐसे समाज का निर्माण करना है, जहां महिलाओं के खिलाफ हिंसा ना हो और महिलाएं खुलकर अपना जीवन जी सकें।

राज एक्सप्रेस। महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा आज भी एक वैश्विक समस्या है। एक रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया में हर तीन महिलाओं में से एक महिला किसी ना किसी रूप से हिंसा का शिकार हुई है। ऐसे में महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा को रोकने और लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 25 नवंबर को International Day for the Elimination of Violence Against Women यानी ‘महिलाओं के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ मनाया जाता है। इस दिन महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा को रोकने और लोगों को महिलाओं के बुनियादी मानव अधिकार के बारे में जागरूक करने के प्रयास किए जाते हैं।

इतिहास :

यह दिवस मनाने की शुरुआत साल 1981 में हुई थी, जब लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई नारीवादी एनकेंट्रोस के कार्यकर्ताओं ने महिला हिंसा का मुकाबला करने और लोगों को इस बारे में जागरूक करने के लिए 25 नवंबर का दिन चुना था। आगे चलकर संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन पर ‘महिलाओं के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ मनाने का फैसला किया था।

उद्देश्य और थीम :

दरअसल संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि, महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा से उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। भेदभाव, अशिक्षा, गरीबी, एचआईवी और अशांति जैसी चीजें महिला हिंसा का प्रमुख कारण है। ऐसे में इस दिवस का उद्देश्य ऐसे समाज का निर्माण करना है, जहां महिलाओं के खिलाफ हिंसा ना हो और महिलाएं खुलकर अपना जीवन जी सकें। यह दिवस मानने के लिए हर साल एक थीम भी जारी की जाती है। इस साल की थीम है, ‘Activism to End Violence against Women & Girls’।

भारत में महिलाओं की स्थिति :

साल 2019-20 में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में रहने वाली हर तीन में से एक शादीशुदा महिला ने पति के द्वारा शारीरिक और यौन हिंसा का सामना किया है। पति के द्वारा की जाने वाली हिंसा में कर्नाटक पूरे देश में सबसे आगे है। इस रिपोर्ट के अनुसार शहरी इलाकों में जहां 24 फीसदी महिलाओं ने वैवाहिक हिंसा का सामना किया है जबकि ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 32 फीसदी पर पहुंच जाता है। वहीं 70 फीसदी महिलाओं का कहना है कि उन्होंने पति के शराब पीने के बाद हिंसा झेली है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं में से 77 फीसदी महिलाओं ने इस बारे में कभी किसी से शिकायत नहीं की।

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