देश के 50वें CJI बने जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़
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देश के 50वें CJI बने जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ

CJI DY Chandrachud: सुप्रीम कोर्ट के जज DY चंद्रचूड़ ने आज भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में चंद्रचूड़ को CJI के रूप में पद की शपथ दिलाई।

CJI DY Chandrachud: सुप्रीम कोर्ट के जज DY चंद्रचूड़ ने आज भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली है। देश राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह 10:00 बजे राष्ट्रपति भवन में न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ को भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद की शपथ दिलाई। DY चंद्रचूड़ ने न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की जगह ली है, जिनका कार्यकाल आठ नवंबर को पूरा हो गया है।

दो साल तक संभालेंगे ये पदभार:

बता दें कि, जस्टिस चंद्रचूड़ 50वें CJI बनने के बाद आज ही पदभार ग्रहण करेंगे।चंद्रचूड़ 10 नवंबर 2024 तक दो साल के लिए इस पद पर रहेंगे। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश 65 साल की उम्र में अवकाशग्रहण करते हैं। 11 अक्टूबर को न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित उन्हें अपना उत्तराधिकारी बनाए, जाने की सिफारिश की थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें 17 अक्टूबर को अगला सीजेआई नियुक्त किया था।

बता दें, बीते दिन 8 नवंबर को यूयू ललित का कार्यकाल पूरा हो गया है। सीनियर पॉजिशन के आधार पर यह पहले से यह माना जा रहा था कि, डीवाई चंद्रचूड़ ही अगले सीजेआई होंगे।

जस्टिस चंद्रचूड़ का जन्म:

जस्टिस चंद्रचूड़ के पिता जस्टिस वाई वी चंद्रचूड़ 2 फरवरी 1978 से 11 जुलाई 1985 तक भारत के 16वें मुख्य न्यायाधीश थे। 11 नवंबर 1959 को जन्में जस्टिस चंद्रचूड़ को 13 मई 2016 को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था। वह 31 अक्टूबर, 2013 से सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति तक इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने जस्टिस यूयू ललित का स्थान लिया है। जस्टिस ललित ने 11 अक्टूबर को कन्वेंशन के मुताबिक, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के नाम की सिफारिश केंद्र के उत्तराधिकारी के तौर पर की थी। राष्ट्रपति मुर्मू ने उन्हें 17 अक्टूबर को अगला सीजेआई नियुक्त किया था। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ 11 नवंबर 1959 को पैदा हुए और 13 मई 2016 को शीर्ष न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किये गये थे। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ कई संविधान पीठ और ऐतिहासिक फैसले देने वाली उच्चतम न्यायालय की पीठों का हिस्सा रहे हैं।

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