दिल्ली की नई आबकारी नीति के चलते मुसीबत में फंसे सिसोदिया
दिल्ली की नई आबकारी नीति के चलते मुसीबत में फंसे सिसोदियाSyed Dabeer Hussain - RE

जानिए दिल्ली की नई आबकारी नीति के बारे में, जिसके चलते मुसीबत में फंसे सिसोदिया

जहां एक तरफ इस मामले को लेकर विपक्ष मनीष सिसोदिया पर हमलावर है तो वहीं दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी ने किसी भी प्रकार के घोटाले से इंकार किया है।

राज एक्सप्रेस। दिल्ली के आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया इन दिनों दिल्ली की आबकारी नीति में कथित शराब घोटाले को लेकर मुसीबतों का सामना कर रहे हैं। इस मामले में सीबीआई ने मनीष सिसोदिया सहित 15 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है। इसके अलावा इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी सिसोदिया के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर लिया है। जहां एक तरफ इस मामले को लेकर विपक्ष मनीष सिसोदिया और केजरीवाल सरकार पर हमलावर हैं तो वहीं दूसरी तरप आम आदमी पार्टी ने किसी भी प्रकार के घोटाले से इंकार किया है।

आबकारी नीति 2021-22 क्या है?

दिल्ली की नई आबकारी नीति को साल 2021 में लागू किया गया था, जबकि विरोध के बाद जुलाई 2022 में इसे वापस ले लिया गया है। इस नीति के अनुसार दिल्ली को 32 जोन में बांटा गया और यहां 849 दुकानों को रिटेल लाइसेंस जारी किए गए। साथ ही कई जगह 24 घंटे जबकि बार, क्‍लब्‍स और रेस्‍टोरेंट्स को रात 3 बजे तक खोलने की अनुमति दी गई थी। इसके अलावा रेस्टोरेंट व होटल को छत पर भी शराब परोसने की अनुमति दी गई। नई नीति के तहत शराब की होम डिलीवरी होने लगी। नई नीति के अनुसार सरकार किसी भी शराब की दुकान की मालिक नहीं होगी, जबकि पहले 60 फीसदी दुकानें सरकारी हुआ करती थी।

क्यों हो रहा विरोध?

  1. इस नीति के तहत शराब पीने की उम्र 25 साल से घटाकर 21 साल कर दी गई है।

  2. बाजार में केवल 16 खिलाड़ियों को इजाजत दी जा सकती है, इससे एकाधिकार को बढ़ावा मिलेगा।

  3. विपक्ष का कहना है कि बड़े दुकानदारों के भारी डिस्काउंट के चलते छोटे व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है।

  4. इस नीति के जरिए 849 दुकानों को रिटेल लाइसेंस जारी किया गया, इससे हर जोन में औसतन 26 से 27 शराब की दुकानें खुल जाएगी।

कहां हुआ घोटाला?

दिल्ली सरकार पर आरोप है कि उसने नई नीति के जरिए शराब ठेकेदारों को पक्षपातपूर्ण तरीके से फायदा पहुंचाया और उनकी 144.36 करोड़ की लाइसेंस फीस माफ कर दी। इससे दिल्ली सरकार के राजस्व को भारी नुकसान हुआ है।

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