जानिए कैसे होता है राज्यसभा चुनाव? कौन बन सकता है राज्यसभा सदस्य?
राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया की पूरी जानकारीPriyank Vyas

जानिए कैसे होता है राज्यसभा चुनाव? कौन बन सकता है राज्यसभा सदस्य?

क्या आप जानते हैं कि राज्यसभा चुनाव कैसे होते हैं? या राज्यसभा चुनाव में वोट कौन दे सकता है? चलिए हम आपको इस बारे में जानकारी दे देते हैं।

राज एक्सप्रेस। भारत में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीति बेहद गर्माती नजर आ रही है। देखने को मिल रहा है कि देश में 57 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं। हालांकि इनमें से 41 सीटों के लिए उम्मीदवारों का निर्विरोध चयन हो चुका है तो वहीं 4 राज्यों महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा और राजस्थान की 16 सीटों के परिणाम आना शुरू हो गए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राज्यसभा चुनाव कैसे होते हैं? या राज्यसभा चुनाव में वोट कौन दे सकता है? चलिए हम आपको इस बारे में जानकारी दे देते हैं।

कैसे होता है राज्यसभा चुनाव ?

इस तरह के चुनावों का सीधा संबंध राज्यों के साथ होता है। इस चुनाव के दौरान किसी भी राज्य में राज्यसभा सदस्यों की जितनी भी सीटें खाली होती हैं। उनमें 1 को जोड़ा जाता है, इसके बाद इस संख्या में कुल विधानसभा सीटों की संख्या से भाग देते हैं। इतना करने के बाद जो परिणाम मिलता है उसमें 1 जोड़ते हैं। अंत में जो परिणाम मिलता है उतने वोट किसी उम्मीदवार को जीत के लिए चाहिए होते हैं।

इस चुनाव में कौन दे सकते हैं वोट?

लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में आम आदमी भी वोट कर सकता है, लेकिन जब राज्यसभा चुनाव की बारी आती है तो यहां जनता के द्वारा चुने गए जन प्रतिनिधि यानि विधायक वोट डालते हैं। इसलिए ही राज्यसभा चुनाव को लेकर यह कहा जाता है कि जिस पार्टी के पास अधिक विधायक होते हैं उस पार्टी के राज्यसभा सदस्य बनने की संभावना अधिक है।

राज्यसभा सदस्य कौन बन सकता है?

भारत देश का कोई भी नागरिक राज्यसभा सदस्य बन सकता है,लेकिन इसके लिए कुछ नियम और शर्तें हैं। जैसे उम्मीदवार की उम्र 30 साल या इससे अधिक होना चाहिए। उसे अपने नामांकन पत्र में सदन के कम से कम 10 सदस्यों द्वारा या कुल संख्या के 10 प्रतिशत सदस्यों द्वारा प्रस्तावित होना चाहिए।

राज्यसभा को उच्च सदन और स्थायी सदन क्यों कहते हैं?

राज्यसभा का कार्यकाल 6 साल का होता है। लेकिन इसके एक तिहाई सदस्य हर दूसरे वर्ष के बाद सेवानिवृत्त हो जाते हैं। जिसके बाद हर 2 पर सेवानिवृत्त प्रतिनिधियों का चयन किया जाता है। यह प्रक्रिया इसी तरह से चलती रहती है, इसलिए यह उच्च सदन कहलाता है, जबकि राजसभा को कभी भी पूर्ण रूप से भंग नहीं किया जा सकता इसलिए इसे स्थायी सदन कहा जाता है।

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