सादगी के संग जीवन जीने वाले लाल बहादुर शास्‍त्री की 57वीं बरसी, नेताओं ने किया नमन

देश के किसानों और जवानों का मनोबल बढ़ाने वाले भारतीय राजनेता लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर जानें उनकी अमीट छाप के बारे में कुछ अहम जानकारियां...
सादगी के संग जीवन जीने वाले लाल बहादुर शास्‍त्री की 57वीं बरसी
सादगी के संग जीवन जीने वाले लाल बहादुर शास्‍त्री की 57वीं बरसी Social Media

राज एक्‍सप्रेस। भारत में ऐसे कई महापुरुष है, जिन्‍होंने देश को आजाद करवाने में अपना बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन महापुरूषों में एक नाम 'लाल बहादुर शास्त्री' का भी आता है। सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा पूरे देश को प्रेरित करती है, इसी तरह सादगी के संग जीवन जीने वाले लाल बहादुर शास्‍त्री ने भारत की राजनीति अपनी अमीट छाप छोड़ी है। आज उनकी 57वीं बरसी यानी पुण्यतिथि है। आज वहीं दिन (11 जनवरी) है, जब साल 1964 में इस देश में 'जय जवान-जय किसान' के ओजस्वी नारे से देश के किसानों और जवानों का मनोबल बढ़ाने वाले भारतीय राजनेता लाल बहादुर शास्त्री ने दुनिया को अलविदा कह दिया था।

कौन थे लाल बहादुर शास्त्री

आज की पीढ़ी के लिए यह जानना बहुत जरूरी होगा कि, लाल बहादुर शास्त्री कौन थे और उन्होंने हमारे देश के लिए क्या किया। तो बताते चलें कि, उत्तर प्रदेश के मुगलसराय जिले में 2 अक्टूबर 1904 को जन्‍में लाल बहादुर शास्त्री एक भारतीय राजनेता व स्‍वत्रंता सेनानी थे, जिन्हें शास्त्री जी के नाम से भी जाना जाता था। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु के बाद लाल बहादुर शास्त्री जी ही है, जिन्‍होंने देश के दूसरे PM के रूप में बागडोर संभाली थी।

कुछ इस तरह है शास्त्री जी की कहानी :

पता हो कि, लाल बहादुर शास्‍त्री वे नेता थे, जिन्‍हें सरनेम को लेकर इतनी चिड़ रही कि, उन्‍होंने अपनी 12 साल की उम्र में ही अपने नाम के आगे से अपना सरनेम हटा दिया, उनका सरनेम श्रीवास्तव था। उनके द्वारा सरनेम हटाने के पीछे का कारण यह है कि, वे पूरी तरह से जाति के खिलाफ थे और जाति व्यवस्था में उनकी कोई आस्था नहीं थी।

अब थोड़ी कहानी उनकी मृत्‍यू को लेकर, 11 जनवरी, 1966 को दुनिया को अलविदा कहने वाले लाल बहादुर शास्‍त्री जी की रहस्यमयी हालात में मौत हुई थी। 1965 में जब भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ था, तब वे पाकिस्तान के साथ जंग को खत्म करने के लिए समझौता पत्र पर हस्ताक्षर करने ताशकंद गए थे, यहां 10 जनवरी, 1966 में पाकिस्तान के साथ शांति समझौते पर करार के महज 12 घंटे बाद तड़के 1.32 बजे रहस्यमयी परिस्थितयों में उनकी अचानक मौत हो गई, उस वक्‍त उनकी उम्र 61 साल थी। इस दौरान शास्त्री जी ने अपना हाथ दिल के पास रखा और फिर अचेत हो गए। निजी डॉक्टर आर एन चुग ने पल्स चेक किया और उनके निधन की पुष्टि की। 11 जनवरी, 1966 को दिल के दौरे के कारण पूरे देश में उनके निधन की दुखद खबर सामने आई थी।

देश के लिए लाल बहादुर शास्त्री द्वारा किए गए अहम कार्य -

  • भारत के प्रथम आर्थिक सुधारक थे।

  • परमाणु बम परियोजना शुरू की।

  • हरित व श्वेत क्रांति की शुरुआत की।

  • दूध के व्यापार ने उन्हें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाया।

  • भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान देश का नेतृत्व किया।

  • सैनिकों और किसानों का मनोबल बढ़ाने के लिए ‘जय जवान’ ‘जय किसान’ का नारा दिया

  • देश में खाद्यान्न के संकट को हल करना बताया।

  • जय जवान, जय किसान का नारा देकर देशवासियों को एक बड़ा हौसला देने का काम किया

पुण्यतिथि पर नेताओं ने इस अंदाज में शास्‍त्री जी को किया याद :

'जय जवान, जय किसान' के प्रणेता पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्यतिथि के अवसर पर देश के कई नेताओं ने ट्वीट कर उन्‍हें याद किया और श्रद्धांजलि दी एवं शत्-शत् नमन किया।

पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री जी की सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा पूरे देश को प्रेरित करती है। उन्होंने 'जय जवान-जय किसान' के ओजस्वी नारे से देश के किसानों और जवानों का मनोबल बढ़ाया। ऐसे अद्वितीय व्यक्तित्व को उनकी पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

'जय जवान-जय किसान' के उद्घोषक, पूर्व प्रधानमंत्री, 'भारत रत्न' लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि! आप सदैव सादगी, सामाजिक शुचिता, मूल्यों एवं आदर्शों के श्रेष्ठ प्रतिमान के रूप में स्मरण किए जाएंगे।

उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ

सादगी और ईमानदारी की मिसाल श्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने कुशल नेतृत्व से भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया और अपना पूरा जीवन देश व गरीबों के उत्थान के लिए समर्पित किया। जय जवान-जय किसान के उद्घोषक पूर्व प्रधानमंत्री श्री लालबहादुर शास्त्री जी की पुण्यतिथि पर उन्हें सादर नमन।

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया

जय जवान, जय किसान के नारे से देश को नई दिशा देने वाले, सादगी, सरलता व ईमानदारी के प्रतीक, पूर्व प्रधानमंत्री 'भारत रत्न' श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटिशः नमन करता हूँ। आपका त्याग व सहज जीवन देशवासियों को राष्ट्र सेवा के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा

“मेरी समझ से प्रशासन का मूल विचार ये है कि समाज को एक जुट रखा जाए, ताकि वो विकास कर सके और अपने लक्ष्यों की तरफ बढ़ सके।” ~ लाल बहादुर शास्त्री “जय जवान, जय किसान” के उद्घोषक, महान गांधीवादी, पूर्व प्रधानमंत्री व हमारे आदर्श, लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्यतिथि पर स्मृति वंदन।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे

भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री जी के प्रेरणादायी विचार एवं राष्ट्र निर्माण में दिया गया अतुल्य योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। आज उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।

सचिन पायलट

ईमानदारी और सादगी की मिसाल देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि एवं सादर नमन।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल

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