भारत की संस्कृति और परंपरा पूर्णतः वैज्ञानिक है: डॉ. एस. के. जैन
भारत की संस्कृति और परंपरा पूर्णतः वैज्ञानिक है: डॉ. एस. के. जैनPrafulla Tiwari

भारत की संस्कृति और परंपरा पूर्णतः वैज्ञानिक है: कुलपति डॉ. एस. के. जैन

नर्मदापुरम, मध्यप्रदेश : सेमिनार का मुख्य उद्देश्य विश्व स्तर पर परिवर्तित जैव विविधता के प्रमुख कारणों और उसमें मानव द्वारा किए जाने वाले मुख्य प्रयासों पर प्रकाश डालना रहा था।

नर्मदापुरम, मध्यप्रदेश। शासकीय नर्मदा महाविद्यालय नर्मदा पुरम में प्राणी शास्त्र और वनस्पति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसका विषय "पर्यावरणीय जैव विविधता और सतत विकास में अद्यतन प्रवृत्तियां"था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति श्री एस के जैन, डॉ शैलेंद्र जैन प्रभारी कुलसचिव बी यू भोपाल, विशिष्ट अतिथि डॉ चंद्रशेखर गोस्वामी तथा विशिष्ट वक्ता डॉ सुबोध जैन डीन केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर उपस्थित हुए।

सेमिनार का मुख्य उद्देश्य विश्व स्तर पर परिवर्तित जैव विविधता के प्रमुख कारणों और उसमें मानव द्वारा किए जाने वाले मुख्य प्रयासों पर प्रकाश डालना रहा था। जो भावी पीढ़ी, विद्यार्थियों, शोधार्थियों की जानकारी के साथ प्रकृति और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी को चिन्हित करता है।

स्वागत उद्बोधन में प्राचार्य डॉ ओ एन चौबे ने कहा कि अपने फायदे के लिए मानव द्वारा किए गए कुदरत के साथ परिवर्तन हमेशा अनुकूल नहीं होते इसके दुष्परिणाम भी हमारे सामने हैं विद्यार्थियों को ये प्रमाण प्रयोगशाला के अंदर नहीं बल्कि प्रकृति के संपर्क में जाकर समझाए जा सकते हैं। सहसंयोजक डॉ रवि उपाध्याय ने विषय प्रवर्तन किया।

उद्घाटन सत्र में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एस के जैन ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की संस्कृति और परंपरा पूर्णतः वैज्ञानिक है। हम अपने वास्तविक शोध की ओर लौटें और विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से हटाकर क्षेत्र में, समाज में, बस्तियों में, खेतों में ले जाएं और वास्तविकता से परिचित करवाएं। प्रतिभाओं को रोजगार के पीछे नहीं बल्कि स्वरोजगार के लिए प्रेरित करें।

डॉ सुबोध जैन विशिष्ट वक्तव्य में संबोधित करते हुए बोले कि प्रकृति को मानव ने अपने तरीके से उपयोग करने की कोशिश में कई बीमारियों को न्योता दिया है। ज्यादा पानी के लालच में गहरी खुदाई की और अघुलनशील खनिज लवणों को पीना प्रारंभ किया। परिणाम स्वरूप अपने शारीरिक जींस और गुणसूत्रों की संरचना बिगाड़ ली। डी एन ए के शोध के बाद एंजाइम का पता किया और फसलों को प्रभावित किया संपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र का संतुलन बिगड़ गया। जिससे जीव जंतु और पक्षियों के अस्तित्व प्रश्नचिन्ह लग गया।

डॉक्टर सी एस गोस्वामी सेवा निवृत्त प्राध्यापक रसायन शास्त्र को उनके शोध कार्य और पुस्तक लेखन के लिए लाइफटाइम एचीवमेंट अवॉर्ड से मुख्य अतिथि ने सम्मानित किया। चार तकनीकी सत्रों में कुल 21 शोध पत्रों का वाचन और तीन पोस्टर प्रस्तुत किये गये। 350 से अधिक पंजीयन और 110शोधपत्र प्रकाशित हुए‌। जिसमें शोधार्थी, विद्यार्थी सभी थे। शोध पत्र वाचन विजेताओं और सहयोगी विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। शोध पत्र जर्नल का विमोचन भी किया गया।

कार्यक्रम के संयोजक डॉ राजेश दीवान, सविता मानेकर रहे। संचालन डॉ निहारिका भावसार और आभार डॉ बी सी जोशी ने किया। तकनीकी सहयोग नितिन सोनी, मनोज यादव, प्रतीत गौर, शाहिद खान रहे। कार्यक्रम में डॉ एस सी हर्ने, डॉ बी एल राय, डॉ कमल चौबे ,डॉ कमल वाधवा, डॉ सुधीर दिक्षित, डॉ ईरा वर्मा, डॉ आलोक मित्रा, डॉ आर एस बोहरे, डॉ जे के कमलपुरिया, डॉ प्रीती, डॉ एस के उदयपुरे, डॉ मीना कीर, एन आर अडलक, जी पी रैकवार, जय श्री नंदनवार, डॉ अंजना यादव, अमित दीक्षित, डॉ नीलू दुबे, डॉ योगेंद्र सिंह, शबनम कुरैशी, दीपा पालीवाल, नीता वर्मा चेतना पवार सहित विद्यार्थी और प्राध्यापक उपस्थित रहे।

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