देश के "ग्लोबल स्टेट" के रूप में पहचान बना सकता है मप्र
देश के "ग्लोबल स्टेट" के रूप में पहचान बना सकता है मप्रSyed Dabeer Hussain - RE

देश के "ग्लोबल स्टेट" के रूप में पहचान बना सकता है मप्र

मप्र को इस बार निवेशकों ने 15 लाख 42 हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि निवेश का भरोसा दिलाया है। यदि निवेशकों ने शत-प्रतिशत निवेश किया तो मप्र के लिए 29 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार की राह खुल सकती है।

हाइलाइट्स :

  • मप्र ने अप्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन और जीआईएस से नई पहचान बनाई।

  • अब देश के साथ दुनिया में बढ़ेगी मप्र की पहचान।

  • इंटेंशन टू इन्वेस्ट ने लिया साकार तो देश और दुनिया में होगा मप्र का सपना साकार।

भोपाल, मध्यप्रदेश। मौजूदा सप्ताह मप्र के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। मप्र ने 8 से 10 जनवरी तक अब तक का सबसे सफल अप्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का आयोजन किया। ऐसा आयोजन जिसने मप्र को देश और दुनिया में नई पहचान दी है। इस सफल आयोजन के बाद अगले दो दिन 11 और 12 जनवरी को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के आयोजन की बड़ी चुनौती थी। टीम मप्र इस आयोजन में भी खरा साबित हुआ और मप्र की धाक जमाने में इस टीम ने कोई कसर बाकी नहीं रखी।

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का समापन गुरुवार को हो गया है। ये दो दिनी भव्य आयोजन प्रदेश में अब तक हुए सभी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के मुकाबले सबसे अधिक सफल रहा। एक ही मंच पर देश के प्रमुख और नामचीन उद्योगपतियों का जमावड़ा हुआ। ये मप्र के बढ़ते प्रभाव को दिखाता है। इतनी ही नहीं जीआईएस के पहले दिन तो दो देश सुरीनाम और गुयाना के राष्ट्रपति भी आयोजन के भागीदार बने। ये संभवत: पहला मौका था, जब कोई राज्य सरकार जीआईएस का आयोजन करे और उसमें दो देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी भागीदारी करे। इतना ही नहीं आयोजन के दौरान 35 देशों के दूतावास ने भागीदारी निभाई। दस देशों ने पार्टनर कंट्री की जिम्मेदारी निभाई तो कुल 84 से अधिक देशों के उद्यमियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर इस आयोजन को सही मायने में ग्लोबल साबित भी किया।

25 फीसदी भी निवेश हो गया तो मप्र की जीएसडीपी का 40 फीसदी होगा :

कोई भी सरकार किसी भी तरह का आयोजन करें, कैसा भी आयोजन कर ले, लेकिन आखिर में सवाल उठता है कि मिला क्या? तो इस लिहाज से यदि पहले जीआईएस को ही लें तो ये आयोजन परिणाम के लिहाज से अब तक का सबसे सफल आयोजन माना जा सकता है। मप्र को इस बार निवेशकों ने 15 लाख 42 हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि निवेश का भरोसा भी दिलाया है। यदि निवेशकों ने शत-प्रतिशत निवेश किया तो मप्र के लिए 29 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार की राह खुल सकती है। वैसे निवेशकों और उद्योगपतियों ने इंटेशन टू इन्वेस्ट में जो आंकड़े दिए हैं, उसका 25 फीसदी भी मप्र में निवेश हो गया तो भी ये बड़ी बात होगी। ये बात राज्य सरकार भी जानती है जो रूचि निवेश के लिए प्रदर्शित की गई है, उसमें से कभी सौ फीसदी तो निवेश होने से रहा। ये न तो मप्र में अब तक हुई सभी इन्वेस्टर्स समिट और जीआईएस से हुआ और न ही आज समाप्त हुए जीआईएस से ऐसा होगा। यदि हम बेहद सकारात्मक हो जाएं और मान लें कि 25 फीसदी निवेश होगा और यदि ऐसा हो गया तो भी मप्र की तकदीर बदलने के लिए ये काफी है। 25 फीसदी भी कम नहीं होगा। इंटेशन टू इन्वेस्ट का 25 फीसदी लगभग 4 लाख करोड़ रुपए होगा। इसी अनुपात में यदि रोजगार को भी 25 फीसदी ही मान लें तो भी ये संख्या सात लाख से अधिक होती है। यहां बता दें कि मप्र की जीएसडीपी का आकार ही लगभग 10 लाख करोड़ रुपए है। हाल ही में मप्र ने इस आंकड़े को पार कर लिया है। इस तरह ये निवेश राशि मप्र की जीएसडीपी का लगभग 40 फीसदी होगी जो कि बड़ी बात होगी। इसी तरह यदि देखें तो मप्र में सभी संवर्ग के शासकीय सेवकों को भी मिला लें तो इस समय मप्र में इनकी संख्या लगभग 7 लाख है। इस तरह एक ही बार में मप्र में उतने युवाओं को रोजगार मिल जाएगा जितना कि इस समय शासकीय सेवाओं में कार्यरत है।

अप्रवासी सम्मेलन में किसी राज्य की अब तक की सबसे बड़ी ब्रांडिंग :

सामान्य तौर पर अप्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन नई दिल्ली में होता है, लेकिन अब आयोजन का दायरा बढ़ाया जा रहा है। अब राज्यों को इस आयोजन में भागीदार बनाया जा रहा है। लिहाजा मप्र को इस बार मेजबान राज्य की भूमिका निभाने का मौका मिला। मूल रूप से ये आयोजन भारत के विदेश मंत्रालय का होता है। पहली बार ऐसा हुआ कि इस सम्मेलन को किसी राज्य ने अपने ब्रांडिंग के सबसे बड़े प्लेटफार्म में तब्दील कर दिया। जीआईएस के लिए मप्र तो पहले से ही तैयार था। ऐसे में लगे हाथ मप्र ने अप्रवासी भारतीयों को मप्र में निवेश के लिए आमंत्रित कर लिया और उन्हें लगातार प्रजेंटेशन के माध्यम से मप्र की खुबियों से रूबरू कराया। बड़ी संख्या में ऐसे अप्रवासी जो कि इस सम्मेलन के लिए आए थे, उन्होंने जीआईएस में भागीदारी निभाई। वे पहले ही इंदौर और मप्र की आवभगत से अभिभूत थे। ऐसे में उन्होंने निवेश के लिए पूरा प्यार मप्र पर लुटाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यदि मप्र ने जीआईएस में निवेश के लिए जो बड़ा आंकड़ा हासिल किया, इसके पीछे अप्रवासी भारतीयों का भी बड़ा योगदान रहा है। बहरहाल इन दोनों आयोजन ने मप्र को देश के ग्लोबल स्टेट के रूप में नई पहचान दे दी है। वैसे पहले ही मप्र टाइगर स्टेट, लेपर्ड स्टेट, चीता स्टेट का दर्जा तो पहले ही हासिल कर चुका है। अब मप्र देश का ग्लोबल स्टेट बनने जा रहा है। इन दोनों ही आयोजन से देश और दुनिया में मप्र को नई पहचान मिलेगी। इतना ही नहीं यदि इंटेशन टू इन्वेस्ट ने आकार लिया तो मप्र का सपना साकार होना तय ही है। आखिर मप्र को देश के 5 ट्रिलियन डॉलर इकॉनामी में बड़ा योगदान जो निभाना है।

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