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समसामयिक जगत में ज्योतिष ज्ञान की प्रासंगिकता और महत्ता से युवा पीढ़ी को परिचित कराया जाना चाहिए: मंगुभाई पटेल

MP News: आज राज्यपाल ने केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में प्रथम महर्षि पाराशर अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान कही ये बात...

भोपाल, मध्यप्रदेश। आज राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में प्रथम महर्षि पाराशर अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान राज्यपाल ने आज कहा कि, ज्योतिष का ज्ञान पूर्वजों की साधना और अनुसंधान की सौगात है, समसामयिक जगत में ज्योतिष ज्ञान की प्रासंगिकता और महत्ता से युवा पीढ़ी को परिचित कराया जाना चाहिए।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में प्रथम महर्षि पाराशर अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर कहा कि, दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के भोपाल परिसर, एस्ट्रोवर्स एवं जीवन वैभव ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है। सम्मेलन का समापन 10 सितंबर को होगा।

राज्यपाल पटेल ने सत्यवान-सावित्री के परंपरागत दृष्टांत का उल्लेख करते हुए कहा कि परिश्रम से प्रारब्ध बनता है। उन्होंने कहा कि सत्यवान की मृत्यु की नियति को उनकी पत्नी ने अपनी बुद्धिमत्ता और प्रखरता से पति की प्राण रक्षा के साथ ही पूरे परिवार के सुखी जीवन में बदल लिया था। उन्होंने कहा कि धैर्य के साथ नीति के पथ पर चलते हुए कल्याणकारी कार्य करते रहने में जीवन की सार्थकता है। उन्होंने एक अन्य दृष्टांत के माध्यम से बताया कि ज्योतिष फल की इच्छा के बिना सत्कर्म करने और आत्मसंतोष का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के दौरान ज्योतिष के द्वारा सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन पर विचार किया जाना चाहिए। रोजगार और व्यवसाय के विकल्प के रूप में ज्योतिष को उसकी वैज्ञानिकता और रचनात्मकता के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि ज्योतिष में 12 राशि, 9 ग्रह और 27 नक्षत्र होते है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने गुजरात विधानसभा के सामने पुनीत वन, अंबाजी में मांगलिक वनों की आयोजना ज्योतिष के आधार पर की थी। राज्यपाल ने वन मंत्री के रूप में परियोजना से जुड़े प्रसंगों के उल्लेख में बताया कि पुनीत वन में बेल पत्र के पौधों के समूह से शिवलिंग की रचना की गई है। मांगलिक वन में ऊँ का आकार वृक्षों के द्वारा बनाया गया है। उन्होंने सम्मेलन आयोजन की सराहना करते हुए भारतीय ज्ञान परंपराओं को वैश्विकता प्रदान करने की सराहनीय पहल बताया। उन्होंने उम्मीद की कि सम्मेलन का चितंन भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं, नैतिक जीवन मूल्यों और प्राचीन भारतीय ज्ञान की वैज्ञानिकता से युवाओं को प्रेरणा लेने के लिए प्रेरित करेगा।

उद्घाटन सत्र में ऑनलाइन संबोधन में अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ वैदिक स्टडीज के डेविड ट्रालें ने ज्योतिष के महत्त्वपूर्ण आयामों पर प्रकाश डाला। ज्योतिष को विज्ञान के साथ ही कला बताते हुए वर्तमान समय की सामाजिक, राजनैतिक, तकनीकी, आध्यात्मिक स्थितियों और संवाद के परि²श्य में ज्योतिष के नवाकार और नवाख्यान की जरूरत बताई। तकनीकी सुविधाओं और पर्यावरणीय परिवर्तनों के समावेशन की सम्भावनाओं पर विचार के लिए कहा है।

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