Narmadapuram : जंगलों की रखवाली के बजाए ऑफिस में बाबूगिरी कर रहे नाकेदार

नर्मदापुरम, मध्यप्रदेश : मुख्यालय के आदेश ताक पर रख वन विभाग में चल रहा अटैचमेंट का खेल। मुख्य वनसंरक्षक भोपाल के स्पष्ट आदेशों के बाद भी विभाग में अटैच हैं कई वनरक्षक एवं वनपाल।
वन विभाग
वन विभागसांकेतिक चित्र
Submitted By:
Prafulla Tiwari

नर्मदापुरम, मध्यप्रदेश। जिले के वन विभाग में पिछले काफी समय से अटैंचमेंट का खेला जा रहा है। वन मुख्यालय ने पिछले दिनों समस्त जिला कार्यालयों को सख्त निर्देश दिए थे कि अटैंचमेंट सख्ती से खत्म किए जाएं और जिस कर्मचारी की जहां डयूटी है उससे वहीं पर काम लिया जाए, लेकिन मुख्यालय के आदेशों को ताक में रखकर यहां अटैचमैंट किए गए और अभी किए भी जा रहे हैं। आलम यह है कि जिन नाकेदार और वनपालों को अवैध लकड़ी कटाई और चोरी रोकने के लिए जंगलों में ड्यूटी करना थी, वह कार्यालयों में बाबूगिरी कर रहे हैं।

नर्मदापुरम में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, सामान्य वन मंडल, वन परिक्षेत्र आदि कार्यालयों पर लगभग दो दर्जन से अधिक नाकेदार वनपाल कार्यालय में बाबूगिरी कर रहे हैं। जबकि इन्हें जंगल में काम करना चाहिए। वन विभाग के एसडीओ श्री वासनिक की मिलीभगत से सामान्य वन्य मंडल में लगभग दो दर्जन कर्मचारी लिखा-पढ़ी, बाबूगिरी के अलावा अधिकारियों के बंगले पर काम कर रहे हैं। प्रदेश के वन मंडल महाप्रबंधक अधिकारी ने सख्त निर्देश दिए हैं कि जितने भी कर्मचारी अटैच है, वनपाल उन्हें जंगल में भेजा जाए। लेकिन अधिकारी के आदेश को रद्दी की टोकरी में विभाग के अधिकारी डाल रहे हैं।

नर्मदापुरम सामान्य वन मंडल, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, रेंज कार्यालय में अधिकांश नाकेदार अटैच हैं। हाल ही में कुछ नाकेदारों के ट्रांसफर जंगल में किए गए थे और उनके साथ साथ कुछ महिलाओं को भी जंगल में तैनात किया गया है। लेकिन अपने चाहेते को सालों को अधिकारियों ने अपने कार्यालय में अटैच कर रखा है।। जबकि अटैचमेंट प्रक्रिया पूरी तरह बंद है। इसके बाद भी विभाग के अधिकारियों ने नाकेदारों को कार्यालय में अटैच कर रखा है। इस बात की शिकायत वन विभाग के कर्मचारियों ने मंत्री विधायक सहित वरिष्ठ अधिकारियों को की लेकिन अभी तक उक्त अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की गई।

जंगल में काम कर रही महिलाएं, पुरूष कर्मी कार्यालयों में कर रहे मौज :

कुछ महिलाएं जिनके बच्चे, जिनके परिवार में माता-पिता बहुत ही वृद्ध हैं और कुछ तो ऐसे हैं कि जिन महिलाओं के पति गंभीर बीमारी से भी ग्रसित हैं, ऐसी महिलाओं को सामान वन मंडल एसडीओ ने स्थानांतरण कर जंगल में पदस्थ कर दिया है, वह काफी परेशान हैं। उनके बच्चे छोटे-छोटे हैं, जबकि शासन का और वनमंत्री का आदेश था कि जिन महिलाओं के परिवार में बच्चे छोटे हो उन्हें कार्यालय में पदस्थ किया जा सकता है, लेकिन सामान वन मंडल के एसडीओ ने ऐसा न करके इन महिलाओं का स्थानांतरण ऐसे जंगलों में किया गया है, जहां वह रात में गश्त करती हैं, तो खतरा मंडराता है, शेर भालू से भी उन्हें खतरा है। विभागीय अधिकारियों का कमाल ही कहें कि जहां पुुरूष नाकेदारों को ड्यूटी करना चाहिये, वहां महिलाओं को तैनात किया गया है।

प्रदेश का पहला जिला, जहां आदेश के बाद भी अटैचमेंट जारी :

जंगलों की सुरक्षा करने के नाम पर भर्ती हुए वनरक्षक एवं वनपल मूल पदस्थापना पर न रहकर कार्यालयों में बाबूगिरी कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों ने इन्हें कार्यालयों में अटैच करके रखा है, जो बाबू बनकर बैठे हैं। पिछले माह वनरक्षकों को तत्काल प्रभाव से जंगलों में भेजने के लिये अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने आदेश जारी किये गये थे। जिस पर प्रदेश के कई क्षेत्रों में आदेश का पालन कर वनरक्षकों को जंगलों में तैनात कर दिया है। लेकिन नर्मदापुरम जिला प्रदेश का ऐसा पहला जिला हैं, जहां आदेशों पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। यहां अटैच बनरक्षक पिछले कई सालों से ड्यूटी से बचे हुए है। इनकी पोस्टिंग फील्ड के लिये हुई थी, लेकिन सांठगांठ कर सुबह 10 से शाम 5 बजे तक की ड्यूटी कर रहे हैं।

भोपाल तक हो चुकी शिकायत :

कुछ माह पूर्व वन विभाग में हुए तबादलों में उपजा विरोध का मामला शिकायतों के रूप में भोपाल तक पहुंच चुका है। वन कर्मचारी संघ के माध्यम से कई शिकायतें की गई, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

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