Shriram Established Tapkeshwar Mahadev
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शिवपुरी के घने जंगल में स्थित इस शिव मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसकी स्थापना भगवान श्रीराम ने की

Shriram Established Tapkeshwar Mahadev: इस मंदिर में विराजमान शिवलिंग पर प्राकृतिक तरीके से 365 दिनों तक जलाभिषेक होता है। यह जल कहां से आता है, यह बात आज भी रहस्य है।

हाइलाइट्स:

  • प्राकृतिक 365 दिनों तक होता है शिवलिंग जलाभिषेक ।

  • पहाड़ के नीचे गुफा में भगवान महादेव विराजमान है।

  • पहाड के उपर तीन कुंड है, एक भैरव कुण्ड, दूसरा गणेश कुण्ड और तीसरा शेर कुण्ड ।

Tapkeshwar Mahadev Temple Shivpuri : भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित किये टपकेश्वर मंदिर, प्राचीन काल से ही आस्था का प्रतीक रहा है। मध्य प्रदेश के शिवपुरी के घने जंगल के बीच पहाड़ी पर टपकेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। सावन महीने में टपकेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ लगती है। पहाड़ी पर बसा यह मंदिर लोगों के बीच खास महत्त्व रखता है। कहा जाता है कि, सालों पहले इस मंदिर की स्थापना भगवान श्रीराम ने की थी। इसके अलावा इस मंदिर में विराजमान शिवलिंग पर प्राकृतिक तरीके से 365 दिनों तक जलाभिषेक होता है। यह जल कहां से आता है, और 365 दिन कैसे निरंतर टपकता रहता है यह बात आज भी रहस्य है। तो आइये जानते है मध्यप्रदेश के इस रहयमयी टपकेश्वर महादेव की कहानी...।

टपकेश्वर महादेव मंदिर शिवपुरी तक पहुंच मार्ग :

यह मंदिर शिवपुरी जिले में अटल सागर बांध के आगे नरवर के घने जंगल के अंदर स्थित है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क है जिससे बाइक और कार से आसानी से टपकेश्वर महादेव के दरबार में पहुंचा जा सकता है। टपकेश्वर महादेव मंदिर बहुत सुंदर है और प्राकृतिक परिवेश से घिरा हुआ। यहां चारों और जंगल है और इस जंगल के बीच में एक पहाड है। इस पहाड पर विराजमान है भगवान महादेव। शिवलिंग तक पहुंचने के लिए पहाड़ को काटकर सीढ़ियां बनाई गई है। लगभग 300 सीढ़ियां चढ़ने के बाद इस पहाड पर पहुंचते है। जहां पहाड़ के नीचे गुफा में भगवान महादेव विराजमान है।

टपकेश्वर महादेव मंदिर का महत्व :

टपकेश्वर महादेव मंदिर में शिवलिंग के उपर से प्राकृतिक रूप से जलाभिषेक होता है। यह जलाभिषेक हमेशा होता रहता है। जब यहां के पुजारियों ने बताया कि, यह मंदिर अति प्राचीन है। बताया जाता है कि इस मंदिर की स्थापना स्वयं भगवान राम ने की है। उसके बाद यहां महाराज ओमकारनंद ग्राम झंडा से यहां आए और उन्होंने यहां तप किया। बताया जा रहा है कि, श्री ओमकारनंद महाराज गुरू पूर्णिमा से यहां गुफा में एकांतवास में जाते है और चर्तुमास तक यहां भगवान की आराधना करते है। इस गुफा में किसी को भी जाने की अनुमति नहीं है। यह चतुर्मास दीपावली पर पूरा होता है। उसके बाद यह महाराज बाहर निकलते है।

यह मंदिर भी है स्थापित :

यहां नर नारायण का मंदिर देखने के लिए मिलेगा। नर नारायण के मंदिर में आपको विष्णु भगवान जी के और देवी लक्ष्मी जी के दर्शन करने के लिए मिलेंगे। यह मूर्ति बहुत ही सुंदर है और सफेद मार्बल से बनी हुई है। मंदिर में आपको विष्णु भगवान जी के अवतारों के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां विष्णु भगवान के नरसिंह अवतार, कच्छप अवतार, वराह अवतार और भी अवतार देखने के लिए मिलते हैं, जो बहुत सुंदर लगते हैं। यहां पर राम लक्ष्मण सीता जी का मंदिर, राधा- कृष्ण मंदिर, शंकर- पार्वती मंदिर, सूर्य मंदिर, भैरव मंदिर भी स्थित है।

भैरव कुण्ड, गणेश कुण्ड और तीसरा शेर कुण्ड

इस पहाड के उपर तीन कुंड है। जिसमें हमेशा पानी रहता है। जिसमें एक भैरव कुण्ड, दूसरा गणेश कुण्ड और तीसरा शेर कुण्ड है। यहां बताया जाता है कि, भगवान की आराधना के समय यहां शेर आता था और पूजा अर्चना के बाद यहां शेर कुण्ड में पानी पीकर जाता है। यहां मान्यता है कि, जो कोई भी यहां सच्ची श्रृद्धा से भगवान की आराधना करता है। उसे भगवान उसकी मनोकामना पूरी करते है।

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