करणी सेना
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क्या है करणी सेना, इस सेना ने क्यों जलाया सीएम शिवराज का पुतला? जानिए...

क्या है ये करणी सेना, करणी सेना की स्थापना आखिर किसने की थी, क्या है इस सेना के उद्देश्य और आखिर क्यों इस सेना ने भोपाल में किया आंदोलन और क्यों उस आंदोलन में फूंका सीएम शिवराज का पुतला?

राज एक्सप्रेस। 8 जनवरी से 12 जनवरी तक भोपाल के जंबूरी मैदान में अपनी 21 सूत्रीय मांगो को लेकर करणी सेना परिवार ने आंदोलन किया। करणी सेना परिवार के अध्यक्ष जीवन सिंह शेरपुर के नेतृत्व में ये बड़ा आंदोलन या शक्ति प्रदर्शन आयोजित किया गया था। जंबूरी मैदान जो कि काफी बड़ा मैदान माना जाता है, वह पूरा भरा नजर आया था। क्या है ये करणी सेना, करणी सेना की स्थापना आखिर किसने की थी, क्या है इस सेना के उद्देश्य और आखिर क्यों इस सेना ने भोपाल में किया आंदोलन और क्यों उस आंदोलन में फूंका सीएम शिवराज का पुतला?

क्या है करणी सेना?

करणी सेना एक ऐसा गैर लाभकारी राजपूत समाज संगठन है, जिसे जयपुर के एक छोटे से गांव झोंटावरा में कुछ राजपूत युवाओं और लोकेंद्र सिंह कालवी द्वारा 23 सितंबर 2006 में स्थापित किया गया था। करणी सेना का नाम राजस्थान में राजपूत की माता करणी पर रखा गया है। यह राजपूत संगठन राजस्थान में स्थित है।

आपसी मनमुटाव के चलते करणी सेना के 3 भाग हो गए थे। पहली श्री राजपूत करणी सेना जिसके अध्यक्ष लोकेंद्र सिंह कालवी हैं, दूसरी श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना समिति जिसके अध्यक्ष अजीत सिंह मामदोली है और तीसरी श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना जिसके अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेधी हैं। लेकिन तीनों संगठनों का लक्ष्य एक ही है राजपूत शान की रक्षा करना। करणी सेना के तीसरे भाग यानी श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना ने ही भोपाल में हुए आंदोलन में सीएम शिवराज का पुतला जलाया था।

क्या है करणी सेना के उद्देश्य?

इस संगठन का उद्देश्य वैसे तो राजपूतों और राजपूतों के इतिहास की रक्षा करना है लेकिन इसके अलावा राजपूत समाज को सरकारी नौकरी और शिक्षा में जातिगत आरक्षण दिलाना, राजपूत महिलाओं को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाना, स्कूल की किताबों से गायब हो गए राजपूत राजाओं और इतिहास को पुनः स्थापित करना और राजपूत एकता कायम रखना उनके मुख्य उद्देश्यों में आता हैं। लेकिन करणी सेना की छवि देश में आम तौर पर गलत कारणों की वजह और ज्यादातर फिल्मों के खिलाफ आंदोलन और अभिनेताओं या अभिनेत्रियों को जान से मारने की धमकी देने वाले संगठन के तौर पर ही रही हैं।

क्यों किया करणी सेना ने भोपाल में आंदोलन?

करणी सेना ने भोपाल के जंबूरी मैदान में 8 जनवरी से आंदोलन की शुरुआत की थी। यह आंदोलन राजपूत समाज की 21 मांगो को पूरा करने जिसमे से राजपूत जाति को आरक्षण, एससी/एसटी एक्ट में बिना जांच गिरफ्तारी को हटाना, मुख्य मांगे थी। करणी सेना ने अपनी मांगों को लेकर अवधपुरी से पास, इंटरस्टेट बस टर्मिनस के पास और जंबूरी मैदान की सड़क को जाम कर दिया था।

करणी सेना के मध्यप्रदेश अध्यक्ष जीवन सिंह शेरपुर सहित 4 और करणी सेना कार्यकर्ताओं ने मांगे ना पूरी होने तक आमरण अनशन किया था। करणी सेना के मध्यप्रदेश अध्यक्ष शेरपुर ने राजपूत आरक्षण, एससी/एसटी एक्ट में बिना जांच गिरफ्तारी पर रोक, जाती की एक ही पीढ़ी को आरक्षण और सामान्य वर्ग के हितों की रक्षा, कुछ ऐसी मांगो को लेकर करणी सेना परिवार आंदोलन कर रहा हैं।

कौनसी थी वो 21 मांगे?

करणी सेना परिवार की 21 मांगें :

  1. आरक्षण आर्थिक आधार पर दिया जाए और एक बार आरक्षण मिलने पर दोबारा आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाए.

  2. एससी, एसटी एक्ट में बिना जांच के गिरफ्तारी पर रोक लगे.

  3. एससी, एसटी एक्ट की तर्ज पर सामान्य-पिछड़ा वर्ग एक्ट बने जो सामान्य-पिछड़ा वर्ग के हितों की रक्षा करे

  4. EWS आरक्षण में भूमि व मकान की बाध्यता समाप्त कर आठ लाख की वार्षिक आय को ही आधार मानकर आरक्षण का लाभ दिया जाए। सभी भर्तियों में ईडब्ल्यूएस के छात्रों को उम्र सीमा में छूट एवं छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाए.

  5. वर्तमान में प्रक्रियाधीन शिक्षक भर्ती वर्ष 2018 में प्रथम काउंसलिंग के पश्चात शेष बचे हुए EWS वर्ग के समस्त पदों को द्वितीय काउंसलिंग या शिक्षा विभाग की वर्तमान नियोजन प्रक्रिया में समस्त पदों के साथ EWS वर्ग के पात्र अभ्यार्थियों से भरा जाए।EWS के रिक्त पदों को इसी वर्ग से भरा जाए।

  6. प्राथमिक शिक्षक भर्ती वर्ग 3 के पदों में 51 हजार पदों पर न्याय संगत रोस्टर के साथ भर्ती की जाए व माध्यमिक शिक्षक वर्ग 2 के वंचित विषयों जैसे मातृभाषा हिन्दी, सामान्य विज्ञान, विज्ञान के विषय में पदों में वृद्धि की जाए।

  7. भर्ती कानून बनाए जाएं और व्यापम के एक लाख पदों एसआई, पटवारी, अन्य विभागों में शीघ्र भर्ती की जाए एवं भर्ती नहीं होने पर बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता प्रदान किया जाए.

  8. MPPSC की 2019, 20, 21 की भर्तियां संवैधानिक रूप से पूर्ण की जाए।

  9. केन्द्र और राज्य की आने वाली सभी भर्तियों में सभी वर्गों को तीन वर्ष की अतिरिक्त छूट दी जाए, राज्य सरकार द्वारा दी गई तीन वर्ष की छूट की समयावधि एक वर्ष से बढ़ाकर दो वर्ष की जाए।

  10. अतिथि शिक्षकों, रोजगार सहायकों व कोरोना काल में सेवा देने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को नियमित नियुक्ति प्रदान की जाए।

  11. किसानों के हित में स्वामीनाथन कमेटी सिफारिशों को लागू किया जाए, ताकि किसानों को उपज का सही मूल्य मिल सके व रासायनिक खादों की बढ़ती कीमत पर अंकुश लगाया जाए. रोजड़ा (घोड़ा रोज) से प्रदेश के कई क्षेत्रों के किसान परेशान हैं, इसमें निजात दिलाने के लिए उचित कार्य योजना बनाई जाएं।

  12. खाद्यान्न (रोजमर्रा की चीजें) को जीएसटी से मुक्त किया जाए तथा बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाई जाए।

  13. क्षत्रिय महापुरुषों के इतिहास में छेड़छाड़ को तुरंत रोका जाए, इतिहास संरक्षण समिति बने ताकि समाज में आपसी सामंजस्य बना रहे।

  14. सवर्ण आयोग की कार्यप्रणाली में सुधारकर उसे क्रियाशील बनाया जाए।

  15. राज्य कर्मचारी आयोग की सिफारिश जिसमें कर्मचारियों की रिटायरमेंट आयु 65 वर्ष करने को कहा गया है, किसी भी परिस्थिति में अब कर्मचारियों की रिटायरमेंट आयु नहीं बढ़ाई जाए।

  16. गौमाता को राष्ट्र माता का दर्जा दिया जाए व सरकार गौशालाओं के स्तर में सुधार किया जाए एवं गोबर व गौमूत्र को सरकारी स्तर पर खरीदने की व्यवस्था की जाए ताकि गौ-पालन से रोजगार के अवसर भी बढ़ें।

  17. पद्मावत फिल्म के विरोध में दर्ज प्रकरण वापस लिए जाएं।

  18. मप्र की भर्तियों में यहां के युवाओं को प्राथमिकता दी जाए अन्य राज्यों के अभ्यार्थियों का कोटा सीमित हो।

  19. कर्मचारियों को दी जा रही पदोन्नति के साथ उन्हें उसके साथ अधिकार व सुविधा भी दी जाएं. कर्मचारियों की पेंशन पुन: चालू की जाए।

  20. पुलिस विभाग में आरक्षकों की वेतन विसंगति को दूर कर 2400 ग्रेड पे लागू किया जाए।

  21. सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली में सुधार कर शिक्षा का स्तर प्राइवेट स्कूलों की भांति किया जाए ताकि छात्र प्राइवेट स्कूलों की तरफ ना भागें व प्राइवेट स्कूलों की फीस पर नियंत्रण रखने हेतू एक कमेटी बनाई जाए।

क्यों फूंका था प्रदेश के मुख्यमंत्री का पुतला?

10 जनवरी को आगर और शाजापुर के इलाको में श्री राजपूत करणी सेना बांसवाड़ा एवं तहसील गढ़ी के पदाधिकारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का पुतला जलाया था और इसके बाद प्रधामंत्री मोदी के नाम का ज्ञापन सौंपा गया था। पुतला जलाने वाले कार्यकर्ताओं ने बताया की 8 जनवरी से जंबूरी मैदान में इतना बड़ा आंदोलन चल रहा है, लेकिन सरकार हमारे आंदोलन को अनदेखा और हमारी मांगों को अनसुना कर रही है इसीलिए यह पुतले जलाएं जा रहे हैं l

12 जनवरी को खत्म हुआ आंदोलन, 17 मांगो पर सहमति

मध्यप्रदेश के लोक सेवा प्रबंधन मंत्री डॉ.अरविंद भदोरिया से चर्चा करने के बाद करणी सेना ने अपना आंदोलन को खत्म किया। करणी सेना की मध्यप्रदेश सरकार से 17 मांगो पर सहमति बन गई हैं l कैबिनेट मंत्री ने मांगो को लेकर एक एसीएस और 2 पीएस की कमिटी गठित करने का आश्वासन दिया है जो 2 महीने में अपनी मांग रखेगी। करणी सेना का कहना था कि आर्थिक आधार पर आरक्षण और एट्रोसिटी एक्ट के लिए करणी सेना केंद्र सरकार से लड़ती रहेगी और अगर 2 महीने के अंदर मांगे पूरी नहीं हुई तो वापिस आंदोलन किया जाएगा।

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