शिवराज सिंह ने किया प्रवासी भारतीयों को संबोधित
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जाते-जाते निवेदन है कि मप्र को भूलना मत, निवेश में योगदान देना : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

इंदौर, मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री श्री चौहान ने यह भी अपील की कि प्रवासी भारतीय जिन देशों में रह रहे हैं वहाँ मध्यप्रदेश के बच्चों के लिए हेल्प डेस्क बनाएँ, जिससे बच्चों को सुविधा दी जा सके।

इंदौर, मध्यप्रदेश। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन के समापन अवसर पर मन भावुक है। पिछले तीन दिनों में इंदौर एक रूप हो गया था। इंदौर में बेटी के विवाह की तरह, इस सम्मेलन की तैयारियां की गई थी। जिस तरह बेटी की विदाई पर तकलीफ होती है वैसी ही तकलीफ आज अनुभव हो रही है। इंदौर में मेहमान और मेजबान दोनों भाव-विभोर हैं। प्रत्येक घर में भारत की चर्चा हो रही है। यहां की जनता अतिथियों के स्वागत में जी-जान से जुट गई थी।

श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इंदौर को स्वच्छता और स्वाद की राजधानी कहा है, इंदौर तो जन-भागीदारी की राजधानी भी है। यहां प्रवासी भारतीयों ने नमो ग्लोबल पार्क में पौधे भी लगाए हैं और वे प्रेम के साथ अब पेड़ के बंधन से भी बंध चुके हैं। अतिथियों को क्यू आर कोड दिए गए हैं, जिसमें वे रोपे गए पौधे की देख-रेख जान सकेंगे। उन्हें यह वृक्ष इंदौर का स्मरण कराते रहेंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि भारत की संस्कृति है ,धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो,प्राणी में सद्भावना हो और विश्व में सभी का कल्याण हो। जब पर्यावरण बचेगा तो सभी का कल्याण भी होगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने पंचामृत का सिद्धांत दिया है। भारत का यह संदेश पूरे विश्व में पहुँचाने का कार्य प्रवासी भारतीय कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना अद्भुत है। जब प्रदेश में लिंगानुपात गड़बड़ हो रहा था तो यह योजना प्रारंभ की गई थी। बालिकाओं को शिक्षा सहित करियर निर्माण के लिए सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। अब योजना के नए स्वरूप में लाड़ली लक्ष्मी योजना-2 के तहत मेडिकल और इंजीनियरिंग सहित अन्य पाठ्यक्रमों की फीस राज्य सरकार भरेगी।

श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश की विकास दर 19.76 प्रतिशत है जो देश में सर्वाधिक है। देश की अर्थ-व्यवस्था में मध्यप्रदेश का योगदान 3.6 प्रतिशत से बढ़ कर 4.6 प्रतिशत हो गया है। प्रदेश भारत का फूड बॉस्केट बन गया है। गेहूँ उत्पादन में मध्यप्रदेश ने पंजाब को पीछे छोड़ दिया है। गुणवत्ता में भी प्रदेश का गेहूँ बहुत अच्छा है और चावल सहित मध्यप्रदेश के अन्य उत्पाद भी पहचान बना रहे हैं। सुशासन और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश आगे है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने यह भी अपील की कि प्रवासी भारतीय जिन देशों में रह रहे हैं वहाँ मध्यप्रदेश के बच्चों के लिए हेल्प डेस्क बनाएँ, जिससे बच्चों को सुविधा दी जा सके।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रवासी भारतीयों से आह्वान किया कि मध्यप्रदेश को न भूलें। अगले 2 दिन ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट हो रही है, इसमें भी निवेश के उद्देश्य से हिस्सेदारी करें। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि फ्रेंडस ऑफ एमपी पोर्टल से जुड़ कर प्रवासी भारतीय मध्यप्रदेश के दोस्त बन सकते हैं। भले ही मध्यप्रदेश में निवेश करें अथवा न करें पर वर्ष में एक बार जरूर भारत आएँ। मध्यप्रदेश के प्रवासी भारतीय प्रदेश के नगरों एवं ग्रामों के गौरव दिवस के अवसर पर अवश्य पधारें।

श्री चौहान ने मध्यप्रदेश की पर्यटन सुविधाओं के बारे में भी विस्तार से बताया। उन्होंने कूनो पालपुर में फरवरी माह से चीता देखने की सुविधा, प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व और प्रदेश के से महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों की जानकारी भी दी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सभी प्रवासी भारतीय इंदौर की यादों को लेकर विदा हो रहे हैं। ऐसे में मन कहता है कि "जब तुम चले जाओगे, तो याद बहुत आओगे"। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आगे जोड़ा "तुम बिन लगेगा राजवाड़ा सूना और सराफा सूना, सूना तुम बिन लगेगा ये हृदयघट सूना"।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रख्यात शायर डॉ. बशीर बद्र के इस शेर के साथ संबोधन का समापन किया-

"मुसाफिर हैं हम भी

मुसाफिर हो तुम भी

किसी मोड़ पर फिर मुलाकात होगी"

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