भागवत के बयान से Twitter पर जंग-DNA पर शुरू हुई बहस ब्राह्मणों के DNA तक आई
भागवत के बयान से Twitter पर जंग-DNA पर शुरू हुई बहस ब्राह्मणों के DNA तक आईSocial Media

भागवत के बयान से Twitter पर जंग-DNA पर शुरू हुई बहस ब्राह्मणों के DNA तक आई

मोहन भागवत के बयान से राजनीतिक गलियारों में हलचल मची हुई है और उनके बयान की जंग Twitter पर छिड़ी, ट्विटर पर #ब्राह्मण_देश_की_शान_है, #ब्राह्मणो_का_DNA_विदेशी है इस तरह के हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं...

दिल्‍ली, भारत। अखंड ब्रह्माण्ड में यदि किसी समाज का मानवता को सबसे ज्यादा योगदान है, तो वो हैं ब्राह्मण समाज का... 'ब्राह्मण त्याग से जन्मी भक्ति का धाम है। ब्राह्मण ज्ञान के दीप जलाने का नाम है, ब्राह्मण विद्या का प्रकाश फैलाने का काम है' और आज इन्‍हीें यानी ब्राह्मण शब्‍द को लेकर सोशल मीडिया पर जबरदस्‍त जंग छिड़ती देखी जा रही है। दरअसल, कभी कुछ नेता इस तरह के बयान दे देते हैं कि, उस मुद्दे पर राजनीतिक बहस शुरू हो जाती है। इसी तरह आज DNA को लेकर शुरू हुई बहस का मुद्दा हिन्दू मुस्लिमों के DNA से होकर अब ब्राह्मणों के DNA पर आ पहुंची है।

क्‍यों शुरू हुई बहस :

बहस शुरू होने की वजह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) का बयान है। बीते दिन रविवार को उन्‍होंने एक कार्यक्रम के दौरान हिंदुत्व, मुसलमानों, लिंचिंग और DNA शब्‍द का प्रयोग करते हुए कुछ ऐसा बयान दे दिया, जिसकी वजह से राजनीतिक गलियारों में हलचल मची हुई है। इतना ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म पर Twitter पर भी मोहन भागवत के बयान को लेकर जंग छिड़ी हुई है। सुबह से ही #ब्राह्मण_देश_की_शान_है, #ब्राह्मणों_का_DNA_विदेशी है इस तरह के हैशटैग में ट्रेंड होते नजर आ रहे हैं।

ट्विटर यूजर्स ट्रेंड हो रहे #ब्राह्मण_देश_की_शान_है, #ब्राह्मणों_का_DNA_विदेशी है के हैशटैग को टैग करते हुए अपने-अपने अंदाज में अपनी राय दे रहे हैं।

ताे वहीं, पवन सिंहा नाम के ट्विटर यूजर्स ने अपने ट्वीट में लिखा- ब्राह्मणो_का_DNA_विदेशी trend करता हुआ देख कर बहुत अफ़सोस हुआ, इस देश में शक, हून, मुग़ल, बैक्तिरियन, ईरानी सब देशी हो गए और ब्राह्मण विदेशी? इस हद की राजनीति करने वाले घोर अवैज्ञानिक और समाज विरोधी हैं, इन पर विश्वास करने से पहले स्वयं पढ़ें सब सच सामने आ जाएगा।

मोहन भागवत के बयान पर राजनीतिक दलों की टिप्पणी :

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को एक कार्यक्रम में मॉब लिंचिंग, मुसलमान के मसले पर बयान देने के बाद से उनके बयान पर सियासी दंगल भी छिड़ा, तमाम राजनीतिक दलों की ओर से उनके बयान पर टिप्पणी की गई है। जानें किसने क्‍या-क्‍या कहा-

मोहन भागवत जी यह विचार क्या आप अपने शिष्यों, प्रचारकों, विश्व हिंदू परिषद/ बजरंग दल कार्यकर्ताओं को भी देंगे? क्या यह शिक्षा आप मोदी-शाह जी व भाजपा मुख्यमंत्री को भी देंगे? यदि आप अपने व्यक्त किए गए विचारों के प्रति ईमानदार हैं तो भाजपा में वे सब नेता जिन्होंने निर्दोष मुसलमानों को प्रताड़ित किया है उन्हें उनके पदों से तत्काल हटाने का निर्देश दें।

पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह

RSS के भागवत ने कहा "लिंचिंग करने वाले हिंदुत्व विरोधी" इन अपराधियों को गाय और भैंस में फ़र्क़ नहीं पता होगा, लेकिन क़त्ल करने के लिए जुनैद, अखलाक़, पहलू, रकबर, अलीमुद्दीन के नाम ही काफी थे। ये नफ़रत हिंदुत्व की देन है, इन मुजरिमों को हिंदुत्ववादी सरकार की पुश्त पनाही हासिल है।

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कल एक कार्यक्रम में भारत में सभी धर्मों के लोगों का डीएनए एक होने की बात किसी के भी गले के नीचे आसानी से नहीं उतरने वाली है। आरएसएस और बीजेपी एंड कंपनी के लोगों तथा इनकी सरकारों की कथनी व करनी में अंतर सभी देख रहे हैं।

बसपा प्रमुख मायावती

मोहन भागवत का बयान कि, भारत में रहने वाले सभी लोगों का DNA एक है। अगर भागवत जी का हृदय बदल रहा है, तो हम उसका स्वागत करते हैं। वर्ण व्यवस्था में विश्वास करने वाला संगठन अगर धर्म की हदों को तोड़ना चाहता है तो ये अच्छी बात है।

एनसीपी नेता नवाब मलिक

भारत का रहने वाला हूं भारत की बात सुनाता हूं, जो इस मिट्टी में जो पैदा हुआ है उसका डीएनए अलग कहां से हो जाएगा। हर हिंदुस्तानी इस बात का गौरव करता है कि, वह हिंदुस्तानी है और इस मिट्टी में पैदा हुआ है। कुछ लोगों को हिंदुस्तान के डीएनए से एतराज हो सकता है, लेकिन इतना जरूर है कि, RSS और मोहन भागवत देश को जोड़ने का काम करते हैं।

केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी

एक नजर मोहन भागवत के बयान पर :

बता दें कि, RSS के प्रमुख मोहन भागवत ने अपने बयान में कहा था- इसमें शामिल लोग हिंदुत्व के खिलाफ हैं और लोकतंत्र में हिंदुओं या मुसलमानों का प्रभुत्व नहीं हो सकता है। बगैर एकता के देश का विकास संभव नहीं है और इस एकता का आधार राष्ट्रवाद होना चाहिए। भारतीयों का DNA एक है और मुसलमानों को डर के इस चक्र में नहीं फंसना चाहिए कि, भारत में इस्लाम खतरे में है। लोग मुसलमानों से देश छोड़ने को कहते हैं, वे खुद को हिन्दू नहीं कह सकते।

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