राष्ट्रीय एकजुटता दिवस
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राष्ट्रीय एकजुटता दिवस : जानिए चीन के साथ हुए युद्ध के कारण, परिणाम और हार की वजह

साल 1962 के युद्ध के चार साल बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और अन्य लोगों की एक समिति ने 20 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकजुटता दिवस मनाने का संकल्प लिया था।

राज एक्सप्रेस। भारत की एकता और अखंडता को दिखाने के लिए हर साल 20 अक्टूबर को देश में राष्ट्रीय एकजुटता दिवस मनाया जाता है। दरअसल साल 1962 में इसी दिन चीन ने विश्वासघात करते हुए भारत पर हमला बोल दिया था। भारत इस युद्ध के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं था और उसे अक्साई चीन से हाथ धोना पड़ा। 21 नवंबर 1962 को युद्ध विराम की घोषणा की गई। इस लड़ाई के चार साल बाद साल 1966 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और अन्य लोगों की एक समिति ने 20 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकजुटता दिवस मनाने का संकल्प लिया था। तो चलिए आज हम भारत और चीन के बीच हुए उस युद्ध के कारण और परिणाम के बारे में जानेंगे।

भारत-चीन के बीच विवाद के कारण :

भारत की आजादी के साथ ही चीन के साथ सीमा विवाद बना हुआ था। साल 1954 में भारत और चीन ने पंचशील समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें भारत ने तिब्बत को चीन के हिस्से के रूप में मान्यता दे दी है। यह वह समय था जब भारत और चीन के रिश्ते बहुत अच्छे बने हुए थे। इस रिश्ते में दरार आई साल 1958 में जब चीन ने अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के कुछ हिस्सों को अपने मानचित्र में दिखाया था। इसके अलावा साल 1958 में ही जब चीन ने तिब्बतियों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया तो दलाई लामा अपने अनुयायियों के साथ भारत आ गए। भारत ने जब दलाई लामा को शरण दी तो चीन इससे बुरी तरह से भड़क गया। साल 1960 में चीन ने भारत को प्रस्ताव दिया था कि भारत अक्साई चीन पर अपना दावा छोड़ देता है तो चीन भी अरुणांचल प्रदेश पर अपना दावा छोड़ देगा, लेकिन भारत ने इस ऑफर को ठुकरा दिया। इस तरह दोनों देशों के बीच विवाद बढ़ता गया, जिसके चलते चीन ने 20 अक्टूबर 1962 में युद्ध छेड़ दिया था।

युद्ध के परिणाम :

युद्ध के समय भारत के पास महज लगभग 20,000 सैनिक थे, जबकि चीन के पास 80,000 सैनिक थे। इस युद्ध में भारत के 1383 जवान मारे गए और 548-1047 सैनिक घायल हुए। वहीं चीन के 722 जवान मारे गए और 1697 घायल हुए। इसके अलावा चीन ने भारत के एक बड़े भू-भाग पर भी कब्जा जमा लिया था।

युद्ध में हार के कारण :

  1. युद्ध में वायुसेना का इस्तेमाल ना करना भारत की हार का बड़ा कारण था। रक्षा सलाहकारों का मानना है कि उस समय भारत की वायुसेना चीन से ज्यादा मजबूत थी और भारत वायुसेना का इस्तेमाल करता तो परिणाम बदल सकता था।

  2. उस समय की सरकार को यह लगता था कि चीन कभी भी भारत पर हमला नहीं करेगा। यहीं कारण है कि भारत युद्ध के लिए तैयार नहीं था।

  3. उस समय भारतीय सेना के पास युद्ध लड़ने के जरूरी संसाधन भी मौजूद नहीं थे।

  4. इस युद्ध में भारतीय खुफिया एजेंसी की नाकामी भी भारत की हार का एक बड़ा कारण बनकर सामने आई थी।

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