वाराणसी में शाह और योगी ने अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का किया शुभारंभ
शाह और योगी ने अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का किया शुभारंभPriyanka Sahu -Re

वाराणसी में शाह और योगी ने अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का किया शुभारंभ

उत्‍तर प्रदेश के वाराणसी में CM योगी और अमित शाह ने अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के शुभारंभ के अवसर अपने संबोधन में कही यह बातें...

उत्तर प्रदेश, भारत। आज 13 नवंबर को उत्‍तर प्रदेश के वाराणसी में अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन हुआ, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सम्मिलित हुए और उन्‍होंने अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का शुभारंभ किया।

मनुष्य को इस सृष्टि में ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति माना गया है :

अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का शुभारंभ के मौके पर उत्तर प्रदेश CM योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा- मैं आभारी हूं केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी का जिन्होंने पहले अखिल भारतीय राजभाषा सम्मलेन के लिए उत्तर प्रदेश की धरती को चुना। इस अवसर पर गृह मंत्री जी के साथ अन्य सभी सम्मानित अतिथियों का काशी की धरती पर हृदय से स्वागत करता हूं। मनुष्य को इस सृष्टि में ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति माना गया है। यह सर्वश्रेष्ठ इसलिए है, क्योंकि ईश्वर ने हमें अभिव्यक्ति का एक माध्यम दिया है। यह माध्यम है हमारी 'भाषा'। देश व दुनिया में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में एक हिन्दी भी है।

उत्तर प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ ने आगे यह भी कहा कि, ''आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में अपने पूर्वजों व स्वाधीनता संग्राम सेनानियों को इससे अच्छी व विनम्र श्रद्धांजलि हो ही नहीं सकती कि, हम ऐसे भव्य आयोजनों से पूरे देश को जोड़ने वाली हिन्दी को वह मंच दें, जिसे श्रद्धेय अटल जी ने UN के मंच से दी थी।''

7 वर्ष पहले भारत क्या था, भारत के अंदर आम जनमानस के मन में विश्वास का अभाव था। वैश्विक मंच पर भारत की जो प्रतिष्ठता होनी चाहिए थी, वो प्रतिष्ठता उस रूप में नहीं थी जो भारत को मिलनी चाहिए थी, लेकिन पिछले सात-साढ़े सात वर्षों के अंदर आपने बदलते हुए भारत को, इस एक नए भारत को, इस श्रेष्ठ भारत के रूप में बदलते हुए देखा है।

उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ

अमित शाह का संबोधन :

इस दौरान अमित शाह ने भी अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित कर कहा- अमृत महोत्सव हमारे लिए आजादी दिलाने के लिए जो हमारे पुरखों ने यातनाएं सहन की, सर्वोच्य बलिदान दिए, संघर्ष किए उसको स्मृति में जीवंत करके युवा पीढ़ी को प्रेरणा देने का मौका तो है ही, साथ ही आजादी का अमृत महोत्सव हमारे लिए संकल्प का भी वर्ष है। इसी वर्ष में 130 करोड़ भारतीयों को तय करना है कि, जब आजादी के 100 साल होंगे तो भारत कैसा होगा, कहां होगा। दुनिया में भारत का स्थान कहां होगा।

  • चाहे शिक्षा की बात हो, चाहे संस्कार की बात हो, चाहे सुरक्षा की बात हो, चाहे आर्थिक उन्नत्ति की बात हो, चाहे उत्पादन बढ़ाने की बात हो, भारत कहा खड़ा है, और हर क्षेत्र में भारत कहां खड़ा होगा, इसका संकल्प लेने का ये वर्ष है।

  • हम सभी हिंदी प्रेमियों के लिए भी ये वर्ष संकल्प का रहना चाहिए। जब 100 साल आजादी के हो तो इस देश में राजभाषा और सभी स्थानीय भाषाओं का दबदबा इतना बुलंद हो कि किसी भी विदेशी भाषा का सहयोग लेने की आवश्यकता न हो।

  • मैं मानता हूं कि ये काम आजादी के तुरंत बाद होना चाहिए था। क्योंकि आजादी के तीन स्तंभ थे, स्वराज, स्वदेशी और स्वभाषा। स्वराज तो मिल गया, लेकिन स्वदेशी भी पीछे छूट गया और स्वभाषा भी पीछे छूट गई।

  • मैं भी हिंदी भाषी नहीं हूं, गुजरात से आता हूं, मेरी मातृभाषा गुजराती है। मुझे गुजराती बोलने में कोई परहेज नहीं है। लेकिन, मैं गुजराती ही जितना बल्कि उससे अधिक हिंदी प्रयोग करता हूं। हिंदी और सभी स्थानीय भाषाओं के बीच कोई अंतर्विरोध नहीं है, हिंदी सभी स्थानीय भाषाओं की सहेली है। काशी भाषा का गौमुख है, भाषाओं का उद्भव, भाषाओं का शुद्धिकरण, व्याकरण को शुद्ध करना, चाहे कोई भी भाषा हो, काशी का बड़ा योगदान है।

  • मैं बचपन से देखते आ रहा हूं कि अगर अंग्रेजी नहीं बोल सकते तो एक लघुता ग्रंथि बच्चे के अंदर आ जाती थी। मैं आपको दावे से कहता हूं कि कुछ समय के बाद ऐसा समय आयेगा कि मेरी भाषा मैं नहीं बोल सकता इसलिए लघुता ग्रंथि का अनुभव होगा।

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