UP: CM योगी ने महान साहित्यकार भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की प्रतिमा का अनावरण किया

उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंंत्री योगी द्वारा आज लखनऊ स्थित भारतेन्दु नाट्य अकादमी परिसर में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की प्रतिमा का अनावरण किया।
UP: CM योगी ने महान साहित्यकार भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की प्रतिमा का अनावरण किया
CM योगी ने भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की प्रतिमा का अनावरण कियाSyed Dabeer Hussain - RE

उत्‍तर प्रदेश, भारत। हिंदी के पितामह कहे जाने वाले महान साहित्यकार भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की आज 9 सितंबर को जयंती है, इस अवसर पर उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंंत्री योगी ने आज लखनऊ स्थित भारतेन्दु नाट्य अकादमी परिसर में उनकी (भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) प्रतिमा का अनावरण किया।

CM योगी ने कहा :

आजादी के अमृत महोत्सव एवं चौरी-चौरा शताब्दी समारोह की श्रृंखला में आधुनिक हिन्दी खड़ी बोली के जनक भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी की जयंती पर प्रतिमा का अनावरण करने के दौरान CM योगी ने कहा- आज भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी की जयंती है। मैं इस अवसर पर भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी के हिन्दी भाषा एवं साहित्य में अतुलनीय एवं अविस्मरणीय योगदान के लिए अपनी कृतज्ञता एवं श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं। आजादी के अमृत महोत्सव एवं चौरी-चौरा शताब्दी समारोह की शृंखला में आज भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी की प्रतिमा का अनावरण किया गया है। UP सरकार द्वारा 04 फरवरी, 2021 से 04 फरवरी, 2022 तक चौरी-चौरा शताब्दी समारोह का आयोजन किया जा रहा है।

विद्यार्थियों एवं समस्त युवाओं से CM योगी ने किया यह आह्वान :

लखनऊ स्थित भारतेन्दु नाट्य अकादमी परिसर में इस कार्यक्रम में CM योगी ने कहा कि, ''आगे भारतेन्दु नाट्य अकादमी के विद्यार्थियों एवं समस्त युवाओं से मेरा आह्वान है कि वह भारतेन्दु जी के विचारों, आदर्शों से प्रेरणा लेकर देश व समाज के चतुर्दिक विकास तथा एक 'समर्थ, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत' के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान दें।''

भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा :

उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंंत्री योगी ने बताया- अगर सभी विभाग अपने क्षेत्रों की विभूतियों को चिह्नित कर कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे तो अमृत महोत्सव सही मायने में भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। मुझे विश्वास है कि हम इस परम्परा को गरिमा व गौरव के साथ आगे बढ़ाने का कार्य करेंगे।

बता दें कि, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने महज 34 वर्ष की अल्पआयु में इतना लिख दिया और इतना काम कर गए कि, उनके समय को ‘भारतेन्दु’ युग कहा जाता है। आज जो हिंदी हम लिखते-बोलते हैं, वह भारतेंदु की ही देन है और भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को आधुनिक हिंदी का जनक माना जाता है। उनका जन्म 9 सितम्बर, 1850 को काशी के एक सम्पन्न वैश्य परिवार में हुआ था।

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