महोबा में PM मोदी ने अर्जुन सहायक परियोजना सहित विकास परियोजनाओं का किया लोकार्पण
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महोबा में PM मोदी ने अर्जुन सहायक परियोजना सहित विकास परियोजनाओं का किया लोकार्पण

PM मोदी ने जनपद महोबा, हमीरपुर, बांदा व ललितपुर में 3,240 करोड़ रुपये की अर्जुन सहायक परियोजना, भावनी बांध परियोजना, रतौली बांध परियोजना, मसगांव-चिल्ली स्प्रिंकलर परियोजना का लोकार्पण किया।

उत्तर प्रदेश, भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शुक्रवार से तीन दिन की उत्तर प्रदेश यात्रा पर है। आज वे जनपद महोबा, हमीरपुर, बांदा व ललितपुर में 3,240 करोड़ रुपये की अर्जुन सहायक परियोजना, भावनी बांध परियोजना, रतौली बांध परियोजना, मसगांव-चिल्ली स्प्रिंकलर परियोजना का लोकार्पण किया। इस अवसर पर UP के CM योगी आदित्‍यनाथ भी मौजूद रहे।

महोबा में अर्जुन सहायक परियोजना सहित अन्य विकास परियोजनाओं का लोकार्पण के मौके पर PM मोदी ने अपने संबोधन में कहा- जवन महोबा की धरा में, आल्हा-उदल और वीर चंदेलों की वीरता कण-कण में समाई है। वा महोबा के वासियन को हमाओ कोटि-कोटि प्रणाम पहुंचे। बीते सात वर्षों में हम कैसे सरकार को बंद कमरों से निकाल कर देश के कोने-कोने तक लाए हैं। यह महोबा उसका उदाहरण है।

कुछ साल पहले ही मैंने देश की करोड़ों मुस्लिम बहनों से वादा किया था कि मैं तीन तलाक से उन्हें मुक्ति दिला कर ही रहूंगा। वह वादा भी मैंने बुंदेलखंड की धरती से किया था। वह वादा पूरा भी हो गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

  • तीन हजार करोड़ से अधिक की लागत से बनी इस सिंचाई परियोजना से बुंदेलखंड के लाखों परिवारों को लाभ होगा। चार लाख से अधिक लोगों को पीने का शुद्ध पानी भी मिलेगा। पीढ़ियों से जिस पानी का इंतजार था, वह इंतजार आज खत्म होने जा रहा है।

  • गुरु नानक देव ने कहा है कि पानी को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए क्योंकि पानी से सारी सृष्टि को जीवन मिलता है।

  • आज अर्जुन सहायक परियोजना, रतौली बांध परियोजना, भावनी बांध परियोजना और मझगांव-चिल्ली स्प्रिंकलर सिंचाई परियोजना का लोकार्पण करने का मुझे सौभाग्य मिला है।

  • यही चित्रकूट, यही बुंदेलखंड है जिसने प्रभु श्रीराम का साथ दिया, लेकिन समय के साथ यह क्षेत्र पानी की चुनौतियां और पलायन का केंद्र कैसे बन गया। क्यों इस क्षेत्र में लोग अपनी बेटी को ब्याहने से कतराने लगे। यह बात यहां के लोग अच्छी तरह से जानते हैं।

  • जब माफियाओं पर बुलडोजर चल रहा है तो कुछ लोग हाय-तौबा मचा रहे हैं। लेकिन ये लोग कितना भी हाय-तौबा मचा लें, यूपी और बुंदेलखंड के काम रुकने वाले नहीं है। इन लोगों ने बुंदेलखंड के साथ जैसा बर्ताव किया उसे लोग कभी भूल नहीं सकते।

  • पहले की सरकार चलाने वालों ने ताल-तलैया के नाम पर फीते तो बहुत काटे लेकिन ये नहीं बताया कि बिना भू-जल संरक्षण के नलों में ताल-तलैयों में पानी कैसे आएगा।

  • पिछली सरकारों ने अपने परिवार के लिए तो सब कुछ किया, लेकिन बुंदेलखंड को बूंद-बूंद के लिए तरसा दिया।

  • दशकों तक बुंदेलखंड के लोगों ने लूटने वाली सरकारें देखी हैं। पहली बार बुंदेलखंड के लोग यहां के विकास के लिए काम करने वाली सरकार देख रहे हैं।

  • इस कटु सत्य को कोई भी भुला नहीं सकता कि वो प्रदेश को लूटकर कभी नहीं थकते थे और हम काम करते हुए कभी नहीं थकते। वो समस्याओं की राजनीति करते हैं और हम समस्या के समाधान के रास्ते निकालते हैं।

  • किसानों को हमेशा समस्याओं में उलझाए रखना ही कुछ राजनीतिक दलों का आधार रहा है। ये समस्याओं की राजनीति करते हैं और हम समाधान की राष्ट्रनीति करते हैं।

  • केन-बेतवा लिंक का समाधान भी हमारी ही सरकार ने निकाला है, सभी पक्षों से संवाद करके रास्ता निकाला है।

  • गुजरात के कच्छ की हालत भी बुंदेलखंड जैसी ही थी। लोग वहां से पलायन कर रहे थे। लेकिन मुझे सेवा का अवसर मिला तो आज कच्छ देश के सबसे तेजी से विकास करने वाले जिलों में एक है। मुझे भरोसा है कि बुंदेलखंड भी वैसा विकास अपना सकता है।

  • परिवारवादियों की सरकारों ने दशकों तक यूपी के अधिकतर गांवों को प्यासा रखा। कर्मयोगियों की सरकार ने सिर्फ दो साल के भीतर ही 30 लाख परिवारों को नल से जल दिया है।

  • परिवारवादियों की सरकारें सिर्फ किसानों को धोखे में रखना चाहती थीं। परिवारवादियाें ने तो किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा से भी वंचित रखा था, लेकिन हमारी सरकार ने छोटे से छोटे किसान को भी किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा दी है।

  • परिवारवादियों की सरकारें किसानों को सिर्फ अभाव में रखना चाहती थीं। किसानों के नाम से घोषणाएं करते थे, लेकिन किसान तक पाई भी नहीं पहुंचती थी। जबकि पीएम किसान सम्मान निधि से हमने अब तक 1 लाख 62 हजार करोड़ रुपए सीधे किसानों के खातों में भेजे हैं।

  • हम बुंदेलखंड से पलायन को रोकने के लिए इस क्षेत्र को रोज़गार में आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और यूपी डिफेंस कॉरिडोर भी इसका एक बहुत बड़ा प्रमाण है।

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