वनवासी भाई-बहनों का जीवन बनेगा समन्वय की मिसाल: राष्‍ट्रपति कोविंद
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वनवासी भाई-बहनों का जीवन बनेगा समन्वय की मिसाल: राष्‍ट्रपति कोविंद

उत्‍तर प्रदेश के सेवा कुंज आश्रम में राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वनवासी समागम को संबोधित कर कहा-आज मुझे भगवान बिरसा मुंडा जी का स्मरण हो रहा है...

उत्‍तर प्रदेश, भारत। उत्‍तर प्रदेश के सेवा कुंज आश्रम में आज राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वनवासी समागम को संबोधित किया।

राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने संबोधन में कहा- आज मुझे भगवान बिरसा मुंडा जी का स्मरण हो रहा है। उन्होंने अंग्रेजों के शोषण से वन संपदा और वनवासी समुदाय की संस्कृति की रक्षा के लिए अनवरत युद्ध किया और शहीद हुए। उनका जीवन केवल जनजातीय समुदायों के लिए ही नहीं बल्कि सभी देशवासियों के लिए प्रेरणा और आदर्श का स्रोत रहा है।

मुझे इस बात का संतोष है कि मेरी सांसद निधि की राशि का उपयोग आपके संस्थान व आश्रम के शिक्षा संबंधी प्रकल्प में हुआ है। किसी भी धनराशि का इससे बेहतर उपयोग नहीं हो सकता है। मैं आभारी हूं कि आप सबने मुझे योगदान करने का अवसर दिया और कल्याणकारी प्रकल्पों से जोड़े रखा।

राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद

राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आगे ये भी कहा कि, ''मैं सभी शिक्षकों और सहयोगियों को बधाई देता हूं, जिन्होंने वनवासी समुदाय के बच्चों को निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रशिक्षित और प्रेरित किया है। पिछले दो दशकों से वनवासी युवकों की इस पौध को तैयार करने में सक्रिय ‘सेवा कुंज आश्रम’ की पूरी टीम की मैं सराहना करता हूं।''

राष्‍ट्रपति के संबोधन की प्रमुख बातें-

  • मेरा मानना है कि हमारे देश की आत्मा, ग्रामीण और वनवासी अंचलों में बसती है। यदि कोई भी भारत की जड़ों से परिचित होना चाहता है, तो उसे सोनभद्र जैसे स्थान में कुछ समय बिताना चाहिए।

  • वनवासी समुदाय के विकास के बिना देश के समग्र विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है। सही मायनों में आप सबके विकास के बिना देश का विकास अधूरा है।

  • देश भर के हमारे आदिवासी बेटे-बेटियां खेल-कूद, कला, और टेक्नॉलॉजी सहित अनेक क्षेत्रों में अपने परिश्रम और प्रतिभा के बल पर देश का गौरव बढ़ा रहे हैं।

  • हमारा यह प्रयास होना चाहिए कि आधुनिक विकास में आप सभी वनवासी भाई-बहन भी भागीदारी करें, साथ ही आपकी सांस्कृतिक विरासत और पहचान भी संरक्षित और मजबूत बनी रहे।

  • आज यहां आकर मेरा यह विश्वास और दृढ़ हुआ है कि, सनातन काल से चली आ रही हमारी संस्कृति के मूल तत्व हमारे जनजातीय और वनवासी भाई-बहनों के हाथों में सुरक्षित हैं।

  • मुझे विश्वास है कि हमारे वनवासी भाई-बहनों का जीवन, प्रगति और परंपरा के समन्वय की मिसाल बनेगा।

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