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Flood Disaster in India 2019
Flood Disaster in India 2019|Syed Dabeer Hussain - RE
उत्तर भारत

भारत के यह राज्य जूझ रहे है बारिश और बाढ़ के प्रकोप से

जहा एक तरफ गर्मी से बेहाल लोग मानसून का बेसब्री से इंताजर कर रहे थे, वहीं जब मानसून आया तो, कुदरत का कहर मच गया। केरल से लेकर महाराष्ट्र और बिहार तक, साथ ही इन अन्य राज्यों में भी है बाढ़ का प्रकोप।

Kavita Singh Rathore

Kavita Singh Rathore

राज एक्सप्रेस। आज भारत के कई शहर पानी में डूबे हुए है ऐसा लग रहा है मानो उन्हें किसी ने जलमग्न कर दिया है। इसका कारण भारी बारिश के चलते बाढ़ का आना है। अगर हम राज्यों की बात करे तो, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात, केरल, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश-छत्तीसग़ढ, असम, उत्तराखंड, यह सभी राज्य बाढ़ की चपेट में आ गये है। इन राज्यों में लोगों का जीवन यापन बहुत ही मुश्किल हो गया है। हालत इतनी बेहाल है कि, चारो तरफ पानी रहते हुए भी लोग प्यास से जुंझ रहे है।

इन राज्यों में डूबे ये शहर पानी में :

बिहार के शहर और गांव :

बिहार के कई शहर और गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके है। उत्तर बिहार के दरभंगा, सीतामढ़ी, कटिहारी, मोतिहारी, झंझारपुर, भुज, मधुबनी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, सहरसा, सुपौल, किशनगंज, अररिया, पूर्णिया सहित 9 जिले लगभग पानी में डूबे हुए है। पूरे बिहार की बात करे तो, बिहार में अभी तक 103 लोगों की मृत्यु हो चुकी है जिसमे से 12 लोग मोतिहारी के थे और 70 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए है। ताजुब की बात यह है कि, बिहार में बाढ़ से इतने लोगों की मृत्यु हो चुकी है, परन्तु प्रसासन के कान में ज्यू तक नहीं रेंगी है। बिहार में दूर दूर तक मदद का कोई नामोनिशान नहीं है। इन जगहों में आने जाने के सभी रस्ते बंद हो चुके है कई नेशनल हाइवे तक पानी में दुब चुके है। कई गांव का सम्पर्क एक दूसरे से टूट चुका है। सभी सड़के नदियों में तब्दील हो चुकी है।

बिहार में बाढ़ आने के मुख कारण :

अगर हम सिर्फ बिहार की बात करे तो, बिहार में लगभग हर साल बाढ़आती है। इसका मुख्य कारण यहाँ की उफनती नदिया -डैम और प्रसासन की लापरवाही है।

उफनती नदिया और डैम - बिहार के ज्यादातर वह राज्य बाढ़ की चपेट में आते है, जो नेपाल की सिमा से सटे हुए है। नेपाल पहाड़ी क्षेत्र पर स्थित है और वहां जब-जब डैम का पानी छोड़ा जाता है तब-तब वह पानी बिहार में आकर गंडक, कमला, नारायणी, बागमती और कोसी नदियों के द्वारा बह कर बाढ़ का रूप ले लेता है। जिससे बिहार के लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है।

प्रसासन की लापरवाही - बिहार में लगभग हर साल बाढ़ आती है, इसके बाबजूद भी प्रसासन सुरक्षा व्यवस्था के लिए कोई कदम नहीं उठाता है। हर साल बिहार के हजारों लोग बेघर हो जाते है, भूख प्यास से मर जाते है। प्रसासन बाढ़ को नहीं रोक सकता, लेकिन उसके आगमन के लिए पूर्ण तैयारी कर सकता है। बाढ़ में लोगों को भोजन-पेयजल पहुंचाने के लिए पहले से व्यवस्था कर सकता है।

महाराष्ट्र -

महाराष्ट्र के कोल्हापुर, गडचिरोली, नासिक, बड़वानी, सांगली, अकोला, सतारा बाढ़ से बेहाल है। यहाँ NDRF (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) की 22 टीमें रेस्क्यू कर रही है इतना ही नहीं यहाँ एयर फ़ोर्स और पोस्टल गार्ड के जवान भी बाढ़ प्रभाभित लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने मे लगे हुए है। महाराष्ट्र का रामघाट गुम्बद छोड़ को कर पूरी तरह पानी में समां चुका है। महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन इस बारिश से पीड़ितो का दौरा करने सांगली निकले जरूर थे। वह NDRF की नाव में बाढ़ के बिच सेल्फी लेते नजर आये।

राजस्थान -

कहने को तो, राजस्थान की गिनती सूखे राज्यों में की जाती है, लेकिन आज राजस्थान का कई हिस्सा भी बारिश के पानी में डूबा हुआ है। यहाँ कोटा, पाली, जोधपुर इलाको में भारी बारिश के चलते पटरियां छतिग्रस्त हो गई है साथ ही बहुत से लोग बेघर हो गए है। यहाँ भी लोगों को सुरक्षित स्थान पर लेजाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।

गुजरात -

गुजरात के वडोदरा, अरवल्ली और राजकोट में बारिश के पानी ने लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। यहाँ के इलाकों में तो गले तक पानी भरा हुआ है। गुजरात राज्य में भी कई लोगों की मौत की खबर सुनने में आई है जबकि रेस्क्यू कर लगभग पांच हजार लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया दिया गया है। वडोदरा के एक इलाके में बाढ़ के द्वारा बह कर एक मगरमच्छ के अजाने से हड़कंप मच गया था।

केरल -

केरल के कुन्नूर, कोच्चि, कोझिकोड़, इडुक्की, मलप्पुरम, तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, अलप्पुझा, कोट्टायम, एर्नाकुलम, त्रिशूर समेत 8 जिलों में भारी बारिश से हाल बेहाल। केरल के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य भी पानी में डूब गए है। लोगों को रहत शिविरों तक ले जाने का कार्य जारी।

असम -

असम में लगातार बाढ़ से लगभग 36 लोगों की मृत्यु हो गई है। असम में धेमाजी, लखीमपुर, विश्वनाथ, सोनितपुर, दरांग, उदालगिरी, बक्सा, बारपेटा, नलबाड़ी, चिरांग, बोंगाईगांव, कोकराझार, धुब्री समेत 28 जिलों में बारिश और बाढ़ का प्रकोप। जिसके चलते लगभग 53,52,107 लोग प्रभावित हुए। खबरों के अनुसार, असम में 130 मवेशी बाढ़ में बह गए इसके अलावा 25 लाख से अधिक छोटे-बड़े पशु प्रभावित हुए हैं। इतना ही नहीं 23 लाख पक्षी भी प्रभावित हैं।

मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ -

मप्र के खरगोन, कुंदा, राजगढ़, सीहोर, शाजापुर, दमोह, मंडला, मक्सी, गुना, शाजापुर, मंदसौर, नीमच, टीमकगढ़, होशंगाबाद में बारिश और बाढ़ से लोगोंकी हालत ख़राब। सतना और रीवा सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए। मप्र में बारिश के चलते बिजली गिरने से 17 लोगों की मौत हो गई। दमोह के एक इलाके में मगरमच्छ सड़कों पर घूमता नजर आया जिसे मौका पाकर पकड़ लिया गया। जबलपुर के बरगी डैम के 21 में 15 के गेट खोल दिए गए है। छत्तीसगढ़ में बीजापुर, धमतरी,चमोली में भारी बारिश।

उत्तर प्रदेश -

उप्र में बलरामपुर, झंझारपुर, इलाहाबाद, मिर्ज़ापुर, वाराणसी, महोबा, बांदा में पानी का बहुत ज्यादा प्रभाव है। इसके साथ ही 60 से अधिक गांव तक पहुंचने का मार्ग बारिश के चलते ख़त्म हो गया।

उत्तराखंड -

उत्तराखंड में केदारघाटी पानी में डूबी। इसके अलावा ऋषिकेश- बद्रीनाथ हाइवे पूरा पानी में डूबा। लोगों को आने जाने में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उत्तराखंड के टिहली से 2 लोगों मृत्यु की खबर आई है।

आंध्र प्रदेश-

आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम,अनंतपुर, गुंटूर और बाढ़ प्रभावित जगहों में भारी बारिश के चलते लोगों को अपना स्थान छोड़ कर पलायन करना पड़ा। आंध्र प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी गोदावरी जिलों के कम से कम छह मंडल पानी में डूबे। आंध्र प्रदेश के कलिंगपट्टनम समुद्र तट पर पर्यटकों के लिए जानवरों और गौतम बुध की विशाल मूर्तियाँ स्थापित की गई थी, जलस्तर बढ़ने से वह सभी पानी में दुब गई। आंध्र प्रदेश की कृष्णा नदी उफान पर है। आंध्र प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी गोदावरी जिलों में 280 गांव बाढ़ से प्रभावित, जिसमे से पूर्वी गोदावरी की हालत अधिक गंभीर बताई जा रही हैं यहाँ लगभग 52,500 लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि पश्चिमी गोदावरी में 21,568 लोग प्रभावित हुए।

बाढ़ से होने वाला नुकसान :

  • यातायात के साधन का नुकसान :

भारत में भारी बाढ़ के चलते यातायात के साधन ठप पड़ गए है सड़कों पर इस कदर पानी है कि, किसी भी तरह की कोई गाड़ी चलाना नामुमकिन है। कई राज्यों में तो टेक्टर, JCB जैसी बड़ी-बड़ी गाड़ियां बाढ़ में डूबी और बहती हुई नजर आई। बाढ़ पीड़ितों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पैदल ही जाना पड़ रहा है। महंगी से महंगी लक्जरी गाड़िया भी इस बाढ़ के प्रकोप से बची नहीं है।

  • फसलों और मवेशीयों का नुकसान :

बाढ़ की चपेट में आकर कई राज्यों की फैसले ख़राब हो गई। फसलों के नुकसान के साथ ही मवेशीयों को भी काफी नुक्सान हुआ है, कितने मवेशीयों का कोई अता-पता नहीं है। हजारो की संख्या में पक्षी मारे गए। वनो में जंगली जानवर तक बारिश से प्रभावित है। कई इलाकों में तो, बाढ़ में बह कर मगरमच्छ जैसे जानवर आ गये।

  • रेलवे और हवाई प्रसासन पर प्रभाव :

भारी बारिश के कारण पटरियों पर पानी भर गया है, जिसके चलते रेलवे प्रसासन ने कई ट्रेन्स को रद्द करने का फैसला किया। इसके अलावा रनवे पर पानी भर जाने से हवाई यात्रा भी रद्द करना पड़ी। जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा।