पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर PM मोदी का संबोधन, सांसदों से की अपील
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पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर PM मोदी का संबोधन, सांसदों से की अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई दिग्गज नेताओं ने दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया। साथ ही PM मोदी ने भाजपा सांसदों को संबोधित किया।

राज एक्सप्रेस। आज यानी 11 फरवरी को पूरा देश भारतीय जनसंध के संस्थापक सदस्य पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि मना रहा है। इस दिन के खास मौके को BJP समर्पण दिवस के रूप में भी मना रही है। इस दिन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई दिग्गज नेताओ ने दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया। साथ ही PM मोदी ने भाजपा सांसदों को संबोधित किया।

PM मोदी ने भाजपा सांसदों को किया संबोधित :

बताते चलें, भारतीय जनसंध के संस्थापक सदस्य पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह सहित कई दिग्गज नेताओं ने उन्हें नामा किया। इनके अलावा गृह मंत्री अमित शाह आज असम पहुंचे और उन्होंने दीनदया उपाध्याय की पुण्यतिथि पर उनकी तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। बता दें कि, दीन दयाल उपाध्याय ने साल 1951 में भारतीय जनसंघ की नींव रखी थी। इसी मौके पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा सांसदों को संबोधित किया। उन्होंने अपने सम्बोधन में बहुत सी बातें कहीं। उन्होंने कहा कि,

'आज हम सभी दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि पर उनके चरणों में अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एकत्र हुए हैं। पहले भी अनेकों अवसर पर हमें दीनदयाल जी से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने का, विचार रखने का और अपने वरिष्ठजनों के विचार सुनने का अवसर मिलता रहा है। आप सबने दीनदयाल जी को पढ़ा भी है और उन्हीं के आदर्शों से अपने जीवन को गढ़ा भी है. इसलिए आप सब उनके विचारों से और उनके समर्पण से भलीभांति परिचित हैं। मेरा अनुभव है और आपने भी महसूस किया होगा कि, हम जैसे-जैसे दीनदयाल जी के बारे में सोचते हैं, बोलते हैं, सुनते हैं, उनके विचारों में हमें हर बार एक नवीनता का अनुभव होता है।

नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

PM मोदी ने अपने संबोधन के दौरान अनेक मुद्दों पर चर्चा की। साथ ही उन्होंने आगे कहा कि,

एकात्म मानव दर्शन का उनका विचार मानव मात्र के लिए था। इसलिए, जहां भी मानवता की सेवा का प्रश्न होगा, मानवता के कल्याण की बात होगी, दीनदयाल जी का एकात्म मानव दर्शन प्रासंगिक रहेगा। सामाजिक जीवन में एक नेता को कैसा होना चाहिए, भारत के लोकतन्त्र और मूल्यों को कैसे जीना चाहिए, दीनदयाल जी इसके भी बहुत बड़ा उदाहरण हैं। एक ओर पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारतीय राजनीति में एक नए विचार को लेकर आगे बढ़ रहे थे, वहीं दूसरी ओर, वो हर एक पार्टी, हर एक विचारधारा के नेताओं के साथ भी उतने ही सहज रहते थे। हर किसी से उनके आत्मीय संबंध थे।'
'हमारे शास्त्रों में कहा गया है- 'स्वदेशो भुवनम् त्रयम्' अर्थात, अपना देश ही हमारे लिए सब कुछ है, तीनों लोकों के बराबर है. जब हमारा देश समर्थ होगा, तभी तो हम दुनिया की सेवा कर पाएंगे। एकात्म मानव दर्शन को सार्थक कर पाएंगे। 'दीनदयाल उपाध्याय जी भी यही कहते थे। एक सबल राष्ट्र ही विश्व को योगदान दे सकता है।' यही संकल्प आज आत्मनिर्भर भारत की मूल अवधारणा है। इसी आदर्श को लेकर ही देश आत्मनिर्भरता के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।'
कोरोनाकाल में देश ने अंत्योदय की भावना को सामने रखा और अंतिम पायदान पर खड़े हर गरीब की चिंता की. आत्मनिर्भरता की शक्ति से देश ने एकात्म मानव दर्शन को भी सिद्ध किया, पूरी दुनिया को दवाएं पहुंचाईं और आज वैक्सीन पहुंचा रहा है। 1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान भारत को हथियारों के लिए विदेशी देशों पर निर्भर रहना पड़ा। दीनदयाल जी ने उस समय कहा था कि हमें एक ऐसे भारत का निर्माण करने की आवश्यकता है, जो न केवल कृषि में आत्मनिर्भर हो, बल्कि रक्षा और हथियार में भी हो। आज, भारत रक्षा क्षेत्र में मेड इन इंडिया हथियारों और लड़ाकू जेट जैसे तेजस में देखा जा रहा है।
लोकल इकॉनमी पर विजन इस बात का प्रमाण है कि उस दौर में भी उनकी सोच कितनी प्रैक्टिकल और व्यापक थी। आज ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र से देश इसी विजन को साकार कर रहा है. आज आत्मनिर्भर भारत अभियान देश के गांव-गरीब, किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग के भविष्य निर्माण का माध्यम बन रहा है। हमारी पार्टी, हमारी सरकार आज महात्मा गांधी के उन सिद्धांतों पर चल रही है जो हमें प्रेम और करुणा के पाठ पढ़ाते हैं। हमने बापू की 150वीं जन्मजयंती भी मनाई और उनके आदर्शों को अपनी राजनीति में, अपने जीवन में भी उतारा है। सरदार पटेल की दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा बनवाकर हमने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।
नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

राज्यों के विभाजन की बात करते हुए अपने संबोधन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि,

राज्यों का विभाजन जैसा काम राजनीति में कितने रिस्क का काम समझा जाता था। इसके उदाहरण भी हैं अगर कोई नया राज्य बना तो देश में कैसे हालत बन जाते थे, लेकिन जब भाजपा की सरकारों ने 3 नए राज्य बनाए तो हर कोई हमारे तौर तरीकों में दीनदयाल जी के संस्कारों का प्रभाव स्पष्ट देख सकता है।उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड का निर्माण हुआ, बिहार से झारखंड बनाया गया और छत्तीसगढ़ को मध्य प्रदेश से अलग आकार दिया गया, लेकिन उस समय हर राज्य में उत्सव का माहौल था।'

नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

विपक्षी दलों से पं मोदी का कहना :

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों की बात करते हुए उनसे कहा, 'हमारे राजनीतिक दल हो सकते हैं, हमारे विचार अलग हो सकते हैं, हम चुनाव में पूरी शक्ति से एक दूसरे के खिलाफ लड़ते हैं पर इसका मतलब ये नहीं कि हम अपने राजनीतिक विरोधी का सम्मान ना करें। प्रणब मुखर्जी, तरुण गोगोई, एस.सी.जमीर इनमें से कोई भी राजनेता हमारी पार्टी या फिर गठबंधन का हिस्सा कभी नहीं रहे, लेकिन राष्ट्र के प्रति उनके योगदान का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है। राजनीतिक अस्पृश्यता का विचार हमारा संस्कार नहीं है। आज देश भी इस विचार को अस्वीकार कर चुका है. हमारी पार्टी में वंशवाद को नहीं कार्यकर्ता को महत्व दिया जाता है।'

PM मोदी की अपील :

PM नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन के दौरान BJP कार्यकर्ताओं और देशवासियों से अपील की। उन्होंने अपील करते हुए कहा, 'आप अपने परिवार के साथ बैठें और लिस्ट बनाएं कि आप दिनभर में कितनी स्वदेशी और विदेशी चीजों का इस्तेमाल करते हैं। आप खुद भी स्वदेशी अपनाएं और लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें।'

पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन :

बतात चलें, पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को उत्तर प्रदेश के मथुरा में हुआ था। वह भारत में एक फेमस विचारक, दार्शनिक और राजनीतिक पार्टी भारतीय जनसंघ के सह-संस्थापक के तौर पर भी जाने जाते हैं। पंडित दीन दयाल अपनी शिक्षा ग्रहण करते समय ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संपर्क में आ गए थे। उन्होंने साल 1939 और 1942 में संघ की शिक्षा की ट्रेनिंग ली थी। इसके बाद वह RSS के प्रचारक बन गए और लोग उन्हें RSS प्रचारक के रूप में भी जाने गए। इसके बाद साल 1951 में दीनदयाल ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ मिलकर भारतीय जनसंघ की नींव रखी थी। इसके बाद उन्होंने अनेक कार्य किये और फिर दुर्भाग्यवश 11 फरवरी 1968 को दीनदयाल उपाध्याय ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। समावेशित विचारधारा रखने वाले दीन दयाल मजबूत और सशक्त भारत चाहते थे। साहित्य में गहरी रुचि रखने वाले दीन दयाल ने हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में कई लेख भी लिखे।

PM मोदी ने पहले ही दी थी सम्बोधन की जानकारी :

बताते चलें, पार्टी के विचारक दीन दयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर अपने सम्बोधन की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर दी थी। उन्होंने बताया था कि, 'दीन दयाल जी का जीवन और उनका मिशन हम सभी को प्रेरणा देता है। उनकी पुण्यतिथि पर 11 फरवरी को मैं भाजपा सांसदों को संबोधित करूँगा। पार्टी के पितृपुरुष कहे जाने वाले दीन दयाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी व भारतीय जन संघ के अध्यक्ष भी थे।'

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