वाराणसी में PM मोदी का कृषि कानून का विरोध करने वालों पर सीधा वार
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वाराणसी में PM मोदी का कृषि कानून का विरोध करने वालों पर सीधा वार

वाराणसी पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी और प्रयागराज के बीच 2474 करोड़ की सिक्स लेन परियोजना का लोकार्पण किया। इसके बाद अपने संबोधन में कृषि कानून सहित कई मुद्दाें पर ये बातें कहीं...

वाराणसी: कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली के मौके पर काशी में देवताओं की दिवाली का दीदार करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचे हैं। इस दौरान PM मोदी ने काशी और प्रयागराज के बीच 2474 करोड़ की सिक्स लेन परियोजना का लोकर्पण किया। इसके बाद हर-हर महादेव से PM मोदी ने अपना संबोधन शुरू किया।

PM ने दी देव दीपावली और गुरुपर्व की बधाई :

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- सभी को देव दीपावली और गुरुपर्व की ढेरों बधाईयां और शुभकामनाएं दी देव दीपावली और गुरु नानक देव जी के प्रकाश उत्सव पर आज काशी को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का एक और उपहार मिल रहा है। इसका लाभ काशी के साथ ही प्रयागराज के लोगों को भी होगा, आप सभी को बहुत-बहुत बधाई। मुझे याद है कि 2013 में मेरी पहली जनसभा इसी मैदान पर हुई थी। तब यहां से गुजरने वाला हाइवे 4 लेन का था। आज बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद से ये 6 लेन का हो गया है।

PM नरेंद्र मोदी ने कहा :

  • इस हाइवे के चौड़ा होने से काशी और प्रयागराज के बीच आना जाना और आसान हो गया है। कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ियों और इस क्षेत्र के लोगों को होने वाली परेशानियां समाप्त हो जाएंगी। इसका लाभ कुंभ के दौरान भी मिलेगा।

  • बीते वर्षों में काशी के सुंदरीकरण के साथ-साथ यहां की कनेक्टिविटी में जो काम हुआ है, उसका लाभ अब दिख रहा है। नए हाइवे बनाना हो, पुल-फ्लाई ऑवर बनाना हो, जितना काम बनारस और आस-पास के क्षेत्रों में अब हो रहा है, उतना आजादी के बाद कभी नहीं हुआ।

  • पहले उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति क्या थी, ये आप भली-भांति जानते हैं। आज उत्तर प्रदेश की पहचान एक्सप्रेस प्रदेश के रूप में हो रही है।

  • 3-4 साल पहले यूपी में सिर्फ दो बड़े एयरपोर्ट प्रभावी रूप से काम कर रहे थे। आज करीब एक दर्जन एयरपोर्ट यूपी में सेवा के लिए तैयार हो रहे हैं। वाराणसी के एयरपोर्ट के विस्तार का काम चल रहा है।

  • जब किसी क्षेत्र में आधुनिक कनेक्टिविटी का विस्तार होता है, तो इसका बहुत लाभ हमारे किसानों को होता है। बीते वर्षों में ये प्रयास हुआ है कि गांवों में आधुनिक सड़कों के साथ भंडारण, कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्थाएं खड़ी की जाएं। इसके लिए 1 लाख करोड़ रुपए का फंड भी बनाया गया है।

इतिहास में पहली बार किसान रेल शुरु की गई :

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये भी कहा- देश के इतिहास में पहली बार किसान रेल शुरु की गई है। इन प्रयासों से किसानों को नए बाजार मिल रहे हैं, बड़े शहरों तक उनकी पहुंच बढ़ रही है। उनकी आय पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। वाराणसी में पेरिशेबल कार्गो सेंटर बनने के कारण अब यहां के किसानों को अब फल और सब्जियों को स्टोर करके रखने और उन्हें आसानी से बेचने की बहुत बड़ी सुविधा मिली है। इस स्टोरेज कैपेसिटी के कारण पहली बार यहां के किसानों की उपज बड़ी मात्रा में निर्यात हो रही है।

लंदन और मिडिल-ईस्ट में खुशबू बिखेर रहा है बनारस का आम :

PM मोदी ने अपने संबोधन में कहा, ''आज बनारस का लंगड़ा और दशहरी आम लंदन और मिडिल ईस्ट में अपनी खुशबू बिखेर रहा है। अब बनारस के आम की मांग विदेशों में भी निरंतर बढ़ रही है।''

किसानों को लेकर PM ने कही ये बातें :

  • सरकार के प्रयासों औऱ आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से किसानों को कितना लाभ हो रहा है, इसका एक बेहतरीन उदाहरण चंदौली का काला चावल-ब्लैक राइस है। ये चावल चंदौली के किसानों के घरों में समृद्धि लेकर आ रहा है।

  • सामान्य चावल जहां 35-40 रुपए किलो के हिसाब से बिकता है, वहीं ये बेहतरीन चावल 300 रुपए तक बिक रहा है। बड़ी बात ये भी है कि ब्लैक राइस को विदेशी बाज़ार भी मिल गया है। पहली बार ऑस्ट्रेलिया को ये चावल निर्यात हुआ है, वो भी करीब साढ़े 800 रुपए किलो के हिसाब से।

  • भारत के कृषि उत्पाद पूरी दुनिया में मशहूर हैं। क्या किसान की इस बड़े मार्केट और ज्यादा दाम तक पहुंच नहीं होनी चाहिए? अगर कोई पुराने सिस्टम से ही लेनदेन ही ठीक समझता है तो, उस पर भी कहां रोक लगाई गई है?

  • पहले मंडी के बाहर हुए लेनदेन ही गैरकानूनी थे। ऐसे में छोटे किसानों के साथ धोखा होता था, विवाद होता था। अब छोटा किसान भी, मंडी से बाहर हुए हर सौदे को लेकर कानूनी कार्यवाही कर सकता है। किसान को अब नए विकल्प भी मिले हैं और धोखे से कानूनी संरक्षण भी मिला है।

  • सरकारें नीतियां बनाती हैं, कानून-कायदे बनाती हैं। नीतियों और कानूनों को समर्थन भी मिलता है तो कुछ सवाल भी स्वभाविक ही है। ये लोकतंत्र का हिस्सा है और भारत में ये जीवंत परंपरा रही है।

  • पहले होता ये था कि सरकार का कोई फैसला अगर किसी को पसंद नहीं आता था तो उसका विरोध होता था, लेकिन बीते कुछ समय से हम देख रहे हैं कि अब विरोध का आधार फैसला नहीं बल्कि भ्रम फैलाकर आशंकाओं को बनाया जा रहा है।

  • अपप्रचार किया जाता है कि फैसला तो ठीक है लेकिन इससे आगे चलकर ऐसा हो सकता है। जो अभी हुआ ही नहीं, जो कभी होगा ही नहीं, उसको लेकर समाज में भ्रम फैलाया जाता है। ये वही लोग हैं जिन्होंने दशकों तक किसानों के साथ लगातार छल किया है।

  • पहले MSP तो घोषित होता था लेकिन MSP पर खरीद बहुत कम की जाती थी। सालों तक MSP को लेकर छल किया गया। किसानों के नाम पर बड़े-बड़े कर्जमाफी के पैकेज घोषित किए जाते थे। लेकिन छोटे और सीमांत किसानों तक ये पहुंचते ही नहीं थे।

  • किसानों के नाम पर बड़ी-बड़ी योजनाएं घोषित होती थीं। लेकिन वो खुद मानते थे कि 1 रुपए में से सिर्फ 15 पैसे ही किसान तक पहुंचते थे।

  • हमने वादा किया था कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुकूल लागत का डेढ़ गुना MSP देंगे। ये वादा सिर्फ कागज़ों पर ही पूरा नहीं किया गया, बल्कि किसानों के बैंक खाते तक पहुंचाया है।

सिर्फ दाल की ही बात करें तो 2014 से पहले के 5 सालों में लगभग साढ़े 600 करोड़ रुपए की ही दाल किसान से खरीदी गईं। लेकिन इसके बाद के 5 सालों में हमने लगभग 49,000 करोड़ रुपए की दालें खरीदी हैं यानि लगभग 75 गुना बढ़ोतरी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

PM मोदी ने आगे ये बातें भी कही :

  • 2014 से पहले के 5 सालों में पहले की सरकार ने 2 लाख करोड़ रुपए का धान खरीदा था। लेकिन इसके बाद के 5 सालों में 5 लाख करोड़ रुपए धान के MSP के रूप में किसानों तक हमने पहुंचाए हैं। यानि लगभग ढाई गुना ज्यादा पैसा किसान के पास पहुंचा है।

  • अब आप ही बताइए कि, अगर मंडियों और MSP को ही हटाना था, तो इनको ताकत देने के लिए, इन पर इतना निवेश ही क्यों करते? हमारी सरकार तो मंडियों को आधुनिक बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है।

  • आपको याद रखना है, यही लोग हैं जो पीएम किसान सम्मान निधि को लेकर ये लोग सवाल उठाते थे। ये अफवाह फैलाते थे कि ये मोदी है इसलिए ये चुनाव को देखते हुए 2 हजार रूपये दिया जा रहा है और चुनाव के बाद इस पैसे को ब्याज सहित वापस देना पड़ेगा।

  • एक राज्य में तो वहां की सरकार, अपने राजनीतिक स्वार्थ के चलते आज भी किसानों को इस योजना का लाभ नहीं लेने दे रही है। देश के 10 करोड़ से ज्यादा किसान परिवारों के बैंक खाते में सीधी मदद दी जा रही है। अब तक लगभग 1 लाख करोड़ रुपए किसानों तक पहुंच भी चुका है।

  • मुझे ऐहसास है कि दशकों का छलावा किसानों को आशंकित करता है, लेकिन अब छल से नहीं गंगाजल जैसी पवित्र नीयत के साथ काम किया जा रहा है।

  • वादों को जमीन पर उतारने के इसी ट्रैक रिकॉर्ड के बल पर किसानों के हित में नए किसान सुधार कानून लाये गए हैं। किसानों को न्याय दिलाने में ये कितने काम आ रहे हैं, ये आने वाले दिनों में हम जरूर अनुभव करेंगे। मुझे विश्वास है कि मीडिया में भी इसकी सकारात्मक चर्चाएं होंगी।

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