पुणे में PM मोदी ने जगद्गुरु श्री संत तुकाराम महाराज मंदिर का किया उद्घाटन
PM मोदी ने जगद्गुरु श्री संत तुकाराम महाराज मंदिर का किया उद्घाटनSocial Media

पुणे में PM मोदी ने जगद्गुरु श्री संत तुकाराम महाराज मंदिर का किया उद्घाटन

महाराष्‍ट्र में पुणे के देहू में PM मोदी जगद्गुरु श्री संत तुकाराम महाराज मंदिर का उद्घाटन किया और दिया यह खास संबोधन...

महाराष्‍ट्र, भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज महाराष्‍ट्र में है, इस दौरान उन्‍होंने पुणे के देहू में जगद्गुरु श्री संत तुकाराम महाराज मंदिर का उद्घाटन किया।

मनुष्य जन्म में सबसे दुर्लभ संतों का सत्संग है :

जगद्गुरु श्री संत तुकाराम महाराज मंदिर के उद्घाट के अवसर पर PM मोदी ने कहा- हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि मनुष्य जन्म में सबसे दुर्लभ संतों का सत्संग है। संतों की कृपा अनुभूति हो गई, तो ईश्वर की अनुभूति अपने आप हो जाती है। आज देहू की इस पवित्र तीर्थ-भूमि पर आकर मुझे ऐसी ही अनुभूति हो रही है। अभी कुछ महीनें पहले ही मुझे पालकी मार्ग में 2 राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन करने के लिए शिलान्यास का अवसर मिला था। श्री संत ज्ञानेश्वर महाराज पालकी मार्ग का निर्माण 5 चरणों में होगा और संत तुकाराम पालकी मार्ग का निर्माण 3 चरणों में पूरा किया जाएगा।

देहू का शिला मंदिर न केवल भक्ति की शक्ति का एक केंद्र है, बल्कि भारत के सांस्कृतिक भविष्य को भी प्रशस्त करता है। इस पवित्र स्थान का पुनर्निमाण करने के लिए मैं मंदिर न्यास और सभी भक्तों का आभार व्यक्त करता हूं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

  • भारत शाश्वत है, क्योंकि भारत संतों की धरती है। हर युग में हमारे यहां, देश और समाज को दिशा देने के लिए कोई न कोई महान आत्मा अवतरित होती रही है। आज देश संत कबीरदास की जयंती मना रहा है।

  • संत तुकाराम जी की दया, करुणा और सेवा का वो बोध उनके ‘अभंगों’ के रूप आज भी हमारे पास है। इन अभंगों ने हमारी पीढ़ियों को प्रेरणा दी है। जो भंग नहीं होता, जो समय के साथ शाश्वत और प्रासंगिक रहता है, वही तो अभंग होता है।

  • संत तुकाराम जी कहते थे कि समाज में ऊंच नीच का भेदभाव बहुत बड़ा पाप है। उनका ये उपदेश जितना जरुरी भगवतभक्ति के लिए है, उतना ही महत्वपूर्ण राष्ट्रभक्ति और समाजभक्ति के लिए भी है।

  • आज देश सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास के मंत्र पर चल रहा है। सरकार की हर योजना का लाभ हर किसी को बिना भेदभाव के मिल रहा है।

  • छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे राष्ट्रनायक के जीवन में भी तुकाराम जी जैसे संतों ने बड़ी अहम भूमिका निभाई। आजादी की लड़ाई में वीर सावरकर जी को जब सजा हुई, तब जेल में वो हथकड़ियों को चिपली जैसा बजाते हुए तुकाराम जी के अभंग गाते थे।

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