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PM मोदी ने शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं के साथ की बातचीत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं के साथ बातचीत की। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह बातें कहीं...

दिल्ली, भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 5 सितंबर को शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं के साथ बातचीत की।

राधाकृष्णन जी को उनके जन्म दिवस पर आदरांजली दे रहा है :

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- देश आज भारत के पूर्व राष्ट्रपति और शिक्षाविद डॉ. राधाकृष्णन जी को उनके जन्म दिवस पर आदरांजली दे रहा है। ये हमारा सौभाग्य है कि हमारे वर्तमान राष्ट्रपति भी शिक्षक हैं। उनका जीवन का प्रारंभिक काल शिक्षक के रूप में बीता। आज जब देश आजादी के अमृतकाल के अपने विराट सपनों को साकार करने में जुट चुका है, तब शिक्षा के क्षेत्र में राधाकृष्णन जी के प्रयास हम सभी को प्रेरित करते हैं। इस अवसर पर मैं राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त सभी शिक्षकों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

देश भी आज नए सपने, नए संकल्प लेकर एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है कि आज जो पीढ़ी है, जो विद्यार्थी अवस्था में हैं, 2047 में हिंदुस्तान कैसा बनेगा ये उन्हीं पर निर्भर होने वाला है। उनका जीवन आप शिक्षकों के हाथ में है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाने में हमारे टीचर्स का बहुत बड़ा रोल रहा है :

आगे उन्होंने यह भी बताया कि, "2047 में देश गढ़ने का काम आज जो वर्तमान में शिक्षक हैं, आने वाले 10-20 साल तक जो सेवाएं देने वाले हैं, उनके हाथ में है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाने में हमारे टीचर्स का बहुत बड़ा रोल रहा है। लाखों की तादात में हमारे शिक्षकों ने इसे बनाने में अपना योगदान दिया है।"

  • 250 वर्ष तक जो हम पर राज करके गए, उनको पीछे छोड़कर हम दुनिया की इकोनामी में आगे निकल गए हैं।

  • दुनिया की इकोनामी में छठे स्थान से पांचवे स्थान में आने से ज्यादा आनंद उन्हें पीछे छोड़ने में आया है।

  • ऐसा नहीं है कि, शिक्षक का काम सिर्फ क्लास लेना या स्कूल की नौकरी करना ही हो। शिक्षक का काम विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करना है। शिक्षक का कर्तव्य उनका जीवन स्तर सुधारने और उन्हें एक बेहतर नागरिक बनाना भी है। इसके लिए हमें बच्चों से जुड़ाव स्थापित करना होगा। इसी जुड़ाव से भविष्य के नेतृत्वकर्ता तैयार होंगे।

  • छात्रों के मन की दुविधाओं को दूर करने का काम शिक्षक ही सबसे बेहतर तरीके से कर सकते हैं। शिक्षक होने के नाते हमें विद्यार्थियों से क्लासरूम ही नहीं बल्कि उनके घर तक संपर्क स्थापित करना चाहिए। उनकी पारिवारिक स्थिति के अनुसार, उन्हें सुझाव देने चाहिए।

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