पुस्तक मेले के उद्घाटन में PM मोदी
पुस्तक मेले के उद्घाटन में PM मोदी Social Media

नवभारत साहित्य मंदिर द्वारा आयोजित पुस्तक मेले के उद्घाटन में PM मोदी, जानें क्‍या दिया संदेश

PM मोदी ने कहा, अहमदाबाद में पुस्तक मेले की जो परंपरा शुरू की है ये समय के साथ और ज्यादा समृद्ध होती जा रही है, जिसके जरिए गुजरात के साहित्य और ज्ञान का विस्तार हो रहा है।

दिल्ली, भारत। अहमदाबाद में 'नवभारत साहित्य मंदिर' द्वारा आयोजित पुस्तक मेले के उद्घाटन के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो काॅॅन्‍फ्रेंसिंग के माध्‍यम से शामिल हुए।

पुस्तक और ग्रंथ दोनों हमारी विद्या, उपासना के मूल तत्व हैं :

इस दौरान अहमदाबाद में 'नवभारत साहित्य मंदिर' द्वारा आयोजित पुस्तक मेले के उद्घाटन में PM मोदी ने अपना संदेश दिया और कहा- पुस्तक और ग्रंथ ये दोनों हमारी विद्या, उपासना के मूल तत्व हैं। जब मैं गुजरात में आप सबके बीच था, तब गुजरात ने भी ‘वांचे गुजरात’ अभियान शुरू किया था। आज ‘कलम नो कार्निवल’ जैसे अभियान गुजरात के उस संकल्प को आगे बढ़ा रहे हैं। हम स्वतंत्रता संग्राम की भूली-बिसरी कहानियों को सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं; और पुस्तक मेलों का आयोजन हमेशा ऐसा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

किताबें पढ़ने से व्यक्ति को जीवन में नए विचार उत्पन्न करने में मदद मिलती है। आइए पढ़ने की आदत डालें। चाहे किताबें हों या शास्त्र; ऑनलाइन या ऑफलाइन; विधा या प्रकार जो भी हो, अवश्य पढ़ें!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

  • अहमदाबाद में पुस्तक मेले की जो परंपरा शुरू की है, ये समय के साथ और ज्यादा समृद्ध होती जा रही है, जिसके जरिए गुजरात के साहित्य और ज्ञान का विस्तार हो रहा है। इसके साथ ही नए युवा साहित्यकारों, लेखकों को भी एक मंच मिल रहा है।

  • जब मैं गुजरात में आप सबके बीच था, तब गुजरात ने भी ‘वांचे गुजरात’ अभियान शुरू किया था। आज ‘कलम नो कार्निवल’ जैसे अभियान गुजरात के उस संकल्प को आगे बढ़ा रहे हैं। गुजरात में पुस्तकालयों की तो बहुत पुरानी परंपरा रही है

  • इस वर्ष ये पुस्तक मेला एक ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब देश अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। अमृत महोत्सव का एक आयाम ये भी है कि हम हमारी आजादी की लड़ाई के इतिहास को कैसे पुनर्जीवित करें।

  • ‘कलम नो कार्निवल’ जैसे आयोजन देश के इस अभियान को गति दे सकते हैं। पुस्तक मेले में आजादी की लड़ाई से जुड़ी किताबों को विशेष महत्व दिया जा सकता है। मुझे विश्वास है ये आयोजन इस दिशा में एक सकारात्मक माध्यम साबित होगा

  • आज इंटरनेट के जमाने में ये सोच हावी होती जा रही है कि जब जरूरत होगी तो इंटरनेट की मदद ले लेंगे। तकनीक हमारे लिए निःसन्देह जानकारी का एक महत्वपूर्ण जरिया है, लेकिन वो किताबों को, किताबों के अध्ययन को रिप्लेस करने का तरीका नहीं है

ताज़ा ख़बर पढ़ने के लिए आप हमारे टेलीग्राम चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। @rajexpresshindi के नाम से सर्च करें टेलीग्राम पर।

Related Stories

No stories found.
| Raj Express | Top Hindi News, Trending, Latest Viral News, Breaking News
www.rajexpress.co