भारत-जापान संवाद सम्मेलन को संबोधित कर PM मोदी ने दिया ये खास संदेश
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भारत-जापान संवाद सम्मेलन को संबोधित कर PM मोदी ने दिया ये खास संदेश

भारत-जापान संवाद सम्मेलन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। इस दौरान उन्‍होंने पारंपरिक बौद्ध साहित्य के लिए पुस्तकालय के निर्माण का सुझाव दिया...

दिल्‍ली, भारत। देश में महामारी कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हर कार्यक्रम डिजिटल माध्यम से हो रहा है। इसी बीच आज 21 दिसंबर को भारत-जापान के संबंधों को मजबूत करने के लिए छठवें भारत-जापान संवाद का आयोजन हुआ, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अपने संदेश में विश्व को भगवान बुद्ध के विचारों को अपनाने का सुझाव दिया।

जापान सरकार का PM ने दिया धन्यवाद :

भारत-जापान संवाद सम्मेलन में अपने संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि, "मैं भारत-जापान संवाद को निरंतर समर्थन देने के लिए जापान सरकार का धन्यवाद करना चाहूंगा। '' साथ ही प्रधानमंत्री ने एक पारंपरिक बौद्ध साहित्य के पुस्तकालय और शास्त्रों के निर्माण का प्रस्ताव दिया और कहा कि, ''यदि ऐसा पुस्तकालय भारत में बनता है तो यह हमारे लिए खुशी की बात होगी।"

इस मंच ने भगवान बुद्ध के विचारों और आदर्शों को खासकर युवाओं में बढ़ावा देने के लिए बहुत काम किया है। ऐतिहासिक रूप से भारत से दुनिया के कई हिस्सों में फैली बुद्ध के संदेश की रोशनी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री के संबोधन की मुख्य बातें

  • हमें अपनी नीतियों के मूल में मानवतावाद को रखना चाहिए। हमें अपने अस्तित्व के केंद्रीय स्तंभ के रूप में प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व बनाना चाहिए।

  • अतीत में मानवता ने अक्सर सहयोग के बजाय टकराव का रास्ता अपनाया। साम्राज्यवाद से लेकर विश्व युद्ध तक। हथियारों की दौड़ से लेकर अंतरिक्ष की दौड़ तक। हमारे पास संवाद थे, लेकिन वे दूसरों को नीचे खींचने के उद्देश्य से थे। अब चलिए एक साथ उठते हैं।

  • वैश्विक विकास पर चर्चा केवल कुछ के बीच नहीं हो सकती है। टेबल बड़ा होना चाहिए। एजेंडा व्यापक होना चाहिए। ग्रोथ पैटर्न को मानव-केंद्रित दृष्टिकोण का पालन करना चाहिए और हमारे परिवेश के अनुरूप हो।

  • हमारे आज के कार्य आने वाले समय में प्रवचन को आकार देंगे। यह दशक उन समाजों का होगा जो एक साथ सीखने और नवाचार करने के लिए एक प्रीमियम रखते हैं। यह उज्ज्वल युवा दिमागों के पोषण के बारे में होगा जो आने वाले समय में मानवता के लिए मूल्यों को जोड़ देगा।

  • इसके अनुसंधान जनादेश में यह जांचना भी शामिल होगा कि बुद्ध का संदेश समकालीन चुनौतियों के खिलाफ हमारी आधुनिक दुनिया को कैसे निर्देशित कर सकता है।

  • पुस्तकालय न केवल साहित्य का एक भंडार होगा। यह शोध और संवाद का भी एक मंच होगा- मनुष्य के बीच, समाजों के बीच और मनुष्यों और प्रकृति के बीच एक सच्चा संवाद।

  • पुस्तकालय विभिन्न देशों के ऐसे सभी बौद्ध साहित्य की डिजिटल प्रतियां एकत्र करेगा। इसका उद्देश्य उनका अनुवाद करना होगा और उन्हें बौद्ध धर्म के सभी भिक्षुओं और विद्वानों के लिए स्वतंत्र रूप से उपलब्ध कराना होगा।

  • आज, मैं एक पारंपरिक बौद्ध साहित्य के पुस्तकालय और शास्त्रों के निर्माण का प्रस्ताव करना चाहूंगा। हम भारत में इस तरह की सुविधा बनाने से प्रसन्न होंगे और इसके लिए उपयुक्त संसाधन उपलब्ध कराएंगे।

  • इस यात्रा में संवाद अपने मूल उद्देश्यों के लिए सही रहा है जिसमें शामिल हैं। संवाद और बहस को प्रोत्साहित करना। हमारे साझा मूल्यों को उजागर करना। आध्यात्मिक और विद्वानों के आदान-प्रदान की हमारी प्राचीन परंपरा को आगे बढ़ाना।

बता दें कि, आज भारत-जापान सम्मेलन के बाद पीएम मोदी शाम को 4.30 बजे वियतनाम के प्रधानमंत्री गुयेन जुआन फुक के साथ भी डिजिटल सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

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