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नारी गरिमा की रक्षा ?
नारी गरिमा की रक्षा ?|Syed Dabeer Hussain - RE
भारत

नारी गरिमा की बात करने वाली पार्टी में ही हैं, दोहरे चेहरे

महिलाओं के सम्मान में जहां बीजेपी के कई नेता उच्च विचार रखते हैं, वहीं उसी पार्टी के कुछ नेता हैं जो कि महिलाओं की इज्जत के साथ खिलवाड़ भी करते हैं।

Megha Sinha

राज एक्सप्रेस: 17 सितंबर को दिल्ली के कामिनी ऑडिटॉरियम में शुरू हुए रामायण महोत्सव का आज समापन होने वाला है, 18 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में इस महोत्सव का उद्घाटन किया था। बीजेपी के वरिष्ठ नेता अमित शाह ने हिंन्दू महाकाव्य रामायण को संबोधित करते हुए कई प्रेरणादायक बातें की, जिसमें उन्होंने कहा कि रामायण में सभी समस्याओं का सामाधान मौजूद है।

अमित शाह ने रामायण का उल्लेख करते हुए कहा कि रामायण कहती है कि "अगर किसी स्त्री के सम्मान की रक्षा के लिए यदि युद्ध भी लड़ना पड़े तो बेहिचक लड़ा जाए"। उन्होंने कहा कि ‘मैं सभी को एक बार रामायण पढ़ने के लिए कहना चाहता हूं”। यदि वे ऐसा करते हैं, तो वे अपनी व्यक्तिगत, सामाजिक और राष्ट्रीय समस्याओं का समाधान पा सकते हैं। सभी सांसारिक समस्याओं का समाधान इस महाकाव्य में मौजूद हैं।

अगर हम गौर करें, रामायण के उल्लेख में कही गयीं, अमित शाह की बातों पर तो ये बात वाकई दिल को छूने वाली हैं कि अगर कोई भी व्यक्ति किसी भी महिला के सम्मान को ठेस पहुंचाने की कोशिश करेगा तो उसके लिए युद्ध करने की भी जरूरत पड़े तो जरूर करना चाहिए। परंतु जो देश के हालात हैं महिलाओं को लेकर वो अमित शाह के रामायण उल्लेखनीय वाक्य से बिल्कुल ही विपरीत हैं।

जहां एक तरफ भाजपा के वरिष्ठ नेता महिला के सम्मान के लिए युद्ध लड़ने की बात करते हैं, नारी सशक्तिकरण की बात करते हैं वहीं दूसरी तरफ उसी पार्टी में कुछ नेता ऐसे भी हैं जो महिलाओं को बुरी तरह से प्रताड़ित करते हैं। मैं बात कर रही हूं 2017 में हुए उन्नाव रेप केस और हाल ही मैं हुए स्वामी चिन्मयानंद केस की जिसमें भाजपा के जाने माने नेता शामिल हैं।

वहीं कठुआ केस में भी 8 साल की बच्ची के साथ रेप की भयानक दास्तां ने पूरे देश में तहलका मचा दिया था। जिसमें आरोपी मंदिर के पुजारी को बचाने के लिए बीजेपी के ही कई नेताओं ने इस लिए रैली निकाली थी कि बलात्कारी एक पंडित है और पंडित के खिलाफ कार्रवाई कैसे हो सकती है?

कई नेताओं के कहे गये उल्लेखनीय कथनों को अगर देश की समस्याओं से जोड़ा जाए तो परिणाम ज्यादातर विपरीत ही निकलता है, महिला के सम्मान में युद्ध छेड़ना तो दूर की बात है, महिलाओं को इंसाफ के लिए कितनी गुहार लगानी पड़ती है, कभी-कभी जान से भी हाथ धोना पड़ता है, इसी के परिणाम है ये केसेस जिनमें बीजेपी के कुछ नेताओं ने अपनी दबंगई से सारी हदें पार की हैं।

1. स्वामी चिन्मयानंद केस

कौन है चिन्मयानंद.

- बीजेपी के पूर्व सांसद स्वामी चिन्मयानंद अटल बीहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री रह चुके हैं और अभी मुमुक्षु आश्रम के मुख्य हैं।

- शाहजहांपुर में उनका आश्रम है और ये बीजेपी के बड़े दबदबे वाले नेताओं की लिस्ट में भी शामिल हैं।

- स्वामी पर लॉ कॉलेज की एक छात्र ने रेप का इल्जाम लगाया है। छात्रा चिन्मयानंद के ही कॉलेज में पढ़ती उनकी स्टूडेंट है।

स्वामी पर है छात्रा से शोषण के आरोप

- अगस्त में छात्रा ने एक वीडियो पोस्ट कर बीजेपी के बड़े नेता चिन्मयानंद के खिलाफ शोषण और उसे धमकाने का आरोप लगाया है।

- पीड़िता ने साथ में अन्य कई लड़कियों के शोषण का आरोप स्वामी पर लगाया है। वहीं बीते बुधवार को इस मामले में एक वीडियो वायरल होने के बाद एक नया मोड़ आया, जिसमें कथित तौर पर स्वामी चिन्मयानंद किसी लड़की से मसाज कराते और मोबाइल फ़ोन पर कुछ टाइप करते दिख रहे थे।

- पीड़िता ने कहा था कि, वह बहुत पॉवरफुल हैं। वह संन्यासी, पुलिस और डीएम सबको अपनी जेब में रखता है, धमकी देता है कि कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। योगी जी प्लीज मेरी मदद कीजिए, मुझे इंसाफ दिलाएं।

- जबकि यूपी पुलिस स्वामी चिन्मयानंद को पूरी तरह से निर्दोष साबित करने की तैयारी में लग चुकी थी। वहीं पीड़िता ने ये बयान दिया था कि उसे यूपी पुलिस पर भरोसा नहीं है जिसके बाद मामले को लेकर केस के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की देखरेख में ऐसआईटी जांच बुलायी गयी।

- ऐसा नहीं है कि इस स्वामी पर पहली बार शोषण का आरोप लगा, ये महाशय पहले भी इस तरह की सुर्खियां बटोर चुके हैं। आठ साल पहले भी स्वामी के आश्रम की एक महिला ने शोषण के आरोपों में मुकदमा दर्ज करवाया था लेकिन राज्य में बीजेपी सरकार आने के बाद मुकदमा वापिस ले लिया गया था।

- वहीं कुछ दिन पहले जब इनकी वीडियो वायरल हुई थी तो बीजेपी में भूचाल जैसी स्थिति बन गयी थी। कहा तो ऐसा भी जाता है कि योगी सरकार में स्वामी की खूब चलती है। इसलिए किसी भी केस को लेकर किसी भी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है और स्वामी का बाल भी बांका नहीं हो पाता।

- सबसे ताज्जुब की बात तो यह है कि, अभी भी स्वामी चिन्मयानंद पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, जबकि पीड़िता ने अब आत्महत्या करने की भी धमकी दे दी है। समझ नहीं आता कि क्या कहा जाए, लेकिन असल बात तो यह है कि सामने सब कुछ है लेकिन हम गांधी जी के तीन बंदरों की तरह आंख, कान, मुंह सब बंद करके बैठ गए हैं।

2. उन्नाव रेप केस

- उत्तर प्रदेश राज्य के उन्नाव शहर में 4 जून 2017 को 17 वर्षीय लड़की का सामूहिक बलात्कार हुआ था।

- बलात्कार मामले में बीजेपी नेता कुलदीप सिंह सेंगर का नाम आया था। बाद में अप्रैल 2018 में बलात्कार के मामले में कुलदीप सेंगर को गिरफ्तार किया गया था।

- जिसके बाद तफ्तीश हुई और तफ्तीश के दौरान यूपी पुलिस ने पीड़िता के पिता को जबरन अंदर कर लिया और न्यायिक हिरासत में पीड़िता के पिता की दर्दनाक मौत हो गयी।

- वहीं केंन्द्रीय जांच ब्यूरो ने 11 जुलाई 2018 को कुलदीप सेंगर के खिलाफ चार्ज शीट दायर हुई।

- 13 जुलाई 2018 को दूसरी चार्ज शीट सेंगर के भाई, तीन पुलिसकर्मी और पांच अन्य लोगों पर दायर की गयी, क्योंकि क्सटडी में पिता की भी मौत हुई थी। जिन्हें इन्हीं लोगों ने मारा था।

- लेकिन वहीं सेंगर के जेल में होने के बाद भी 28 जुलाई 2019 को रेप पीड़िता और उसके परिवार पर ट्रक से हमला करवाया गया जिसमें पीड़िता के परिवार के दो सदस्यों की मौत हो गयी। रिपोर्ट्स के मुताबिक सेंगर ने जेल में रहकर ही पीड़िता और उसके परिवार को ट्रक से उड़वा दिया।

- साल 2017 का केस और पुलिस की तफ्तीश, साल 2019 में न्यायिक हिरासत में रहकर भी पीड़िता के परिवार को इस नेता द्वारा खत्म करवा दिया गया। इस बीच पीड़िता और उसके परिवार को न जाने कितनी धमकी मिलती रहीं और आखिरकार बच गयी बस पीड़िता।

- पिछले साल जब सेंगर को गिरफ्तारी किया गया था तो उसे बीजेपी से सिर्फ निलंबित किया गया था। वहीं 2 साल बाद बीजेपी नींद से जागी और आखिरकार शायद दबाव में आकर ही सेंगर को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया।

- अगर ये कदम पहले उठाया गया होता तो शायद पीड़िता को अपने परिवार से हाथ नहीं धोना पड़ता। जबकि पीड़िता बार-बार ये कहती आ रही थी कि उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी मिल रही हैं।

ये अच्छी बात है कि एक तरफ बीजेपी के वरिष्ठ नेता अमित शाह नारी गरिमा को लेकर ऐसा उच्च विचार रखते हैं। महिलाओं के सम्मान के लिए युद्ध की बात करते हैं, रामायण के उपदेशों को अपनाने की बात करते हैं। लेकिन वहीं दूसरी तरफ उसी पार्टी के नेता महिलाओं के साथ खिलवाड़ भी करते हैं। मेरा विचार किसी एक सिस्टम पर सवाल उठाना नहीं है लेकिन नेता जो बोलते हैं, देश में जो होता है, देश के जो हालात हैं, वो सब एक दूसरे के विपरीत क्यों हैं। चाहे महिला संबंधित अपराध हो या देश में हो रहे अन्य कोई भी अपराध किसी भी चीज पर ऐसे लगाम लगाने की कोशिश नहीं की जाती है कि उस चीज को ही जड़ से खत्म करने की पहल हो सके। माना कि पूरी तरह से खत्म नहीं कर सकते पर पहल तो कर सकते हैं।

महिलाओं के सम्मान में जहां बीजेपी के कई नेता उच्च विचार रखते वहीं उसी पार्टी के कुछ नेता महिलाओं की इज्जत के साथ खिलवार भी करते हैं।

वहीं रामायण में बताए गए महत्वपूर्ण कथनों में से एक कथन है-

बिन पानी के बादलों के गरजने से बरसात नहीं होती। सच्चे वीर और पहलवान फालतू में नहीं दहाड़ते, वे युद्ध में अपना शौर्य दिखाते हैं।

डिस्क्लेमर: इस लेख के भीतर व्यक्त की गई राय लेखक की निजी राय हैं। लेख में दिखाई देने वाले तथ्य और राय राज एक्सप्रेस के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं और राज एक्सप्रेस किसी भी जिम्मेदारी या दायित्व को स्वीकार नहीं करता है।