RGUHS के 23वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति कोविंद का संबोधन
RGUHS के 23वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति कोविंद का संबोधनPriyanka Sahu -RE

RGUHS के 23वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति कोविंद का संबोधन

बेंगलुरु में RGUHS के 23वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति बोले-राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय ने डॉक्टरों, नर्सों और प्रशासकों सहित 2 लाख स्वास्थ्य पेशेवरों को प्रशिक्षित किया।

कर्नाटक, भारत। देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इन दिनों कर्नाटक के दौरे पर है, इस दौरान आज 7 फरवरी को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (RGUHS) के 23 वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में शामिल हुए।

राष्ट्रपति ने छात्रों को दी डिग्री :

बेंगलुरु में राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के 23वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अलावा इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा भी मौजूद रहे। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने छात्रों को डिग्री प्रदान की। तो वहीं, राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के 23वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित कर कहा- कोविड -19 ने दुनिया भर में अभूतपूर्व स्तर की पीड़ा और दुख को जन्म दिया है। हमें अपने डॉक्टरों और पैरामेडिक्स पर गर्व है, जो चुनौती के लिए उठे, भले ही इसका उनके अपने जीवन के लिए बहुत बड़ा खतरा हो।

मुझे यह जानकर खुशी हुई कि राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय ने डॉक्टरों, नर्सों और प्रशासकों सहित 2 लाख स्वास्थ्य पेशेवरों को प्रशिक्षित किया है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

भारत में इतिहास का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान :

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संबोधन में ये बात भी कही कि, ''हमारे राष्ट्र ने न केवल वैक्सीन का निर्माण किया है, बल्कि अन्य देशों में भी इसे उपलब्ध कराने के लिए पहुंच गए हैं। भारत में इतिहास का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चल रहा है। भारत में हेल्थकेयर डिलीवरी सभी चरणों - रोकथाम, निदान और उपचार में बदलाव से गुजरने के लिए तैयार है। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की कोई भी इकाई परिणाम नहीं दे सकती है और परिणाम प्राप्त कर सकती है।''

कोविड-19 एक तरह का स्वास्थ्य-संकट :

आगे उन्‍होंने कहा- कोविड-19 एक तरह का स्वास्थ्य-संकट है जो शायद ही कभी होता है, वैज्ञानिकों के एक वर्ग ने हमें आगे भी इसी तरह की चुनौतियों के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी है। दुनिया ने हमें आशा दी है कि हम सही सबक सीखें। महामारी ने दुनिया को सिखाया है कि, यदि कोई व्यक्ति खतरे में है तो वह सुरक्षित नहीं हो सकता। यह सार्वभौमिक भाईचारे का सबक है।

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