RE Exclusive: NIC की वेबसाइट पर क्यों गायब है अपना एमपी?
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र की सारथी वेबसाइट पर ड्राइविंग लाइसेंस के मामले में एमपी की खोज फिलहाल असंभव है।Syed Dabeer Hussain - RE

RE Exclusive: NIC की वेबसाइट पर क्यों गायब है अपना एमपी?

आप मध्य प्रदेश के नागरिक हैं और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र की सारथी वेबसाइट पर लाइसेंस का विवरण तलाश रहे हैं; तो वो आपको वहां नहीं मिलेगा!

हाइलाइट्स –

  • अता-पता, लापता

  • DL का पता लगाना असंभव

  • दर्ज संपर्क नंबर निकले गलत!

राज एक्सप्रेस। अगर आप मध्य प्रदेश के नागरिक हैं और नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी/NIC) यानी राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र की वेबसाइट पर लाइसेंस का विवरण तलाश रहे हों तो वह आपको वहां नहीं मिलेगा! कारण क्या है?, फिर वह कहां मिलेगा? पड़ताल में जानिये इन सारे सवालों के जवाब।

सारे सवालों के जवाब के लिए पहले हमें एनआईसी क्या है और यह कैसे और क्या काम करता है? इस बारे में तफ़सील से समझना होगा। दरअसल राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र भारत के सूचना-समंक संग्रहण, वितरण, नियंत्रण की वो केंद्रीयकृत इकाई है जिससे भारत के तमाम विभागों के कामकाज अधिकृत रूप से ऑनलाइन तरीके से होते हैं।

ये एनआईसी है क्या? –

राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC), भारत सरकार की प्रमुख सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, जिसे आम तौर पर आईसीटी (ICT) के तौर पर जाना जाता है की आधिकारिक वेबसाइट है। एनआईसी की वेबसाइट पर मुख्यालय, राज्य और जिला इकाइयों से हासिल विभिन्न परियोजनाओं, उत्पादों, सेवाओं के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है।

वेबसाइट की सामग्री एनआईसी मुख्यालय, भारत के राज्यों और जिला इकाइयों के सहयोगात्मक प्रयास का परिणाम है। वेबसाइट में उल्लेख है कि “हमारा प्रयास है कि नियमित रूप से अपनी सामग्री, कवरेज, डिजाइन और प्रौद्योगिकी के मामले में इस साइट की वृद्धि और संवर्धन जारी रखें।”

अब आते हैं लाइसेंस पर –

एनआईसी ने अन्य विभागों की अलग वेबसाइट की ही तरह परिवहन विभाग की भी एक अलग वेबसाइट बनाई है। इस वेबसाइट पर वाहन चालकों/मालिकों के लिए लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन, चालान संबंधी प्रक्रियाओं के ऑनलाइन निपटारे/सहारे की व्यवस्था है।

मोटर वाहन अधिनियम –

दरअसल एक सितंबर 2019 से नया मोटर वाहन अधिनियम-2019 पूरे देश में लागू हो चुका है। इस प्रक्रिया में देश के वाहन चालकों व मालिकों के ड्राइविंग लाइसेंस (DL) और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) संबंधी नियमों में भी जरूरी बदलाव किए गए हैं। जो बदलाव लागू हुए इसकी जानकारी बहुत कम लोगों को है।

आगाज दिल्ली/गुजरात से -

पहले दिल्ली और गुजरात में ड्राइविंग लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (DL/RC) को मोबाइल से लिंक कराना अनिवार्य किया गया। इसके बाद यूपी-बिहार समेत इसे संपूर्ण भारत में लागू करने का प्लान बना। यह सारी बातें आपको बताने का मकसद यह है कि आप सरलता और पेचीदगियों के अंतर को समझ सकें।

मोबाइल से कैसे लिकं करायें –

DL/RC को मोबाइल नंबर से जोड़ने की दशा में नियमानुसार एक मोबाइल नंबर पर अधिकतम पांच वाहन ही रजिस्टर हो सकते हैं। प्राथमिक तौर पर रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO/आरटीओ) यानी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से मोबाइल नंबर को दस्तावेजों से लिंक कराया जा सकता है।

खुद कैसे करें लिंक -

वाहन चालक/मालिक खुद भी ऑनलाइन अपने मोबाइल नंबर को लिंक कर सकते हैं। ऑनलाइन प्रोसेस के लिए संबंधित आवेदक को केंद्र सरकार के सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के परिवहन सेवा लिंक https://parivahan.gov.in पर क्लिक करना होगा।

https://sarathi.parivahan.gov.in/sarathiservice1/stateSelection.do. पर ड्राइविंग लाइसेंस संबंधित सेवा के लिए क्लिक कर जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

सेवा लेने के लिए -

इस वेबसाइट पर पंजीकरण जैसी सेवाओं के बारे में जानकारी दर्ज कराने के लिए संबंधित को सबसे पहले लॉग इन करने के लिए आईडी बनानी होगी। इसके बाद वाहन कैटेगरी में पंजीकरण संबंधी सेवाएं विकल्प के जरिये जरूरी जानकारियों को अपडेट किया जा सकता है।

किस बात की जानकारी –

वाहन के पंजीकरण सर्टिफिकेट में मोबाइल नंबर को शामिल करने के लिए आवेदक को वाहन पंजीकरण संख्या, इंजन और चेसिस नंबर की जानकारी प्रदान करना होगी। केंद्र सरकार का पंजीकरण संबंधी सेवाओं के लिए तैयार किया गया वाहन एप्लिकेशन भी एक अन्य विकल्प है।

सारथी पर DL का काम -

ड्राइविंग लाइसेंस में मोबाइल नंबर लिंक करने के लिए सारथी वेबसाइट मददगार है। भारत में केंद्रीयकृत तौर पर सारथी वेबसाइट के ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी सेवाएं ऑप्शन से ड्राइविंग लाइसेंस में मोबाइल नंबर को ऑनलाइन तरीके से अपडेट किया जा सकता है। इसे सभी राज्यों को एक साथ एक लिंक से जोड़ने के मकसद से तैयार किया गया है।

लिंकिंग क्यों जरूरी?

समय बचाकर व्यवस्थित कामकाज के लिए परिवहन विभाग संबंधी सभी सेवाएं ऑनलाइन करने का लक्ष्य है। देश के सभी वाहनों और ड्राइविंग लाइसेंस का पूरा डेटा, मोबाइल नंबर उपलब्ध होने की दशा में पुलिस, आरटीओ या फिर अन्य किसी सरकारी एजेंसी को ड्रायवर और मालिक से संपर्क में भी आसानी होगी।

फोटोयुक्त ई-चालान की स्थिति में वाहन चालकों को कार्रवाई की सूचना एसएमएस या अन्य माध्यम से भेजने से कामकाज भी आसान होगा। एक राज्य से दूसरे राज्य का संपर्क ऑनलाइन होने के कारण विभागीय कामकाज में भी आसानी होगी। टैक्स की गणना से लेकर आपराधिक मामलों की जांच में भी तेजी आएगी।

मोबाइल लिंक कर दिया? –

वाहन संबंधी दस्तावेजों से मोबाइल का लिंक होने के बाद संबंधित उपयोगकर्ता को बगैर परिवहन दफ्तर जाए कई जानकारियां खुद ही ऑनलाइन मिल सकेंगी। मसलन लाइसेंस खोने पर उसकी जानकारी प्राप्त करना, नया मोबाइल नंबर अपडेट करना आदि।

अन्य प्रपत्रों से तफ्तीश –

किसी का लाइसेंस खो जाने, पास में न होने की स्थिति में सारथी वेबसाइट पर आधार नंबर से भी लाइसेंस संबंधी जानकारी जुटाई जा सकती है। बस इसके लिए एनआईसी की वेबसाइट सारथी डॉट परिवहन डॉट जीओवी डॉट इन पर दर्शाए गए राज्य चयन के कॉलम में राज्य के नाम पर क्लिक करना होगा। फिर आगे की खानापूर्ति पूरी कर जानकारी प्राप्त हो जाएगी।

समस्या यहीं से शुरू –

सारथी की वेबसाइट अभी सभी राज्यों के लिए ऑनलाइन सेवा प्रदान करने के लिए सक्षम नहीं हो पाई है। भारत में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं।वेबसाइट सारथी का सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नागरिक इसलिए उपयोग नहीं कर पा रहे, क्योंकि इसमें संबंधित राज्य वाले खाने में सभी राज्यों के नाम ही नहीं दिख रहे।

कौन से हैं वे नाम –

एनआईसी की वेबसाइट सारथी डॉट परिवहन डॉट जीओवी डॉट इन पर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश राज्य का नाम ढूंढ़े से भी नजर नहीं आता। केंद्र शासित प्रदेशों में से अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप को भी इस सूचना संदर्भ में स्थान नहीं मिला है। अब जब विकल्प ही नहीं है तो फिर कैसे ऑनलाइन सेवाओं का सदुपयोग करें?

कॉन्टैक्ट अस –

जैसा कि नियम है कि किसी वेबसाइट, पोर्टल से संपर्क करने के लिए उसके कॉन्टैक्ट अस यानी हमसे संपर्क कीजिये वाले ऑप्शन को क्लिक करना होता है। लेकिन यहां पर क्लिक करने पर जो संपर्क नंबर दिये गए हैं उन सभी नंबरों पर कॉल करने पर भी किसी तरह का जवाब नहीं मिला। इन नंबरों को देख जरूर लें क्योंकि ये नहीं लगते। विभाग के आला अधिकारी को मेल करने पर भी नो रिप्लाई!

इनमें से किसी नंबर पर नहीं हुआ संपर्क।
इनमें से किसी नंबर पर नहीं हुआ संपर्क।Neelesh Singh Thakur – RE

फिर अब क्या करें -

तकनीकी जानकारी है तो गूगल पर संपर्क नंबर ढूंढ़ा जा सकता है, क्योंकि हमने भी यही किया। नहीं तो फिर आवेदक को संबंधित जिले के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय तो जाना ही होगा। मध्य प्रदेश का नाम एनआईसी के नक्शे से क्यों गायब है इस बाबत जब हमने पड़ताल की तो कई सारी जानकारियां हासिल हुईं।

शासन के सक्षम विभाग को वेबसाइट को अद्यतन करने के लिए अनुरोध किया गया है। जल्द ही कार्य पूरा कर लिया जाएगा। सारथी पर अपडेट होने तक transport.mp.gov.in पर भी परिवहन संबंधी सेवाओं का लाभ लिया जा सकता है।

- अरविंद सक्सेना, अपर परिवहन आयुक्त, ग्वालियर

हालांकि अपर परिवहन आयुक्त से प्राप्त इस अति महत्वपूर्ण जानकारी के साथ एनआईसी का संपर्क नंबर भी हासिल हुआ जो एनआईसी की साइट पर नहीं दिख रहा था।

स्मार्ट चिप का काम -

संपर्क करने पर एनआईसी के वरिष्ठ तकनीकी निदेशक ने बताया कि मध्य प्रदेश परिवहन विभाग की ई-सेवा का कामकाज स्मार्ट चिप इंडिया लिमिटेड देख रही है। यह कंपनी मध्य प्रदेश परिवहन विभाग की ओर से वाहन के लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की सेवा प्रदान करती है।

साथ ही उन्होंने बताया कि सरकार से अनुमति मिलते ही परिवहन विभाग को एनआईसी से जोड़ने के काम की दिशा में तेजी आई है।

सारथी पर अभी मध्य प्रदेश के अलावा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना के नाम ऑनबोर्ड नहीं हुए हैं। सरकार से अनुमति प्राप्त हो गई है। जल्द ही मध्य प्रदेश का नाम सारथी वेबसाइट पर अपडेट हो जाएगा।

राजीव अग्रवाल, वरिष्ठ तकनीकी निदेशक, एनआईसी, परिवहन आयुक्त कार्यालय, ग्वालियर

ट्रांसपोर्ट कमिश्नर की रुचि -

विभागीय सूत्रों की मानें तो खुद ट्रांसपोर्ट कमिश्नर मुकेश कुमार जैन इस कार्य की समीक्षा कर रहे हैं। करीब चार माह पहले मध्य प्रदेश के परिवहन विभाग की लाइसेंसिंग प्रक्रिया को एनआईसी की वेबसाइट पर अंकित कराने पत्राचार हुआ था। फिलहाल केंद्रीय ऑनलाइन सेवा के लिए मध्य प्रदेश के नागरिकों को इंतजार करना होगा

आपको बता दें, http://www.transport.mp.gov.in/ लिंक पर भी लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन संबंधी खानापूर्ति की जा सकती है। इंद्रजाल (इंटरनेट) पर मध्य प्रदेश के परिवहन विभाग को जोड़ने वाली मौजूदा सरकारी और प्राइवेट नियंत्रित वेबसाइट के अक्षर (फॉन्ट) बहुत छोटे होने से इसे बगैर लैंस लगाए या जूम किए पढ़ना बहुत टेढ़ी खीर है।

केंद्रीय स्तर पर उपलब्ध सही साइज के फॉन्ट्स वाली एनआईसी की सारथी वेबसाइट पर मध्य प्रदेश का नाम ही मौजूद नहीं है! मतलब तकनीकी परेशानियां होने पर पहले की तरह क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय जाकर मोबाइल नंबर को लिंक कराने, लाइसेंस बनवाने जैसे काम कराए जा सकते हैं, क्योंकि यही अंतिम विकल्प है।

एनआईसी इतना क्यों जरूरी है और मात्र परिवहन विभाग की जानकारियां केंद्रीयकृत तौर पर अद्यतन न होने के कारण सिर्फ मध्य प्रदेश पर कितना असर पड़ रहा है? इस बारे में विस्तार से होगी जानकारी हमारी अगली पड़ताल में।

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