‘‘नेहरू का भारत और भारत का नेहरू‘‘ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित
‘‘नेहरू का भारत और भारत का नेहरू‘‘ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजितRaj Express

नेहरू का व्यक्तित्व कभी धूमिल नहीं हो सकता : कुमार प्रशांत

जवाहरलाल नेहरू का रूपांतरण किसानों के बीच रहकर हुआ और तब वे खुद कहते हैं कि मैं तलवार की संस्कृति वाले देश से पढ़ लिख कर लौटा हूं, लेकिन मुझे किसानों के बीच रहकर अहिंसा की संस्कृति ने अपना बना लिया है।

जयपुर, राजस्थान। पंडित जवाहरलाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी एवं राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी नेहरू का भारत के नेहरू में देश के जाने-माने गांधीवादी विचारक और गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि नेहरू को समझना और नेहरू को जानना आज के समय की सर्वाधिक आवश्यकता है। इसीलिए रवीन्द्र नाथ टैगोर ने नेहरू को सम्मान दिया था और उन्हें देश का जवाहर कहकर संबोधित किया था। आजादी के आन्दोलन में वे ऐसे बादशाह थे जिनके पास कोई तख्तोताज नहीं था लेकिन वे देश के सर्वमान्य नेता थे। जवाहरलाल नेहरू का रूपांतरण किसानों के बीच रहकर हुआ और तब वे खुद कहते हैं कि मैं तलवार की संस्कृति वाले देश से पढ़ लिख कर लौटा हूं लेकिन मुझे किसानों के बीच रहकर अहिंसा की संस्कृति ने अपना बना लिया है। नेहरू के शासन काल में ज्ञान, विज्ञान, शिक्षा चिकित्सा हर क्षेत्र में कल्पनाशीलता के साथ काम हुआ। इसीलिए आज नेहरू को स्वप्न दृष्टा और राष्ट्र निर्माता कहकर याद किया जाता है। नेहरू को लेकर भले ही कितने ही कुविचार प्रसारित किए जाएं लेकिन नेहरू का व्यक्तित्व इनसे कभी प्रभावित और धूमिल होने वाला नहीं है। आज के बच्चों को और युवा पीढ़ी को यह समझाने की आवश्यकता है कि नेहरू इसलिए महान हुए थे कि वे सबको साथ लेकर आगे बढ़े थे।

कार्यक्रम के आरंभ में अकादमी के अध्यक्ष इकराम राजस्थानी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने देश की पहली बाल साहित्य अकादमी बनाकर पूरे देश को संदेश दिया है। यह अकादमी नेहरू के विजन को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। बाल साहित्यकारों के सृजन को आगे बढ़ाएगी।

लखनऊ से पधारे प्रतिष्ठित साहित्यकार सूर्य कुमार पांडे ने कहा कि नेहरू ऐसे निराले राजनेता थे, जिन्हें उस समय के सभी लेखक पत्रकार और साहित्यकार आदर और सम्मान के साथ याद करते थे। नेहरू अपने सामने अपनी आलोचना को न केवल सुनते थे, बल्कि उसके आधार पर वे अपने को परिमार्जित भी करते थे। वे कर्मयोगी थे और उन्होंने गीता का निचोड़ केवल तीन शब्दों में उतार दिया था ‘आराम हराम है‘।

विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं मुख्यमंत्री के विशेषाधिकारी श्री फारूक आफरीदी ने कहा कि पंडित नेहरू लोकतंत्र के योद्धा थे। इसी लोकतंत्र का कमाल है कि आज कांग्रेस से विरोधी विचारधारा के लोग देश की शीर्ष सत्ता तक पहुंचे हैं। आज संपूर्ण राष्ट्र नेहरू की शानदार विरासत को गर्व से याद करता है और कृतज्ञ है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजीव गांधी स्टेडी सर्कल के राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. सतीश राय ने कहा कि नेहरू को याद करना और नेहरू पर बेबाक बात करना धुंध को हटाने जैसा काम है। मनगढ़ंत कहानियों के इस दौर में बाल नेहरू अकादमी नेहरू अकादमी की यह पहल सराहनीय है। जब देश भर में सन्नाटा पसरा हो और झूठ का बोलबाला हो वहां मुख्यमंत्री गहलोत ने आधुनिक भारत के निर्माता, शिल्पकार और कौशल रचनाकार नेहरू को शानदार ढंग से रेखांकित करते हुए इस अकादमी का गठन किया है। नेहरू ने जो भारत खोजा और जो पाया था वह बहुत लुंज पुंज कमजोर और आधारहीन था, लेकिन उन्होंने अपने कौशल से, अपने सपने को साकार किया और जैसा भारत खड़ा किया उसकी पूरी दुनिया में प्रशंसा हुई।

कार्यक्रम में अकादमी सचिव राजेन्द्र मोहन शर्मा ने कहा कि नेहरू बाल साहित्य अकादमी ने देश भर के बाल साहित्यकारों और नेहरू चिंतन के विचारकों से संपर्क साधा है। अब हम अनवरत रूप से राजस्थान के विभिन्न जिलों और सम्भाग मुख्यालयों पर संवाद श्रृंखला पर काम करने जा रहे हैं।

कार्यक्रम के अंत में राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक डॉ. बीएल सैनी ने कहा कि नेहरू हमारे देश के निर्माता ही नहीं अपितु तनावग्रस्त दुनिया के लोगों को मार्ग दिखाने वाले पंचशील के सिद्धांतों के निर्माता और गुटनिरपेक्ष मूल्यों के संस्थापक थे। नेहरू के ही प्रभाव के कारण दो धु्रवों में बंटी दुनिया धीरे-धीरे बैठकर संवाद करने लगी थी। उन्होंने सभी आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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