SIDM की वार्षिक आम बैठक में राजनाथ सिंह का संबोधन
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SIDM की वार्षिक आम बैठक में राजनाथ सिंह का संबोधन

SIDM की वार्षिक आम बैठक और वार्षिक सत्र को संबोधित कर राजनाथ सिंह ने कहा- अपने विस्तार की प्रक्रिया में SIDM ने अपना पहला state office, लखनऊ में set-up कर लिया है।

दिल्‍ली, भारत। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज मंगलवार को SIDM की वार्षिक आम बैठक और वार्षिक सत्र को संबोधित किया।

इस दौरान राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा- अपने विस्तार की प्रक्रिया में SIDM ने अपना पहला state office, लखनऊ में set-up कर लिया है। इसी तरह उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के साथ, UP डिफेंस कॉरिडोर में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर भी एक महत्वपूर्ण कदम है। आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन हमारे देश की जीवन-चर्या का अनिवार्य अंग रहे हैं। घर के काम हों या खेती-किसानी, शिक्षा-दीक्षा हो या आजीविका, यहाँ तक की रक्षा क्षेत्र और व्यापार में भी हमारा देश बहुत उन्नत रहा है, वह भी स्वावलंबन के दम पर, जिनकी रूचि इतिहास में होगी, वह जानते होंगे कि, भारत में औद्योगिक स्थिति और संभावनाओं का जायजा लेने के लिए अंग्रेजों ने 1916 में 'इंडियन इंडस्ट्रियल कमीशन' गठित किया था।

इस कमीशन का उद्देश्य यह दिखाना था कि, उद्योगों के मामले में भारत कितना अयोग्य और अक्षम है। लगभग 300 पृष्ठों की अपनी रिपोर्ट में वह यह दिखाने में काफी हद तक सफल भी रहा। पर फिर भी, एक दो महत्वपूर्ण बातें इस रिपोर्ट से जुड़ी हैं, जिसे मैं संक्षेप में आपके सामने रखना चाहूंगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह के संबोधन की बातें-

  • रिपोर्ट के पहले भाग के, पहले चैप्टर में वे एक बात लिखते हैं, "ऐसे समय में जब यूरोप के पश्चिम में, आधुनिक औद्योगिक व्यवस्था का जन्मस्थान असभ्य जनजातियों का निवास था, भारत अपने शासकों की संपत्ति और उच्च के लिए प्रसिद्ध था। उसके शिल्पकारों का कलात्मक कौशल ”

  • कमीशन के इस रिपोर्ट के जवाब में पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने लगभग 50 पृष्ठों का एक independent 'note' लिखा। इसमें बड़े तर्कों, और अंग्रेज विद्वानों के ही दिए तथ्यों से उन्होंने यह दिखाया कि, भारत शुरू से ही व्यापार और रक्षा के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों में से एक रहा है

  • उन्होंने तीन industries के नाम गिनाए, जिनके लिए भारत पूरी दुनिया में जाना जाता था। वह तीन areas थे- Textile उद्योग, Iron उद्योग, और Ship building उद्योग। हमारी Ship-building न केवल स्थानीय जरूरतों, बल्कि हमारी सुरक्षा और व्यापार का प्रमुख आधार थी।

  • आज जब मैं 'Technology/product innovation' और ‘Export performance’ Categories में Ship-building entities को अवार्ड लेते देख रहा हूं, तो मुझे हमारे देश का वही गौरव फिर से वापस आता दिखाई दे रहा है।

  • आप सभी अवगत हैं कि, वैश्विक परिस्थितियाँ आज बड़ी तेजी से बदल रही हैं। आज दुनिया का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जो इन बदलावों से प्रभावित न हुआ हो। ट्रेड, इकोनामी, कम्युनिकेशन, राजनीतिक समीकरण और सैन्य शक्ति, सब पर इसका साफ असर देखा जा सकता है।

  • दुनिया में ऐसे रक्षा निर्माताओं की कमी नहीं है, जो अत्याधुनिक और उच्च गुणवत्ता के उपकरण बनाते हैं, पर उनकी लागत ज्यादा होती है। ऐसे भी निर्माताओं की कमी नहीं होगी, जिनकी लागत कम है पर गुणवत्ता उतनी नहीं है।

  • ऐसे में मैं देखता हूं कि, आज हमारे देश के पास वह सब कुछ है, जो इन दोनों का perfect blend तैयार कर सकता है। यानी quality भी और किफायती भी। यह न केवल भारत की अपनी सुरक्षा के लिए लाभकारी होगा, बल्कि दुनिया को सुरक्षा उपकरण निर्यात करने की दिशा में हमें आगे ले जाएगा।

आप लोगों द्वारा हमें अनेक बहुमूल्य सुझाव भी मिले हैं :

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया- आज जब हम अपनी आजादी का 'अमृत महोत्सव' मना रहे हैं, तो इससे अच्छा अवसर क्या होगा कि, हम एक बार फिर 'मेक इन इंडिया' और 'मेक फॉर द वर्ल्ड' के अपने संकल्प पर काम करें। हम अपने अतीत से सीखते हुए, वर्तमान पर काम करते हुए, भविष्य को सशक्त बनाएँ। आप लोगों द्वारा हमें अनेक बहुमूल्य सुझाव भी मिले हैं जिन्हें हमने नीति सुधार में शामिल किया हैI DAP-2020, Draft DPM 2021, draft DPEPP 2020 और दोनों indigenisation list का finalisation इसके बड़े उदाहरण हैं।

  • इसके अलावा भी सरकार द्वारा अनेक ऐसे कदम उठाए गए हैं, जो हमारी निजी उद्योग की आवश्यकताएं तो पूरी करेंगे ही, साथ ही वैश्विक मांग पूरी करने के लिए विदेशी साझेदार निर्माताओं के साथ sustainable और long-term linkages भी create करेंगे।

  • यह सब के लिए बड़ी बात है कि रक्षा आधुनिकीकरण के लिए आवंटित राशि में घरेलू खरीद का प्रतिशत बढ़ाकर 64.09% कर दिया गया है। साथ ही घरेलू पूंजी वसूली में निजी क्षेत्रों से प्रत्यक्ष खरीद का प्रतिशत 15 फ़ीसदी कर दिया गया है।

  • हम निजी क्षेत्र को एक उपयुक्त विकास वातावरण प्रदान कर रहे हैं। इसके अनुसार, हमने रणनीतिक साझेदारी मॉडल के माध्यम से लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, टैंक और पनडुब्बियों सहित मेगा डिफेंस प्रोग्राम के निर्माण के अवसर खोले हैं।

  • भारत सरकार ने नए रक्षा औद्योगिक लाइसेंस की मांग करने वाली कंपनियों के लिए स्वचालित मार्ग के माध्यम से रक्षा क्षेत्र में 74% तक और सरकारी मार्ग द्वारा 100% तक FDI को बढ़ाया है।

  • सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के परिणाम आज हमारे सामने हैं। जैसा कि मैंने शुरू में ही कहा, SIDM के साथ लगभग 500 सदस्यों इन्हीं नीतियों के परिणाम हैं। पिछले 7 वर्षों में हमारे रक्षा निर्यात का, 38 हजार करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर जाना इन्हीं नीतियों के परिणाम हैं।

  • 10,000 से ऊपर SMEs का रक्षा सेक्टर से जुड़ना, इन्हीं के परिणाम है। आज रक्षा सेक्टर में अनुसंधान & विकास, start-up, innovation और रोज़गार बढ़ा है, यह सब इन्हीं के परिणाम हैं।

  • मैं समझता हूँ कि स्थिरता हमारे self-reliance का अभिन्न अंग हैI इसलिए नए-नए उभरते रक्षा के क्षेत्रों जैसे अंतरिक्ष, एयरोस्पेस, और साइबरस्पेस में भी आप लोग रूचि लें।

  • मैं भरोसे के साथ कह सकता हूं, कि आने वाले समय में भारतीय रक्षा के इतिहास में जब रक्षा उत्पादन क्रांति का जिक्र होगा, तो आप सबका और SIDM का नाम अपने आप लोगों की जुबान पर आएगा। हमें बस आगे बढ़ते रहना है

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