विजय पर्व समाधान समारोह में राजनाथ सिंह का संबोधन
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विजय पर्व समाधान समारोह में राजनाथ सिंह का संबोधन

विजय पर्व समाधान समारोह में राजनाथ सिंह ने कहा- भारत में प्रत्येक वर्ष 16 दिसंबर को ‘विजय दिवस’ और बांग्लादेश इसको ही उच्चारण के थोड़े अंतर से ‘बिजॉय दिबोस’ मनाता है।

दिल्‍ली, भारत। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज मंगलवार को विजय पर्व समाधान समारोह में शामिल हुए और समारोह को संबोधित किया।

भारत और बांग्लादेश दो अलग-अलग देश हैं :

विजय पर्व के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- सबसे पहले, ‘अनेकता में एकता’ की प्रतीक पूरे देश भर से लाई गई मिट्टियों, जिनकी अभी यहाँ mixing ceremony हुई है, को मैं नमन करता हूँ, उसे अपने मस्तक पर लगाकर उसका अभिनंदन करता हूँ। वैसे तो भारत और बांग्लादेश दो अलग-अलग देश हैं, पर वास्तव में दोनों की समान संस्कृतियाँ और भाषाएँ रही हैं, साथ ही 1971 के war में दोनों देशों के veterans और ‘मुक्तियोद्धाओं’ का उद्देश्य भी बिलकुल समान रहा है।

वह उद्देश्य था आम नागरिकों के प्रति अत्याचार और मानवाधिकारों के हनन के ख़िलाफ़ आप लोगों की प्रतिबद्धता। यह युद्ध एक न्याय युद्ध था, जिसके कारण एक नए राष्ट्र ‘बांग्लादेश’ का जन्म हुआ। यह युद्ध, मानवता के प्रति भारत के committment को दर्शाने वाला युद्ध था। भारत में प्रत्येक वर्ष 16 दिसंबर को ‘विजय दिवस’ और बांग्लादेश इसको ही उच्चारण के थोड़े अंतर से ‘बिजॉय दिबोस’ मनाता है। 1971 में इसी दिन पाकिस्तान की सेना ने भारतीय सेना और बांग्लादेशी स्वतंत्रता सेनानियों-मुक्ति बाहिनी-संयुक्त कमान के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

  • बांग्लादेशी नेता, शेख मुजीबुर-रहमान जिन्होंने पाकिस्तानी अत्याचार से बंगाली जनता की मुक्ति का शंखनाद किया था, वह भी इतिहास में अमर हो गए। उन्हें ‘बंगबंधु’ और ‘बांग्लादेश के राष्ट्रपिता’ जैसे असीम स्नेह व सम्मानसूचक संबोधनों से जनता ने सम्मानित किया।

  • 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध में भारत की जीत विश्व इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण जीत साबित हुई। पाकिस्तान ने इस युद्ध में अपनी एक तिहाई थल सेना, आधी नौसेना और एक चौथाई वायुसेना को गँवा दिया था।

  • ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ के माध्यम पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों का भी अंत हुआ था 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में 93000 पाकिस्तानी सैनिकों का आत्मसमर्पण विश्व के इतिहास का एक ऐतिहासिक आत्मसमर्पण था।

  • आप लोग हमारे देश की सीमाओं सहित हमारी एकता और अखंडता के प्रहरी रहे हैं। एक बात की ओर कभी आप लोगों ने ध्यान दिया है? आज हमारा देश निर्बाध रूप से अपने प्रगति-पथ पर आगे बढ़ता जा रहा है।

  • हमारे मन में अपने वीर सैनिकों का सम्मान बस उनकी सेवा तक ही नहीं है, बल्कि उनकी सेवानिवृत्त के बाद भी उतना ही हैI हमारा सदैव यह प्रयास रहेगा कि हम आप सभी के लिए और भी बेहतर से बेहतर कर पाएं, और इसके लिए हम मन से प्रतिबद्ध हैं।

  • आज जिन veterans को हम सब मिलकर कृतज्ञतापूर्ण सम्मान दे रहे हैं, उन्होंने अपनी युवावस्था में धर्म, समाज, और राष्ट्र में अपने व्यक्तिगत हित से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के लिए बहुत कुछ बलिदान किया है।

  • आइए, हम यह प्रण लें कि हम युवा भी राष्ट्र और समाज की सेवा में अपनी पूर्ण क्षमता और तपस्या से कार्य करें, ताकि आज से 50 साल बाद के लोग आप की कहानी को दोहराने का संकल्प लेंI यह एक बड़ी जिम्मेदारी है, और मुझे आशा ही नहीं बल्कि पूरा विश्वास है कि आप सभी इस कार्य में सफल होंगे।

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