फिक्की वार्षिक सम्‍मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का संबोधन
फिक्की वार्षिक सम्‍मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का संबोधनRajexpress

फिक्की वार्षिक सम्‍मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का संबोधन

दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज फिक्की वार्षिक सम्‍मेलन को संबोधित किया और कहा- हमने पिछली सरकारों के लटके हुए मामलों को भी सफलतापूर्वक मंजिल तक पहुचांया है।

दिल्‍ली, भारत। नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज 18 दिसंबर को फिक्की के 94वें वार्षिक सम्मेलन में शामिल हुए और फिक्की वार्षिक सम्‍मेलन को संबोधित किया।

डिफेंस सेक्टर को लेकर बोले राजनाथ सिंह :

फिक्की वार्षिक सम्‍मेलन में राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा- मेरे पास रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी है, इसलिए मैं अपनी बात मुख्यत: रक्षा, सुरक्षा और रक्षा उत्पादन के इर्द-गिर्द ही रखूंगा। आप लोग अच्छी तरह जानते है डिफेंस सेक्टर एक ऐसा क्षेत्र है जहां पर अधिकांश प्रोजेक्टस की ‘टाइम लाइन’ महीनों में नहीं बरसों में होती है। कुछ प्रोजेक्टस तो ऐसे हैं, जिनमें दशकों भी लग सकते हैं। हमारी सरकार ने जो एक अच्छा काम किया है कि हमने हर तरह के प्रोजेक्टस की टाइम लाइन को घटाने में कुछ हद तक सफलता प्राप्त की है। इतना ही नहीं हमने पिछली सरकारों के लटके हुए मामलों को भी सफलतापूर्वक मंजिल तक पहुचांया है।

आज हम दिसंबर 2021 में खड़े हैं और दो हफ्ते बाद ही 2022 हमारी जिंदगी में दस्तक दे चुका होगा। मुझे यह याद दिलाने की जरूरत नहीं है कि, साल 2020 और 2021 कोरोना के चलते Disruptions की भेंट चढ़ गये।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह द्वारा अपने संबोधन में कही गईं बातें-

  • आज भारत की 55 फीसदी आबादी का वैक्सिनेशन हो चुका है, जबकि पहले क्या होता था। शायद आपमें से कुछ लोगों को इसकी जानकारी होगी कि, दुनिया में पोलियो का टीका 1955 में ईजाद हुआ मगर भारत में Universal Immunization Programme 1985 में प्रारंभ हुआ।

  • जबकि हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ‘वैक्सीन डिलीवरी’ की ‘टाइम लाइन’ पूरी तरह छोटी कर दी है। आपने देखा आज कोरोना हुआ, कल वैक्सीन बनी और परसों लगने लग गई। यानि जो काम पहले की सरकारें बरसों में कर रही थी वह काम हम कल परसों में करने में कामयाब हो गये हैं। मेरा मानना है कि, जैसे-जैसे हम कोरोना की कठिनाई से बाहर आ रहे हैं, जो सेक्टर इस चुनौती पर सबसे तेजी से विजय हासिल करने में सफल हो रहा है वह है डिफेंस सेक्टर।

  • इसके पीछे दो बुनियादी वजह है। पहला देश की रक्षा शक्ति को मजबूत करने का जो मजबूत संकल्प हमारी सरकार ने लिया है, वैसा आजादी के बाद किसी ने भी नहीं लिया था। इसका कारण है हमारा आत्मनिर्भरता पर फोकस जिसके चलते डिफेंस में नीतियों में बदलाव किया गया है।

  • भारत की ‘कद-काठी’ और उसकी भौगोलिक स्थिति के साथ-साथ जिस तरह के Security Challenges उसके सामने हैं उसके चलते हम अपनी Defence Technologies के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रह सकते। यह सच्चाई हम सब अच्छी तरह समझते हैं।

  • भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए यह जरूरी है हमारे पास वह Defence Capacity और Capability मौजूद हो कि दुनिया का ताकतवर से ताकतवर देश भारत की तरफ आंख टेढ़ी करने से पहले हजार बार सोचे।

  • हमारी Capability और Capacity किसी पर आक्रमण करने की नीयत से नहीं तैयार होगी बल्कि दुश्मनों की नापाक हरकत का हर समय हम मुंह तोड़ जवाब दे सकें, ये हमारा उद्देश्य है।

  • भगवान ने हमें कुछ ऐसे पड़ोसी भी दिए हैं जो भारत की हस्ती और हैसियत को देखकर कुछ अच्छा महसूस नहीं करते। एक है जो देश के विभाजन से पैदा हुआ और जब से पैदा हुआ है भारत की प्रगति को देख-देखकर चिंता में दुबला हुआ जा रहा है।

  • हमारे यहां एक कहावत है कि पड़ोसी अपने गम से कम बल्कि अपने पड़ोसी की खुशी देखकर ज्यादा दुखी रहते हैं। western border पर हमारे पड़ोसी की यही स्थिति है। दुनिया के अधिकांश देश भारत के मित्र हैं। अमरीका आ के गया, रूस आ के गया और कल ही फ्रांस की Defence Minister सभी यहां मुझसे मिली हैं। हमने हर मित्र देश से यह कहा कि देखिये हम भारत की सुरक्षा को ध्यान में रखकर, भारत की रक्षा सामग्रियां अब भारत में बनाना चाहते हैं।

  • अभी हाल ही में रूस के साथ हमने अमेठी में 6 लाख ए.के. 203 बनाने का समझौता कर लिया है। पांच हजार करोड़ से भी अधिक का यह प्रोजेक्ट रूस के सहयोग से पूरा होने जा रहा है।

  • हम दुनिया के हर देश से यह कह रहे हैं कि ‘Come Make In India’ ‘Come Make for India’ & ‘Come Make for the world’।

  • दुनिया के देशों को हमारी बात समझ आ रही है। बहुत सारी विदेशी कम्पनियां भारत में आकर डिफेंस मेन्यूफैक्चरिंग करना चाहती है हमने उनके लिए राह भी आसान कर दी है। डिफेंस सेक्टर में FDI को बढ़ाकर आटोमेटिक रूट से 74% कर दिया गया है और सरकारी रूट से तो यह 100 फीसदी हो गया है।

  • आत्मनिर्भर भारत अभियान के अन्तर्गत हम भारत में बने रक्षा उपकरणों को विदेशी सामान पर प्राथमिकता दे रहे हैं। हमने 209 ऐसे रक्षा उपकरण की एक ‘Positive Indeginisation list’ बनाई है, जिसको तय सीमा के बाद आयात नहीं करेंगे।

  • इंड़िया बियांड 75’ की जब मैं बात करता हूं तो मेरा यह मानना है कि हम इस दशक में यह ‘Positive List’ चार फिगर यानि 1000 Item से अधिक होगी। इस बात को लेकर मैं काफी पॉजिटिव हूं।

  • अगर किसी देश का रक्षा मंत्री रक्षा उत्पादन को लेकर पॉजिटिव है तो डिफेंस सेक्टर में काम करने वाली हर भारतीय कम्पनी के लिए यह ‘गुड न्यूज’ है। यह एक ऐसा सुनहरा मौका है जिसका Industry को फायदा उठाना चाहिए। हमने वक्त बदल दिया, हालात बदल दिए, अब जज्बात भी बदल गये हैं।

  • आज डिफेंस सेक्टर में काम करने वाली हर निजी कम्पनी को इस बात का भरोसा है कि ‘अपना टाइम आ गया है’। बहुत सारी कम्पनीज डिफेंस में शानदार काम कर रही हैं।

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