राष्ट्रीय सुरक्षा विषय पर बोले राजनाथ- कश्मीर में बचा खुचा आतंकवाद भी समाप्त होकर रहेगा
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राष्ट्रीय सुरक्षा विषय पर बोले राजनाथ- कश्मीर में बचा खुचा आतंकवाद भी समाप्त होकर रहेगा

दिल्ली में स्वर्गीय बलरामजी दास टंडन व्याख्यानमाला के अंतर्गत ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ विषय पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा- टंडन ने अपने जीवनकाल में इस देश का बहुत ही कठिन समय देखा।

दिल्ली, भारत। दिल्ली में स्वर्गीय बलरामजी दास टंडन व्याख्यानमाला के अंतर्गत ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ विषय पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन के दौरान कहा, ''सबसे पहले मैं स्वर्गीय बलराम दास टंडन जी की स्मृति को नमन करता हूँ ,जिन्होंने अपने जीवनकाल में इस देश का बहुत ही कठिन समय देखा। उन्होंने देश के विभाजन की विभीषिका को बहुत क़रीब से देखा। वह दौर, नफ़रत और हिंसा का ऐसा दौर था जिसे हम चाह कर भी नहीं भूल सकते।''

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया- आज इतने वर्षों बाद भी उसकी पीड़ा देश में महसूस की जाती है, इसलिए 1947 में हुए देश के विभाजन के बाद जो लोग हिंसा और नरसंहार के शिकार हुए, उनकी स्मृति में इस साल प्रधानमंत्री श्री मोदी ने हर साल 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। उनके जीवन की दूसरी बड़ी घटना, जिसका उनपर बड़ा प्रभाव पड़ा वो था 1965 में हुआ भारत-पाकिस्तान युद्ध जिसमें हर भारतवासी ने खुद को उस लड़ाई से ज़ोड़ लिया था। उन दिनों वे अमृतसर में थे और वह इलाक़ा उन दिनों काफ़ी सक्रिय था।

आतंकवाद की दस्तक ने उनकी ज़िंदगी पर काफ़ी गहरा प्रभाव डाला :

राजनाथ सिंह बाले- पंजाब में आतंकवाद की दस्तक ने उनकी ज़िंदगी पर काफ़ी गहरा प्रभाव डाला। उस समय उन्होंने जान जोखिम में डालकर आतंकवाद का विरोध किया और सामाजिक ताने-बाने में बिखराव न आए इसकी भी चिंता उन्होंने की। वे जानते थे कि आतंकवाद इस देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। लोकतांत्रिक परम्पराओं में उनका गहरा विश्वास था। वे 2014 में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल नियुक्त हुए, उस भूमिका में उन्होंने हमेशा संवैधानिक परम्पराओं को निभाया। उनके कार्य व्यवहार या आचरण पर कभी कोई उँगली तक नहीं उठा पाया।

भारत के इतिहास में राष्ट्रीय सुरक्षा को एक व्यापक दृष्टि से यदि किसी ने पहली बार देखा तो आज से करीब 2200 साल पहले आचार्य चाणक्य ने देखा। राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर जिस तरह के विचार उन्होंने अपनी पुस्तक ‘अर्थशास्त्र’ में रखे है वे आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने पहले रहे हैं।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोले राजनाथ :

राजनाथ सिंह ने कहा, ''राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति संवेदनशील रहना हर सरकार की पहली आवश्यकता ही नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता भी होती है। जब हम भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा की बात करते हैं, तो सबसे पहले बात सीमाओं की सुरक्षा की आती है, क्योंकि यदि सीमाएं सुरक्षित नही होंगी तो राष्ट्र भी सुरक्षित नही होगा। पिछले लगभग 75 सालों में Land और Maritime Boundaries पर हमें बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। मगर हमारी सेनाओं और सुरक्षा बलों ने मिलकर हर चुनौती का न केवल डटकर सामना किया है, बल्कि उन पर विजय भी हासिल की है।''

राजनाथ सिंह के संबोधन की प्रमुख बातें-

  • जब से भारत आजाद हुआ है, कई भारत विरोधी ताकतों की यह लगातार कोशिश रही है कि, या तो सीमाओं पर या फिर सीमाओं के रास्ते से भारत के भीतर अस्थिरता का माहौल बनाया जाये। पाकिस्तान की जमीन से इसके लिए बड़े पैमाने पर लगातार कोशिश की गई है।

  • 1965 में और 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच दो युद्ध हुए जिनमें पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा। इन युद्धों में मिली पराजय ने पूरी तरह यह साबित कर दिया कि भारत के साथ वे Full Scale War करने की स्थिति में नहीं है।

  • भारत के साथ सीधे युद्ध न करने की अक्षमता ने पाकिस्तान को दो नीतियों पर काम करने के लिए मजबूर किया। एक तो उन्होंने एटमी रास्ता खोजने की दिशा में कदम बढ़ाए और दूसरी तरफ भारत को ‘Death of thousand cuts’ देने की नीति पर काम प्रारंभ किया।

  • आतंकवाद के सहारे पंजाब में हिंसा का जो दौर चलाया गया उसका खात्मा बहुत बड़ी कीमत देकर हुआ है। अब जम्मू और कश्मीर में इस आतंकवाद को रोकने की दिशा में पिछले सात सालों से सेना और सुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई चल रही है

  • मेरा मानना है कि, कश्मीर में बचा खुचा आतंकवाद भी समाप्त होकर रहेगा। यह विश्वास मुझे इसलिए है क्योंकि धारा 370 और 35A के चलते वहां अलगाववादी ताकतों को जो मजबूती मिलती थी, वह अब खत्म हो गई है।

  • आतंकवाद के खिलाफ भारतीय सुरक्षा बलों के Response में पिछले सात सालों में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वह बदलाव है सेना और सुरक्षा बलों के बढ़े हुए मनोबल और उनकी कार्रवाई के बदले हुए तौर-तरीकों का, चूंकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर हम न राजनीति करते है और न होने देते है इसलिए भारतीय सेना और सुरक्षा बलों में यह भरोसा पैदा हुआ है कि राष्ट्र रक्षा के कर्तव्य पालन में उन्हें खुली छूट रहेगी।

  • इससे सेना और सुरक्षा बलों का आत्मविश्वास और मनोबल कितना ऊंचा हुआ है, इसका अनुमान आप इसी बात से लगा सकते है कि पिछले सात सालों में भारत के Hinterland में एक भी बड़ी आतंकवादी घटना उन्होंने नही होने दी है।

  • आज भारत आतंकवाद के खिलाफ देश की सीमाओं के भीतर तो कार्रवाई कर ही रहा है, साथ ही जरूरत पड़ने पर सीमा पार जाकर भी आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने का काम हमारी सेना के बहादुर जवानों ने किया है।

  • चाहे उरी की घटना के बाद की गई सर्जिकल स्ट्राईक हो या पुलवामा की घटना के बाद की गई बालाकोट एयर स्ट्राईक्स हो, भारतीय सेना ने आतंकवाद के खिलाफ ऐसी कठोर कार्रवाई की है जिसकी मिसाल कम से कम आजाद भारत के इतिहास में नहीं मिलती है।

  • हाल के कुछ वर्षों में उन्होंने सीमा पर Ceasefire Violations बढ़ा दिए थे,, मगर भारतीय सुरक्षा बलों से उन्हें हमेशा मुहंतोड़ जवाब ही मिला है। अब पाकिस्तान को समझ आने लगा है कि इन Ceasefire Violations से भी उन्हें कोई खास लाभ नहीं मिलने वाला है।

  • यह सच है कि लम्बे समय से चीन के साथ सीमा को लेकर एक Perceptional Difference है। इसके बावजूद कुछ ऐसे समझौते हैं, Protocols हैं जिनका पालन करते हुए दोनों देशों की सेनाएं पैट्रोलिंग करती हैं।

  • पिछले साल पूर्वी लद्दाख में जो विवाद पैदा हुआ उसका कारण था कि चीन की सेनाओं ने Agreed Protocols को नजरअंदाज किया था। चीनी सेना PLA को Unilateral तरीके से LAC पर Action करने की इजाजत हम किसी भी सूरत में नहीं दे सकते और न दे रहे है। न कभी देंगे।

  • प्रधानमंत्री मोदीजी के नेतृत्व में सरकार ने सेनाओं को यह स्पष्ट बता रखा है कि LAC पर किसी भी एकतरफा कार्रवाई को नजरअंदाज नही किया जाना चाहिए। गलवान में उस दिन भारतीय सेना ने यही किया और पूरी बहादुरी से PLA के सैनिकों का मुकाबला करते हुए उन्हें पीछे जाने पर मजबूर किया।

  • गलवान की घटना को एक वर्ष बीत चुका है मगर जिस शौर्य, पराक्रम और साथ में संयम का परिचय भारतीय सेना ने दिया है वह अतुलनीय है और आने वाली पीढ़ियां भी उन जांबाज सैनिकों पर गर्व करेंगी।

  • मैं आप सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि,, प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में हम भारत की सीमा, उसके सम्मान और स्वाभिमान से समझौता नहीं करेंगे। सीमाओं की पवित्रता को हम कतई भंग नही होने देंगे।

  • सेना की ट्रेनिंग होती है कि दुश्मन की हरकत को देखते ही ट्रिगर दबा देना मगर भारतीय सेना ने बड़ी Maturity के साथ काम करते हुए साहस और संयम दोनों का प्रदर्शन किया है। इसके लिए भारतीय सेनाओं की जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है।

अटल टनल के उद्घाटन पर बोले राजनाथ :

राजनाथ सिंह ने कहा- पिछले साल रोहतांग में अटल टनल का उद्घाटन किया गया। यह प्रोजेक्ट लम्बे समय से लटका था। हमारी सरकार ने 26 सालों का काम 06 साल में करके दिखाया है। जितने High Altitude पर यह टनल बना है, उतने High Altitude पर इतना बड़ा विश्व में कहीं भी कोई दूसरा Tunnel नहीं है। आज Border Roads Organisation बड़ी तेजी से सीमावर्ती इलाकों में सड़कों, पुलों और अन्य Infrastructure Projects का निर्माण कर रहा है। लद्दाख को All Weather Connectivity तो दी ही जा रही है साथ ही कई Alternative Roads पर भी काम शुरू हो गया है।

राष्ट्रीय सुरक्षा में Border Infrastructure की मजबूती बहुत जरूरी है। जो भारतीय नागरिक सीमावर्ती इलाकों में रहते हैं उन्हें भी इसका लाभ होता है। सीमाओं पर रहने वाले नागरिक हमारे लिए Strategic Asset है। उनके हितों को ध्यान में रखते हुए भी Border Infrastructure मजबूत करना जरूरी है

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह ने बताया- लद्दाख के साथ-साथ North East में भी काफी Infrastructure Projects पर काम चल रहा है। यह सब देश में सिर्फ एक Infra Projects भर नहीं है बल्कि National Security Grid का अहम हिस्सा है। एक समय था जब North East का पूरा इलाका Insurgency की चपेट में था। पिछले 7 सालों में North East में शांति का एक नया दौर आया है। बड़ी संख्या में Insurgents या तो मारे गए है या तो मुख्यधारा में शामिल हो गए। आप पूर्वोत्तर के राज्यों में जायें तो आपको पूरी तस्वीर बदली हुई नजर आएगी। भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई Structural Reforms यानि ढांचागत सुधार भी किए जा रहे है। लम्बे समय के बाद देश में एक Chief of Defence Staff का गठन किया गया है। साथ ही रक्षा मंत्रालय में Department of Military Affairs का भी गठन किया गया।

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