रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
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राजनाथ सिंह ने दिल्ली में रक्षा लेखा विभाग (DAD) द्वारा आयोजित नियंत्रक सम्मेलन को किया संबोधित

देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने आज सोमवार को दिल्ली में रक्षा लेखा विभाग (DAD) द्वारा आयोजित नियंत्रक सम्मेलन को संबोधित किया।

दिल्ली, भारत। देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने आज सोमवार को दिल्ली में रक्षा लेखा विभाग (DAD) द्वारा आयोजित नियंत्रक सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान कहा कि, "हमारे जीवन में लेखा-जोखा की क्या अहमियत है, इस पर बहुत बात करने की आवश्यकता नहीं है। कोई व्यक्ति हो, अथवा परिवार, समाज हो या फिर संगठन, बिना लेखा-जोखा पर ध्यान दिए वह ज्यादा दिनों तक चल नहीं सकता है।"

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कही यह बात:

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि, "आप लोग युवाल नोआ हरारी की किताब Sapiens के बारे में अवगत होंगे। इस book में वह वर्णन करते हैं, कि इतिहास में हमें जो पहला लिखित दस्तावेज प्राप्त होता है, वह एक accounting document होता है।"

उन्होंने कहा कि, "मेसोपोटामिया में मिले इस accounting document में, एक जगह, 37 months के दौरान barley की 29,086 Units की receiving दर्ज की गई है, और उसके नीचे कुशिम नाम के किसी व्यक्ति के signature हैं। वह प्रथम ज्ञात व्यक्ति कोई accountant ही रहा होगा, जिसका वह signature है।"

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि, "दुनिया में सभी संसाधन सीमित हैं। यही बात किसी राष्ट्र, और उसके रक्षा क्षेत्र पर भी लागू होती है। ऐसे में संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की अत्यंत आवश्यकता होती है। जब मैं संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की बात कर रहा हूँ, तो उससे मेरा तात्पर्य दो बातों से है।"

उन्होंने कहा कि, "पहली, कि resources का सही जगह पर उपयोग हो। और दूसरी, उनकी किसी प्रकार से wastage न हो। 'A Penny Saved is a Penny Earned' वाली बात resources पर भी पूरी तरह लागू होती है।"

राजनाथ सिंह ने कहा कि, "आप सभी इस बात से अवगत हैं, कि देश के combat readiness के लिए न केवल समुचित वित्तीय संसाधन का उपलब्ध होना आवश्यक है, बल्कि इसके लिए त्वरित और पारदर्शी निर्णय लेने की भी उतनी ही आवश्यकता होती है।"

उन्होंने कहा कि, "निर्णय लेने में की गई देरी से समय और धन दोनों की हानि तो होती ही है, साथ ही इससे देश की combat readiness पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। इसे सुनिश्चित करने की दिशा में रक्षा लेखा विभाग की अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।"

उन्होंने कहा कि, "रक्षा लेखा विभाग का एक प्रमुख कार्य रक्षा मंत्रालय के संगठनों को वित्तीय सलाह प्रदान करना है। इस वर्ष रक्षा बजट के लिए 5.25 लाख करोड़ allot किए गए हैं, जिनके उचित खर्च सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी रक्षा लेखा विभाग की है।"

उन्होंने कहा कि, "मुझे पूरा विश्वास है, कि विभाग, financial prudence के सिद्धांतों को अपनाते हुए, रक्षा सेवाओं को उनके वित्तीय संसाधनों के प्रबंधन में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहा है। सरकारी धन किसी भी मौके पर जरूरत से ज्यादा खर्च न हो, उसमें authority का अपना या किसी अन्य खास व्यक्ति का कोई हित न जुड़ा हो, यह सब financial prudence है।"

राजनाथ सिंह ने कहा कि, "सही समय पर वित्तीय सलाह प्रदान के लिए Domain Expertise के साथ Client की जरूरतों की संवेदनशील समझ होना भी बहुत जरूरी है। IFA-CFA का GeM portal पर integration जून 2022 से आरंभ हो गया है, जिससे procurement concurrence और sanction की प्रक्रिया digital हो गयी है।"

उन्होंने कहा कि, "इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और शुचिता आएगी। ऐसे में यह session, financial powers की delegation, और decision making से जुड़े मुद्दों की समझ में बहुत सहायक होगा, ऐसा मेरा मानना है।"

राजनाथ सिंह ने कहा कि, "विभाग से मेरी यह अपेक्षा रहती है, कि payment services के सभी beneficiaries, यानि सैनिक, पेंशनधारी और third party सभी को सही समय पर सही भुगतान मिले। साथ ही साथ इस प्रक्रिया में कहीं कोई समस्या आए तो उसका भी त्वरित और निष्पक्ष समाधान हो।"

राजनाथ सिंह ने कही ये बातें-

  • आप लोगों को यह हमेशा ध्यान में रखना है, कि आप जो advice देते हैं, या auditing करते हैं, उसका प्रभाव और परिणाम केवल services अथवा clients तक ही नहीं रहता हैI उसका प्रकारांतर से एक long term effect होता है।

  • आपकी advice से, अगर services या मंत्रालय द्वारा सरकारी खर्च में कुछ बचत होती है, तो उसे देश में health, education, infrastructure building या अन्य विकास कार्यों में लगाया जा सकता है। यह पैसे प्रकारांतर से देशवासियों से ही आते हैं।

  • इसे आप यूँ समझिए, कि auditors का काम finance system में watchdog का है, एक प्रहरी का है। पर कुछ auditors blood-hound का कार्य करने लगते हैं। हमारे अंदर कहीं ऐसी मानसिकता न पनपने लगे, इसका हमें पूरा खयाल रखना होगा।

  • आप ध्यान दें, कि आपको भले ही controller कहा जाता हो, पर आप controller नहीं, बल्कि collaborator की मानसिकता से अपना कार्य करें। Client के साथ मिलकर, integrated होकर काम करें, यह दोनों parties के लिए ही लाभकारी होगा।

  • समझता हूँ रक्षा लेखा विभाग को, अपने अंदर सुधारों की एक प्रक्रिया चलाने की भी जरूरत है। उदाहरण के लिए, हमको अपनी IT capabilities, financial knowledge आदि develop करनी चाहिए, ताकि हम और अधिक efficiency के साथ audit इत्यादि का काम कर सकें।

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