आपदा प्रबंधन पर विश्व कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में राजनाथ सिंह का संबोधन
राजनाथ सिंह का संबोधनSocial Media

आपदा प्रबंधन पर विश्व कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में राजनाथ सिंह का संबोधन

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आपदा प्रबंधन पर विश्व कांग्रेस के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर कहा- आपदा प्रबंधन मानव जीवन और संपत्ति की रक्षा के बारे में हैं।

दिल्‍ली, भारत। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज बुधवार को आपदा प्रबंधन पर विश्व कांग्रेस के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया।

आपदा प्रबंधन मानव जीवन और संपत्ति की रक्षा के बारे में है :

इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा- आपदा प्रबंधन मानव जीवन और संपत्ति की रक्षा के बारे में है। यह आज और भविष्य में गांवों और शहरों, स्कूलों और अस्पतालों, व्यवसायों और आजीविका की रक्षा करने के बारे में है। यह प्रकृति की शक्तियों को समझने और उनका सम्मान करने और उसके अनुसार तैयारी करने के बारे में है। हम एक चुनौतीपूर्ण भू-राजनीतिक परिदृश्य में रहते हैं जहां देशों को प्राकृतिक आपदाओं सहित पारंपरिक और गैर-पारंपरिक खतरों का सामना करना पड़ता है, जिसमें कोविड -19 जैसी महामारी शामिल है, जिसने पिछले दो वर्षों में कहर बरपाया है।

आपदाओं की आवृत्ति में पिछले कुछ वर्षों में कई गुना वृद्धि देखी गई :

उन्‍होंने आगे यह भी कहा कि, ''2030 सतत् विकास लक्ष्यों (एसडीजी) एजेंडे पर महामारी के प्रभाव का व्यापक रूप से मूल्यांकन किया जाना चाहिए और सीखे गए सबक को सतत् विकास लक्ष्यों के कार्यान्वयन के लिए वैश्विक और राष्ट्रीय रणनीतियों में शामिल किया जाना चाहिए। आपदाओं की आवृत्ति में पिछले कुछ वर्षों में कई गुना वृद्धि देखी गई है और एक हिंद महासागर देश के रूप में हमारे लिए प्रासंगिक है, क्योंकि इनमें से साठ प्रतिशत आपदाएं हमारे क्षेत्र में होती हैं।''

अब अनुसंधान कई धीमी शुरुआत के खतरों की ओर इशारा कर रहा है जैसे कि, हिमनदों का पिघलना, समुद्र का स्तर बढ़ना, मरुस्थलीकरण और जलवायु परिवर्तन के कारण मिट्टी का लवणीकरण अभूतपूर्व आपदाओं की नई लहरें पैदा करने के लिए अपने चरम बिंदु तक पहुंच सकता है जिसके विनाशकारी परिणाम होंगे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहीं यह बातें-

  • भारत ने इस संबंध में साहसिक फैसलों की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्री इस चुनौती से निपटने के लिए नरेंद्र मोदी ने पांच तत्वों- 'पंचामृत' को सीओपी-26 में प्रस्तुत किया है।

  • वैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों के रूप में, आप जानते हैं कि अंतरिक्ष, संचार, जैव-इंजीनियरिंग, जैव-चिकित्सा और कृत्रिम बुद्धि के क्षेत्र में कई अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियां उभर रही हैं।

  • स्थानीय संदर्भों में इन प्रौद्योगिकियों के बेहतर अनुप्रयोग और उपयोग के लिए क्षमता विकास के लिए वित्त पोषण पहल के साथ इन प्रौद्योगिकियों के लाभों को सभी के साथ साझा किया जाना चाहिए।

  • भारत ने बार-बार आईओआर में खुद को "फर्स्ट रिस्पॉन्डर" साबित किया है। आईओआर में भारत की अनूठी स्थिति, हमारे सशस्त्र बलों की क्षमता से पूरित, हमें मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) स्थितियों में महत्वपूर्ण योगदान देने में सक्षम बनाती है।

  • भारत अपने पड़ोसियों और मित्र देशों के बीच एचएडीआर सहयोग और समन्वय को गहरा करने के लिए नियमित रूप से अभ्यास करता रहा है, जिसमें विशेषज्ञता साझा करने और क्षमताओं का निर्माण करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसलिए हमें भविष्य की आपदाओं को रोकने और प्रबंधित करने के लिए संरचनाओं के निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय वास्तुकला को मजबूत करने के लिए और अधिक निकटता से सहयोग करना चाहिए।

  • महामारी ने न केवल अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल्कि आपदा प्रबंधन के मामलों के लिए हमारी परस्पर दुनिया में बहुपक्षवाद की केंद्रीयता की पुष्टि की है।

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