डेयर टू ड्रीम पुरस्कार विजेताओं और DRDO के युवा वैज्ञानिकों के समारोह में राजनाथ सिंह
डेयर टू ड्रीम पुरस्कार विजेताओं और DRDO के युवा वैज्ञानिकों के समारोह में राजनाथ सिंहRajexpress

डेयर टू ड्रीम पुरस्कार विजेताओं और DRDO के युवा वैज्ञानिकों के समारोह में राजनाथ सिंह

दिल्ली में 'डेयर टू ड्रीम' पुरस्कार विजेताओं और DRDO के युवा वैज्ञानिकों के अभिनंदन समारोह में राजनाथ सिंह ने कहा- DRDO की मैंडेट, मैं समझता हूँ इसी ‘डेयर टू ड्रीम’ पर आधारित है।

दिल्ली, भारत। दिल्ली में 'डेयर टू ड्रीम' पुरस्कार विजेताओं और DRDO के युवा वैज्ञानिकों के अभिनंदन समारोह आयोजित हुआ, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी पहुंचे और समारोह को संबोधित किया।

यह ड्रीम्स साकार होकर दुनिया को नई-नई दिशाएं देते गए :

समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- आज के इस कार्यक्रम में जो component मुझे सबसे अधिक आकर्षित कर रहा है वह है ‘डेयर टू ड्रीम’ चुनौती, ये तीन शब्‍द हमारे विज़न और मिशन को बहुत clarity से दर्शाते हैंI DRDO की मैंडेट, मैं समझता हूँ इसी ‘डेयर टू ड्रीम’ पर आधारित है। यह ड्रीम्स ही हैं, जो साकार होकर दुनिया को नई नई दिशाएं देते गए। ये ड्रीम्स ही हैं जिन्होंने असंभव सी लगने वाली चीजों को अपनी मुट्ठी में कर लिया। दुनिया की जितनी बड़ी से बड़ी खोज और अविष्कार हैं आप देखेंगे तो पाएंगे कि वे सब किसी न किसी सपने का ही परिणाम है।

हमारे पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई जी ने ऐसे भारत का स्वप्न देखा था, जहाँ बस सुदूर क्षेत्र ही नहीं, बल्कि लोगों के दिल आपस में मज़बूती से जुड़ें। हमारे लिए सौभाग्य की बात है, कि आज हमारे प्रधानमंत्री ने हमें एक नया सपना साकार करने के लिए एक बड़ा व महत्त्वपूर्ण लक्ष्य दिया हैI यह सपना, 1.3 billion लोगों की बेहतरी का सपना है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

ड्रीम्स को लेकर राजनाथ सिंह ने कहा- पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम जी, जिनका जीवन और उपलब्धियां आज देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं, कहते थे कि, सपना, सपना, सपना, सपने विचारों में बदल जाते हैं और विचार कर्म में परिणत होते हैं। ड्रीम्स को कार्य में बदलने के लिए हमें अथक परिश्रम और दृढ़ निश्चय की आवश्यकता होती हैI हमारे यहाँ कहा भी गया है- उद्यमेन हि सिद्धयन्ति, कार्याणि न मनोरथै: I न हि सुप्तस्य सिंहस्य, प्रविशंति मुखे मृगा।

राजनाथ सिंह द्वारा कही गई बातें-

  • आज लगभग 60 Percent young population के साथ हमारा देश, दुनिया का सबसे युवा देश हैI हमारा युवा न केवल आज की जरूरतों, बल्कि आने वाले कल की hopes और aspirations को भी पूरा करने के लिए बिलकुल तैयार है। आज Trade, Economy, Communication, strategic affairs और Military Power यानी हर क्षेत्र में बदलाव देखा जा रहा है। इनसे दुनिया का कोई कोना अछूता रह जाए, मैं समझता हूं वह संभव नहीं है। दुनिया भर में हो रहे यह बदलाव राष्ट्रों की security requirements को भी उतनी ही बढ़ा रहे हैं

  • Global Security Concerns, Border disputes और Maritime affairs की importance के चलते दुनियाभर के देश आज अपनी military modernisation पर focus कर रहे हैं और मिलिट्री equipment की डिमांड तेजी से बढ़ रही है।

  • आज जब हम defence development के लिए private sector के participation की बात कर रहे हैं, तो हमें इसका पूरा ख्याल है कि हम अपने private sector को मज़बूत करें, equip करें और और नई भूमिका के लिए पूरी तरह तैयार करें।

  • ऐतिहासिक रूप से हम देखें Indian defence industry में private sector की presence बहुत कम रही थीI इसके पीछे अनेक कारण थे, पर मैं समझता हूँ Capital एवं Technology की उपलब्धता, long gestation period आदि इसके प्रमुख कारण हुआ करते थे।

  • प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार ने ऐसे अनेक कदम उठाए जिसने defence sector में private industry की भागीदारी मज़बूत की और indigenous defence technologies को एक boost मिला।

  • Defence modernisation के लिए specific budget का provision, 209 items की ‘Positive Indigenization List’ और automatic route के माध्यम से defence sector में 74% तक FDI को बढ़ाना भी important steps है।

  • इन क़दमों से आज हमारे देश में नए-नए start-ups खड़े हुए हैं, MSMEs का potential उभर कर सामने आया है, और इसने employment generation में भी मदद की हैI मुझे यह कहते हुए भी गर्व होता है कि हमारी Armed forces ने self-reliance के प्रयास को पूरे जोश के साथ समर्थन दिया है।

  • इन सभी उपायों के परिणामस्वरुप indigenous defence industry को दिए जा रहे contracts की संख्या में वृद्धि के रूप में हुई है। हम न केवल अपनी domestic security needs पूरी करने, बल्कि technology व equipment को बाहर देशों को export करने की भी दिशा में तेजी से आगे बढ़े हैं।

DRDO डॉ रेड्डी की सराहना की :

इस दौरान राजनाथ सिंह ने डॉ रेड्डी जी की सराहना करते हुए कहा- मैं Chairman, DRDO डॉ रेड्डी जी की सराहना करता हूँ, कि आपके leadership में DRDO, ना सिर्फ technologically advanced countries की capabilities को match करने का प्रयास कर रहा है , बल्कि अपनी तरह की नई technologies के innovation में भी बराबर लगा हुआ है। शुरू से लेकर अभी हाल के LCA Mark 1-A, Arjun Mark-1-A Main Battle Tank और MR-SAM के contracts और induction तक, DRDO हमारी Armed Forces की capacity और capability बढ़ाने में लगातार सहयोग कर रहा है।

  • आज हम New India के नए dimension में, futuristic technologies, जैसे- Nano technology, Quantum computing, Artificial intelligence and robotic technologies आदि पर काम कर रहे हैंI DRDO Young scientists lab और Advance technology centers इन क्षेत्रों में कार्य करना शुरू कर चुके हैं।

  • आज dual use technologies develop करने की भी आवश्यकता है, जिससे बड़े scale पर military और civil, दोनों को इसका लाभ मिल सकेI हमें अपनी Armed Forces को state of the art equipment उपलब्ध कराने के लिए, research & development पर विशेष focus करना पड़ेगा।

  • ऐसे में हमें अपने research & development पर विशेष ध्यान करने और इन तमाम जरूरतों के आधार पर अपने equipment का भी निर्माण करने की आवश्यकता है।

  • भारत ऐसा देश है जहाँ climate condition और terrain में बड़ी विभिन्नता हैI यहां temperature एक ओर Himalaya में Sub-Zero चला जाता है, वहीं desert में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच जाता है।

  • आज जिस तरह DRDO से Industry की ओर Technology transfer की बात हो रही है, आने वाले समय में हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हमारी Industry को इसकी जरूरत ही न पड़े। हमारी Industry इन क्षेत्रों में इतना आगे बढ़ कर कार्य करे, कि भविष्य में हमें industry का सहयोग मिलेI Industry अपने स्तर भी पर in-house R&D systems develop करें।

  • आज हमने DRDO की Directed Research Policy भी release की है। यह futuristic surveillance, defensive और offensive capabilities जैसे important subjects पर focused research में एक important role निभाएगा।

  • मुझे खुशी है कि Gujarat University और DRDO ने मिलकर इस initiative को आगे बढ़ाने के लिए concrete steps उठाए हैं। इस momentous occasion पर गुजरात विश्वविद्यालय के Vice Chancellor और Chairman DRDO को मैं अपनी ओर से congratulate करता हूँ।

बाधाएँ आती हैं आएं, घिरें प्रलय की घोर घटाएँ, पावों के नीचे अंगारे, सर पर बरसें यदि ज्वालाएँ, निज हाथों में हँसते-हँसते, आग लगाकर जलना होगा, कदम मिलाकर चलना होगा, कदम मिलाकर चलना होगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

उन्‍होंने यह भी कहा- आज, जब हम एक साथ कदम से कदम मिलकर नए भारत के विराट सपनों को पूरा करने की ओर दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं, तो इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की कुछ पंक्तियाँ आपके सामने प्रस्तुत करना चाहूँगा।

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