LBSNAA में 28वें संयुक्त नागरिक-सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन में राजनाथ सिंह का संबोधन
LBSNAA में 28वें संयुक्त नागरिक-सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन में राजनाथ सिंह का संबोधनSocial Media

LBSNAA में 28वें संयुक्त नागरिक-सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन में राजनाथ सिंह का संबोधन

उत्तराखण्ड के मसूरी में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह LBSNAA में '28वें संयुक्त नागरिक-सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम' के उद्घाटन में शा‍मिल हुए और दिया यह संबोधन...

उत्तराखण्ड, भारत। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज उत्तराखण्ड राज्य का एक पर्वतीय नगर मसूरी में LBSNAA में '28वें संयुक्त नागरिक-सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम' के उद्घाटन में शा‍मिल हुए।

छोटे मन का इंसान कभी कुछ बड़ा कर ही नहीं सकता :

इस दौरान LBSNAA के 28वें संयुक्त नागरिक-सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- छोटे मन का इंसान कभी कुछ बड़ा कर ही नहीं सकता है। बड़ा करने के लिए बड़ा, और ऊँचा मन चाहिए होता है। इसी तरह के ऊँचे मन, और आदर्शों वाले एक महापुरुष थे, श्री लाल बहादुर शास्त्री जी, जिनके नाम पर LBSNAA के इस संस्थान का नामकरण हुआ है। लाल बहादुर शास्त्री जी ने देश में एक विचार को बड़े ऊंचे स्वरों में प्रतिष्ठित किया था, और वह विचार था हमारे देश की Unity, और ‘Oneness’ का।

इस संस्थान ने अपनी training के माध्यम से पिछले अनेक दशकों में देश की जो सेवा की है, मैं समझता हूं वह unparalleled है। आज के इस program को मैं बड़ा ख़ास मानता हूँI हमारे देश ने अपने Civil & Military Governance Architecture के reform की जो यात्रा शुरू की है, उसमें इस तरह के joint programs निश्चित ही अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह प्रोग्राम भी नेशनल security के domain में जरूरी co-ordination और collaboration की समझ विकसित करने में Civil servants, और Armed forces officers के लिए मददगार साबित होगा, ऐसा मेरा विश्वास है।

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

  • आधुनिक युग में देखें, तो आप पाएँगे कि second world war में अमेरिका की विजय के पीछे केवल सैनिकों का ही योगदान नहीं थाI बल्कि इस महायुद्ध में अमेरिकी समाज के अन्य लोगों, ख़ासकर महिलाओं ने भी अपना पूरा योगदान दिया।

  • आजादी के पहले देश में बिल्कुल अलग शासन व्यवस्था थी I सैकड़ों की संख्या में रियासतों की अपनी व्यवस्था थी, तो अंग्रेजों की अपनी अलगI पर 1947 में अपनी स्वतंत्रता के बाद इस देश ने governance की पुरानी धारा को नए स्वरूप में परिवर्तित होते देखा।

  • देश को सुचारू रूप से चलाने के लिए कार्यों का यह विभाजन आवश्यक था पर कालांतर में सभी विभाग और मंत्रालय silos में काम करने लगेI एक समग्र दृष्टिकोण के अभाव, और silos में काम करने के चलते देश के सभी हिस्सों में विकास समान रूप से नहीं पहुंच पाया।

  • अब हम जिस नए approach के साथ कार्य कर रहे हैं, उसमें समाज का हर वर्ग विकास की ओर आगे बढ़ रहा हैI National security के संदर्भ में Jointness की बात और अधिक relevant और आवश्यक हो जाती है।

  • National security का concept पहले की अपेक्षा अब बहुत व्यापक हो गया हैI सामान्य तौर पर तो इसे military attack से अपनी सुरक्षा से जोड़ा जाता है, पर अब इसमें अनेक non-military dimensions भी जुड़ गए हैं।

  • War और peace दो exclusive states न होकर अब continuum हो गए हैंI Peace के दौरान भी अनेक front पर war चलते रहते हैंI इनके बीच की सीमा काफी धुंधली हो गई है।

  • आप सभी Pyrrhic victory (पिरैक विक्ट्री) के बारे में जानते होंगे, यानी ऐसी जीत, जो किसी काम की न हो। ऐसे में हम पिछले कुछ दशकों में देखें, तो दुनिया की बड़ी शक्तियों ने full scale war को avoid किया है। अब इनकी जगह proxies, और non-contact wars ने ले लिया है।

  • Economic coercion को भी पिछले कुछ समय में हमने military force के अलावा एक प्रमुख बल के रूप में देखा है। Cyber, और Information भी इसी तरह की forces हैं, जो खुली आंखों के सामने भी धोखा देने की क्षमता रखती हैं।

  • सेनाओं के modernization और रक्षा क्षेत्र की आत्मनिर्भरता के लिए जो-जो कदम उठाए गए हैं उनके परिणाम हमारे सामने आने शुरू हो गए हैंI वर्तमान में हम न केवल अपने लिए military साजो सामान तैयार कर रहे हैं, बल्कि दूसरे देशों की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी उत्पादन को और बढ़ा रहे हैं।

  • सी तरह grey zone conflict से निपटने के लिए और हमारी national security को और सुदृढ़ करने के लिए भी हम jointness की ओर आगे बढ़ रहे हैं। इस background में, Joint Civil-Military Program के महत्व को समझा जा सकता है।

  • अपने experiences और concerns share करते हैंI जब तक hybrid threats से निपटने के लिए Civil Administration और Armed forces के silos को तोड़ा नहीं जाता है, हम एक राष्ट्र के रूप में खतरों और चुनौतियों का जवाब देने के लिए पर्याप्त तैयारी की उम्मीद नहीं कर सकते हैं।

  • यहां जब मैं synergy, या सभी संस्थानों के एक साथ मिलकर आगे बढ़ने की बात कर रहा हूं, तो यह मैं बड़ी सावधानी से कह रहा हूंI संस्थानों के एक साथ मिलने का यह कतई अर्थ न हो कि वह आपस में एक दूसरे के अधिकारों का अतिक्रमण करें। इसका अर्थ यह कतई न हो कि वे एक दूसरे की autonomy का अतिक्रमण करेंI इसका अर्थ यह है, कि वह आपस में इस तरह घुलें-मिलें, जैसे मिलते हैं इंद्रधनुष के रंग।

  • मुझे पूरा विश्वास है, कि हम समन्वय के जिस पथ पर आगे बढ़ रहे हैं, वह न केवल हमारी अपनी समग्र सुरक्षा, बल्कि पूरे विश्व में शांति के एक नए दौर तक पहुँचेगाI इस तरह के Joint Civil-Military Program इस राह में अपनी भूमिका लगातार बनाए रखेंगे, ऐसा मेरा विश्वास। आज तक भारत ने किसी देश पर आक्रमण किया है न ही किसी देश की एक इंच भूमि पर क़ब्ज़ा किया है। यहाँ से ही वसुधेव कुटुम्बकम का संदेश दिया है।

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